Pages

Sunday, April 7, 2013


गुलामी, मानवता व भारत के कातिल गुनाहगारों को गौरवान्वित करने का देशद्रोह क्यो?


देश का दुर्भाग्य यह है आज देश के हुक्मरानों व नौकरशाहों को ही नहीं यहां के पत्रकार सहित तमाम अधिकांश बुद्धिजीवियों को इस बात का भान तक नहीं है कि देश में काॅमनवेल्थ खेल व सम्मेलन, देश में फिरंगी गुलामी व मानवता को रौंदने वालों को गौरवान्वित करने के लिए बनाये जा रहे काॅरोनेशन पार्क, बाबर, ओरंजेब के नाम पर बनाये गये सड़क मार्ग क्या देश के आत्मसम्मान, गौरव व वजूद को नहीं रौंद रहे है? जिस आजादी को हासिल करने के लिए देश के लाखों लोगों ने अपनी शहादत दी। उस आजाद भारत में भारतीय नाम से, भारतीय भाषा में भारतीय संस्कृति के गौरवशाली प्रतीकों से वर्तमान व भावी पीड़ियों को आत्मगौरव व प्रेरणा से देश का नाम पूरे विध्व में रोशन कर विकास की डगर भरते । परन्तु आज देश में वही विदेशी भाषा, विदेशी नाम व विदेशी लुटेरों के नामों को आदर्श बना कर देश को मानसिक रूप से गुलाम बना कर कमजोर बनाया जा रहा है। यह षडयंत्र जारी है। देश में नैतिक मूल्यों युक्त शिक्षा देने के बजाय समाज को भ्रष्टाचार, यौन कुण्ठाओं,व्यभिचार से पथभ्रष्ट हिंसक समाज बनाने का कृत्य में देश की व्यवस्था लगी हुई है। देश में सदचरित्र, सदाचार मजबूत राष्ट्र बनाने के बजाय शराब, गुटका, बीडी सिगरेट, तंबाकू, व कत्लखाने खोल कर देश के सनातन मूल्यों का गला घोंटने के साथ साथ भविष्य को तबाह कर रहे है।
संसार का इतिहास इस बात का गवाह है कि संसार में कोई व्यक्ति, समाज या देश कितना आर्थिक उन्नति व आधुनिक विकास का परचम फेला ले परन्तु जब तक सनातन, संस्कारित मूल्यों युक्त नेतृत्व व समाज न हो तो तमाम राष्ट्र रेत के महल की तरह इतिहास के कालखण्ड में विलीन हो जाती है। संसार के तमाम देश आज इसी बात से अचंम्भित हैं कि केसे भारत जो संसार का सबसे प्राचीनतम व समृद्ध संस्कृति युक्त देश को बार-बार विदेशी आक्रांताओं द्वारा रौंदे जाने के बाबजूद तमाम झंझावतों को सहते हुए भी सदियों से जीवंत राष्ट्र के रूप में विश्व को मार्गदर्शन कर आलोकित कर रहा है? यह सब हमारी सनातन जीवंत मूल्यों के कारण हो रहा है। परन्तु इन मूल्यों  को संवर्धन करने के बजाय गौ गंगा व गीता के सनातनी मूल्यों पर आज शराब, कत्लखाने व विदेशी भाषा के गुलाम मानसिकता के वर्तमान भारतीय हुक्मरान अपने सत्तालोलुपता के स्वार्थ में अंधे हो कर देश को पतन के गर्त में धकेलने का निकृष्ठ राष्ट्रघाती कृत्य कर रहे है। देश पर जितना खतरनाक संकट चंगैज, गजवनी, ओरंजेब व फिरंगियों ने मिल कर खड़ा नहीं किया जितना आजादी के बाद यहां के पथभ्रष्ट, फिरंगी भाषा व संस्कृति के अंधे गुलाम निरंतर ढा रहे हैं। जिन लोगों का कहीं सनातन मूल्यों युक्त सामाजिक चिंतन नहीं और जो खुद आचरणहीन है देश के अधिकांश महत्वपूर्ण संस्थानों में महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हो कर वे भारत के भाग्य विधाता बने है। जिससे देश में अराजकता, आतंक, महंगाई, व्यभिचार व हिसा युक्त कुशासन से आम जनता त्रस्त है।  आज देश के आज देश में अधिकांश धर्माचार्य व राजनेता अपनी तिजोरियों को भरने में लगे हैं केवल चंद ही लोग स्वामी रामदेव की तरह इस देश की सनातनी मूल्यों की पावन गंगा को आम जनमानस में बहाने व संवर्धन करने में लगे है। आज जरूरत है देश की सनातन मूल्यों को आत्मसात करके पूरे विश्व के जड़ चेतन के कल्याण के लिए समर्पित भारतीय संस्कृति व देश को मजबूत करने की। केवल सत्ता के लिए सनातनी मूल्यों को रौंदने व मानवता एवं भारत को गुलाम बनाने वाले गुनाहगारों को गौरवान्वित करते हुए विदेशी भाषा व पथभ्रष्ट संस्कृति को थोप कर, देश को शराब का गटर बनाने वाले, लाखों निर्दोष जीवों का कत्ल करने के लिए कत्लखाने खोलने वाले व अनैतिकता का पाठ नौनिहालों में पढ़ाने वाले, राष्ट्र की जडों में मट्ठा डालने वाले देशघाती गुनाहगार ही हैं। आज जरूरत है इन तत्वों से देश की रक्षा करने की। अगर राष्ट्र मजबूत नहीं रहेगा तो न तो धर्म ही सुरक्षित रहेगा व नहीं व्यक्ति। विकास भी रेत के महल की तरह अराजकता की थपेडों से ढह जायेगा।

No comments:

Post a Comment