Pages

Friday, October 28, 2011

ऐसी प्रखर नव प्रभात जग में कर दो


ऐसी प्रखर नव प्रभात जग में कर दो
जय श्रीकृष्णम् शुभ प्रंभातम्, 
करूं श्री हरि हर का वंदन
ंतन-मन-जग को निर्मल करदो
प्रभु ऐसी ही शुभ जग में कर दो
मिटे रागद्वेष, घृणा, अज्ञानता जग से
शोषण, रोग मुक्त हो जड़ चेतन
रहे न दीनहीन, असहाय इस जग में
मिटे जाति,क्षेत्र, रंग, लिंग व धर्म भेद
ऐसी प्रखर नव प्रभात जग में कर दो
तन मन को प्रभु आलौकित कर दो।।

ंदेवसिंह रावत (29 अक्टूबर 2011 प्रात 7.48 बजे)

No comments:

Post a Comment