हे जगदीश मेरे श्रीकृष्ण


निज स्वर बंधन में  बांध कर तुमने
की अदभूत सृष्टि की रचना 
हे जगदीश  मेरे श्रीकृष्ण
कैसी सुन्दर तुम्हारी मनमोहक प्रकृति

Comments

Popular posts from this blog

>भारत रत्न, अच्चुत सामंत से प्रेरणा ले समाज व सरकार