ऐसी प्रखर नव प्रभात जग में कर दो


ऐसी प्रखर नव प्रभात जग में कर दो
जय श्रीकृष्णम् शुभ प्रंभातम्, 
करूं श्री हरि हर का वंदन
ंतन-मन-जग को निर्मल करदो
प्रभु ऐसी ही शुभ जग में कर दो
मिटे रागद्वेष, घृणा, अज्ञानता जग से
शोषण, रोग मुक्त हो जड़ चेतन
रहे न दीनहीन, असहाय इस जग में
मिटे जाति,क्षेत्र, रंग, लिंग व धर्म भेद
ऐसी प्रखर नव प्रभात जग में कर दो
तन मन को प्रभु आलौकित कर दो।।

ंदेवसिंह रावत (29 अक्टूबर 2011 प्रात 7.48 बजे)

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