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Thursday, January 12, 2012

सोनिया को विदेषी कहने वाले भारतीय संस्कृति के दुष्मन हैं


सोनिया को विदेषी कहने वाले भारतीय संस्कृति के दुष्मन हैं
कब तक यों ही लकीर पिटते रहोगे, अंधेरी रात के,
सुबह कब की हो गयी हैं जरा आंखे तो खोल
मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि भारतीय राजनेताओं ने सोनिया, गांधी, नेहरू परिवार के बारे में ऐसा हौव्वा खड़ा किया हुआ है कि मानों ये गांधी नेहरू परिवार सतयुग, द्वापर त्रेता व कलयुग सहित अनादिकाल से चला आ रहा है। इनके अनुसार देष में हर समस्या की जड़ गांधी नेहरू परिवार है।  देष में विदेषी आक्रांताओं (मुगल व फिरंगियों आदि) से पहले भी इस देष में समस्यायें ही समस्यायें थी, सेकड़ों सत्तांध राजाओं व पथभ्रश्ट धर्माचार्यो के कारण भारत का आम जनमानस त्रस्त था। जातिवाद, क्षेत्रवाद, लिंग, रंग व सामंती संकीर्णताओं में जड़के समाज में जड़ता सदियों से भारतीय समाज की विष्व को आलौकित करने वाली कालजयी संस्कृति को कलंकित व कमजोर करने का काम कर रही है।  भारतीय संस्कृति का मूल उदघोश स्व व पर से उपर उठ कर सत व असत के संघर्श की इजाजत देती है परन्तु दुर्भाग्य की बात है कि भारतीय संस्कृति के स्वयंभू ध्वजवाहकों ने जो अपमान सोनिया गांधी का विदेषी विदेषी कह कर किया, वह भारतीय संस्कृति को षर्मसार करने का ही कृत्य रहा। इस कृत्य का दण्ड प्रकृति ने इन गुनाहगारों को अपने ही ढ़ग से दिया। व निदंतर देती रहेगी। भले ही सोनिया गांधी ने कभी किसी को इस अपमान करने के कारण उफ तक न की हो पर भगवान दुनिया में किसी भी को इस प्रकार से सताने, अपमानित व षोशण करने वालों को दण्ड देता है। सोनिया गांधी, देष के प्रधानमंत्री रहे स्व. राजीव गांधी की धर्मपत्नी है। आम घरों में भी षादी के बाद जिस दिन से बहु अपने ससुराल में कदम रखती है, उसके बाद ससुराल ही उसका अपना होता है। हमारा कानून भी बहु को प्रताड़ित करने वालों को अपराधी मानता है। दुर्भाग्य से राजीव गांधी की  आतंकियों ने आत्मघाती हमले में निर्मम हत्या की। हमारे तमाम धर्म  षास़्त्र  भी विधवा को संरक्षण देने की सीख देते है। मुझे आषा है कि वे लोग जो अपनी असफलताओं, अक्षमता, अज्ञानता व नकारेपन को छुपाने के लिए सोनिया को विदेषी कह कर देष की जनता को गलत दिषा दे रहे हैं, क्या वे अपने घर परिवार में अपनी माॅं या बहुओं को इसी प्रकार से उनके मायके के नाम पर उनको घर से बाहर का सदस्य बता कर अपमानित करते है? क्या ग्राम सभा के चुनाव में किसी बहु को इस बात के लिए विरोध किया जाता हे कि उसका जन्म स्थान उस गांव में नहीं है? कौन किस जाति, धर्म, रंग, लिंग, क्षेत्र में जन्म लेता है यह उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं है। यह सब परमात्मा के विधान के अनुसार होता है? इस आधार पर विरोध करना परमात्मा की प्रभुता पर रौंदने या उसको अपमानित करना ही है। ऐसे लोग मानवता, देष, समाज, गांव व घर के लिए आत्मघाती ही साबित होते हैं। सोनिया गांधी हो या कोई भी व्यक्ति हो उसका समर्थन या विरोध केवल उसके अच्छे या बुरे कार्यो के आधार पर किया जाना चाहिए। सोनिया गांधी का विरोध देष में बढ़ती हुई मंहगाई, भ्रश्टाचार, आतंकबाद सहित मनमोहन सिंह के नकारे कुषासन के लिए किया जा सकता है परन्तु उनका मायका इटली में है इस कारण उनको बार बार विदेषी -विदेषी कह कर अपमानित करने वाले भारतीय संस्कृति को रौंदने वाले ही माना जा सकता है।  जब सम्म्मान व विरोध  कार्यो के आधार पर न हो कर स्व व पर या देषी विदेषी के नाम पर या जाति-धर्म,क्षेत्र, भाशा, लिंग आदि के नाम पर किया जाने लगे तो वह अधर्म है।

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