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Tuesday, August 23, 2011

अण्णा को नोबल पुरस्कार देकर अपनी भूल सुधारेगी नोबल समिति?

अण्णा को नोबल पुरस्कार देकर अपनी भूल सुधारेगी नोबल समिति?/
-विश्व में अनोखा अहिंसक जनांदोलन करके दी नयी सीख/
-गांधी के बाद देश की जनता को जागृत करने का किया ऐतिहासिक कार्य /


हिंसा से ग्रस्त विश्व जनसमुदाय को अहिंसक आंदोलन करके अचंभित करने वाले भारत के अग्रणी समाजसेवी अण्णा हजारे ने विश्व मानवता को जो शांति व लोकशाही की जो किरण दिखायी, उसकी महता को देखते हुए विश्व शांति के लिए सर्वोच्च सम्मान देने वाली नोबल समिति केपास अण्णा हजारे को नोबल पुरस्कार देने के अलावा और कोई रास्ता नहीं रह गया है। अण्णा हजारे को शांति का नोबेल पुरस्कार दे कर नोबेल समिति अपनी उस शर्मनाक भूल को सुधार सकती है जो उन्होंने गत सदी के सबसे बड़े अहिंसक जनांदोलनों के महानायक महात्मागांधी को अपनी संकीर्ण मानसिकता के कारण नोबेल पुरस्कार न देकर अपनी समिति को खुद ही कटघरे में खडा कर दिया है। महात्मा गांधी के इस आंदोलन की अमिट छाप पूरे विश्व में जिस प्रकार से अमेरिका के महानायक मार्टिन लूथर किंग से लेकर ओबामा तक साफ दिखाई देता हैं वहीं अफ्रिका के जनांदोलनों के महानायक नेलशन मंडेला तक साफ दृष्टिगोचर होता है। विश्व प्रसिद्व वैज्ञानिक आईस्टिन ने गांधी की महता को देख कर जो शब्द कहे थे कि आनी वाली पीढ़ी को यह विश्वास भी नहीं होगा कि ऐसा अदभूत चमात्कारिक जननायक हमारी धरती पर कभी हुआ होगा जिसके आगे कभी सूर्यास्त न होने का दंभ भरने वाले फिरंगी सल्तनक की चूलें हिला दी। जिसने शताब्दियों से गुलामी की जंजीरों में पशुवत बने भारतीय जनमानस को फिरंगी तोप व बंदुकों के दमन के आगे फोलादी सीना तान कर विरोध करने की अदभूत शक्ति दी। आज महात्मा गांधी के सपनों के भारत को जमीदोज करने में आजादी के बाद की सरकारों ने जो लोकशाही का गला घोंटने का दुशाहस किया तो भारत में फिर भगवान श्री कृष्ण की अन्यास के खिलाफ सदा संघर्ष करने की अमर शंखनाद ने महाराष्ट के गांव के समाजसेवी अण्णा हजारे को विश्व लोकशाही का नया गांधी बना कर स्थापित कर दिया।
अण्णा के इस अदभूत जनांदोलन ने जहां जनांदोलनों को रौंदने पर उतारू भारत की मनमोहन सरकार का अहंकार जमीदोज कर दिया है वहीं देश की लोकशाही के लम्बरदार बने राजनैतिक दलों को लोकशाही का भी ऐसा पाठ पढ़ा दिया कि उनको अब देश की जनता ही देश की सच्ची भाग्य विधाता व खुद को जनता का सेवक लगने लग गया है। आमरण अनशन के आठवें दिन भी जनलोकपाल विधेयक को लेकर रामलीला मैदान में आमरण अनशन कर रहे देश क े विख्यात अग्रणी विश्व प्रसिद्व गांधीवादी अण्णा हजारे क े समर्थकों के देश विदेश में उमड़े जनशैलाव ने भारत की अब तक की सबसे जनहितों को रोंदने वाली मनमोहन सिंह की सरकार की नींद उडा दी है। पूरा विश्व अचम्भित है। अचम्भित होना भी सहज है जिस प्रकार से अमेरिका से लेकर अफगानिस्तान, इराक,रूस, चीन , पाक, सहित पूरा संसार आतंक से छलनी होने के भय से भयभीत है उसे देखते हुए अण्णा हजारे का अहिंसक आंदोलन विश्व को नयी दिशा देने का ऐतिहासिक योगदान दे रहे है। भले ही भारत की सरकार इसकों स्वीकार करे या न करें परन्तु अण्णा हजारे गांधी के बाद देश के आम अवाम को न केवल झकझोरने में सफल रहे अपितु वे देश की जनता को अपने हक हकूकों के बारे में जागृत कर दिया है। अ ब सरकार का भविष्य सांसदों के हाथों में नहीं अपितु देश की आम जनता के हाथों में सुरक्षित हो गया है। जनता देश हित में कार्य करने के लिए सरकारों को विवश कर सकती है। देश के जनप्रतिनिधियों को जो अब तक जनता के मतों का हरण करने के बाद केवल देश की निधि की बंदर बांट करने को अपना जन्मसिद्व अधिकार समझ रहे थे उनको उनकी सही जगह दिखाने का काम भी अण्णा हजारे ने किया। उसके लिए प्यारा उत्तराखण्ड समाचार पत्र की तरफ से अण्णा हजारे व उनके पूरी टीम सहित देश की जनता को मेरा शतः शतः प्रणाम।

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