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Tuesday, August 16, 2011

जनविरोधी प्रधानमंत्री मनमोहन को अविलम्ब हटा कर व जनलोकपाल को स्वीकार कर प्रधानमंत्री बने राहुल

जनविरोधी प्रधानमंत्री मनमोहन को अविलम्ब हटा कर व जनलोकपाल को स्वीकार कर प्रधानमंत्री बने राहुल/
जनाक्रोश से सहमी दमनकारी मनमोहन सरकार पर भारी पड़े अण्णा/


देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के लिए जन लोकपाल कानून बनाने की मांग को लेकर 16 अगस्त 2011 से दिल्ली के जय प्रकाश पार्क में आमरण अनशन करने का निकले देश के शीर्ष गांधीवादी नेता अण्णा हजारे व उनके हजारों समर्थकों को अलोकतांत्रिक ढंग से जेल में बंद करके लोकशाही का गला घोंटने को तुली मनमोहनी सरकार ने देश व्यापी जनाक्रोश के आगे घुटने टेकते हुए तिहाड में बंद अण्णा हजारे व साथियों को रात के 9.15 मिनट पर तिहाड़ जेल से रिहा करने का ऐलान करने को मजबूर होना पड़ा। लोकशाही की इस जीत से गदगद अण्णा हजारे ने जेल से रिहा होने के बाद जय प्रकाश पार्क में जाने की योजना से मनमोहनी सरकार के हाथ पांव फूल से गये हे। इस लिए उन्हें सरकार बाबा रामदेव की तरह दिल्ली से बाहर भी भेजने की रणनीति पर भी विचार कर रही है। परन्तु सरकार को यह समझने की भूल कर रही हे कि अण्णा कोई बाबा रामदेव नहीं जो सरकारी दमन के आगे चुपचाप सर झुका देंगे। सरकार उनको जितना भी दमन करेगी वे उतने मजबूत हो कर सरकार के सामने कड़ी चुनौती खडी कर सकते हैं। इस चुनौती को निपटने में सरकार पूरी तरह असफल हो सकती है। मेरा यही आंकलन तब सही साबित हुआ जब अण्णा ने बिना षर्त रिहा होने से मना करके तिहाड जेल परिसर में ही अपना अनषन जारी रखा है। अण्णा बिना षर्त रिहा हो कर जे पी पार्क में आमरण अनषन करके प्रधानमंत्री सहित न्याय पालिका को भी जनलोकपाल के दायरे में लाना चाहती है। सरकार जितना बिलम्ब करेगी उतनी ही उसको भारी पडेगा। गौरतलब अण्णा के जेल में बंद करने की कांग्रेस सरकार की सरकारी दमनकारी कार्यवाही को देश की आम नजता ंही नहीं पूरे विश्व जनमत भौचंक्के हो कर देख रहा है। चैतरफे आक्रोश को देखते हुए कांग्रेस के आत्मघाति नीतिनिर्धारकों ने अण्णा को रिहा करने का मन बना लिया। सरकार की इस आत्मघाति कार्यवाहीं ने जहां कांग्रेस की जड़ों में मठ्ठा डालने का काम किया वहीं सरकार को पूरी तरह से जनता की नजरों में खलनायक ही बना दिया। अण्णा की गिरफतारी के विरोध में न तो संसद चल सका व नहीं देश का कोई अन्य संस्थान चारों तरफ कांग्रेसी सरकार की इस दमनात्मक कार्यवाही का कड़ी भत्र्सना। इस अवसर को भुनाते हुए भाजपा ने जहां देश व्यापी आंदोलन छेडने का मन बना लिया वहीं संघ भी इस आंदोलन में पूरी तरह से कूूद गया है। अण्णा के इस आंदोलन में सम्मलित होने के लिए में पूरी तरह से तत्पर रहा। परन्तु सुबह से समाचार पत्र प्रकाशित करने के कारण में इसमें सम्मलित चाह कर भी नहीं हो सका। अभी सांय में जब जंतर मंतर पर गया तो वहां पर सरकारी दमन के खिलाफ मशाल जलूश में सम्मलित हो कर मैरे दिल को शांति मिली। यहां पर इस मशाल जलूस में भले भाजपाईयों का था। ंपरन्तु विरोध सरकार की तानाशाही के खिलाफ व अण्णा के आन्दोलन के समर्थन में थाा। मुझे यहां पर भाजपा में दिल्ली के उत्तराखण्डियों के एकमात्र प्रतिनिधी विधायक मोहन सिंह बिष्ट व भाजपा युवा नेता डा विनोद बछेती भी मिले। इस मशाल जलूस का नेतृत्व भाजपा के पूर्व अध्यक्ष बेंकटया कर रहे थे। इसमें दिल्ली प्रदेश के तमाम बडे नेता भी सम्मलित थे। पूरा संसद मार्ग थाना मशाल व गगनभेदी नारों से गूंज रहा था। जिस प्रकार से तिहाड जेल से लेकर छत्रसाल स्टेडियम से लेकर पूरे देश में लोग जनाक्रोश में उमड़ रहे थे, उसे देख कर शायद राहुल गांधी ने जनता की नब्ज को समझते हुए प्रधानमंत्री को सलाह देकर अविलम्ब अण्णा को रिहा करने का निर्णय लिया। जो कांग्रेस की डूबते हुए जहाड को तिनके के सहारे के सम्मान होगा। राहुल गांधी को चाहिए कि वह देश की पूरी व्यवस्था को रसातल में धकलेने वाले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अविलम्ब हटा कर प्रधानमंत्री के पद पर आसीन हो कर जनभावनाओं का सम्मान करें तथा देश को इस भंवर से बचाने में अपने दायित्व का निर्वहन करें। राहुल गांधी को अण्णा की मांग को अविलम्ब स्वीकार कर देष को होनी वाली आरजकता से बचाना चाहिए व भ्रटाचार दूर करने के लिए अण्णा की मांग के तहत प्रधानमंत्री व न्यायपालिका को भी लोकपाल के दायरे लाने का आष्वासन देकर तथा मनमोहन को अविलम्ब प्रधानमंत्री के पद से हटा कर स्वयं प्रधानमंत्री बन देष की रक्षा करनी चाहिए।

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