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Tuesday, October 18, 2011

बेदर्द हुक्मरान


बेदर्द  हुक्मरान 
जिन्होने देष ओर जनता के 
वर्तमान और भविश्य को, 
अपनी  सत्तालोलुपता के 
खातिर रौंद कर भी  कभी,
उफ तक  न की हो,
ऐसे बेदर्द हुक्मरान 
जनता की कराह को भी 
अपनी षान के खिलाफ
गुस्ताखी मान कर 
उनकी जुबान को 
लाठी गोली से 
रौंद कर सदा के लिए
राजबाला की तरह  
लोकषाही को बचाने के
नाम पर सदा के लिए
षांत करा देते हें।
- देवसिंह रावत  

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