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Tuesday, August 9, 2011

जनरल रावत की हुंकार से भाजपा सरकार में हडकंप

जनरल रावत की हुंकार से भाजपा सरकार में हडकंप


नई दिल्ली। भाजपा नेता व सेवानिवृत ले. जनरल तेजपाल सिंह रावत ने प्रदेश में आकंठ व्यापत भ्रष्टाचार के खिलापफ खुली हुकार से जहां भ्रष्टाचार के आगोश में जनता की नजरों में कटघरे में घिरी निशंक सरकार सहम सी गयी है वहीं प्रदेश की राजसत्ता में सत्तासीन होने के कांग्रेसी मंसूबों पर भी मानो ग्रहण सा लग गया है। भाजपा व कांग्रेस की उत्तराखण्ड विरोध्ी कुनीति व उक्रांद की घोर आत्मघाति सत्तालोलुपता के कारण प्रदेश की राजनीति में तीसरे मोर्चा के भविष्य से निराश उत्तराखण्ड की जनता को भी प्रदेश की राजनीति में जनरल रावत के नेतृत्व में उभरे इस तीसरे विकल्प को आशा के प्रखर सूर्य की रूप में देख रहे है। आगामी 14 अगस्त को देहरादून में आहुत उत्तराखण्ड के प्रथम सम्मेलन पर पूरे प्रदेश के ही नहीं दिल्ली दरवार के राजनेताओं की नजरे गड़ी हुई है।
14 अगस्त को होने वाले इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में जहां प्रदेश की संस्कृति व समाज को अपने स्वरों से नई दिशा देने वाले महान गायक नरेन्द्रसिंह नेगी सम्मलित हो रहे हैं। वहीं इसमें स्थापित कई राजनेताओं के अलावा उत्तराखण्ड राज्यगठन जनांदोलन व सामाजिक संगठनों के कई अग्रणी नेता पधर रहे है। प्रदेश की राजनीति में उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा के उदय ने कई स्थापित राजनेताओं की नींद जहां हराम कर दी है वहीं प्रदेश के राजनीति में भी भारी उथल पुथल मचा दी है। प्रदेश के मुख्यमंत्राी निशंक से लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष जनरल रावत से अपनी मुहिम पर भाजपा के हित में बिराम लगाने की गुराह लगा चुके हैं परन्तु जनरल रावत ने दो टूक शब्दों में सापफ कर दिया कि उनकी मुहिम अब किसी भी कीमत पर बंद नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यह दलगत राजनीति से उपर उठ कर प्रदेश के अस्तित्व की रक्षा का सबसे बड़ा सवाल है। जनरल के कड़े तेवरों को देख कर जहां प्रदेश की जनता में भारी उत्साह है वहीं राजनैतिक दलों में भारी हड़कंप मचा हुआ है। इसकी गूंज दिल्ली दरवार में भी सापफ सुनाई दे रही है। गौरतलब है कि गत सप्ताह उत्तराखण्ड में घटित इस राजनैतिक घटना ने भाजपा को पूरे देश के समक्ष बेनकाब कर दिया है। भले ही निशंक के मीडिया मनेजमेंट के कारण यह घटना देश की मीडिया में स्थान हासिल नहीं कर पाया परन्तु उत्तराखण्ड की राजनीति के मठाध्ीशों के चेहरे के हवाईयों उडाने में कापफी हद तक कामयाब रहा। उनकी घबराहट का नतीजा यह है कि सारे नेता भ्रष्टाचार के खिलापफ संघर्ष करने के बजाय भ्रष्टाचार के खिलापफ हंुकार भरने वाले तेजपाल सिंह रावत के खिलापफ ही शब्द बाण चला रहे हैं । जिसे जनता पहली नजर में ही ध्क्किार रही है।
कर्नाटक में भ्रष्टाचार में पफंसी भाजपा की सरकार के शर्मनाक पतन प्रकरण से अभी भाजपा नेतृत्व उबर भी नहीं पाया था कि उत्तराखण्ड में आसीन भाजपा सरकार के मुखिया निशंक सरकार के कुशासन के खिलापफ पार्टी में ही व्यापक असंतोष की खबरों ने भाजपा मठाध्ीशों की नींद उडा दी। खासकर भाजपा नेतृत्व इन विश्वसनीय खबरों से भौचंक्का है कि उत्तराखण्ड भाजपा के कई वरिष्ठ नेता भ्रष्टाचार के खिलापफ प्रदेश व्यापी खुली जंग का ऐलान करने का मन बना चुके है। प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलापफ इस ऐलान का नेतृत्व कोई और नहीं अपितु भाजपा के पूर्व सांसद रहे ले. जनरल तेजपाल सिंह रावत कर रहे है। ले. जनरल तेजपाल सिंह रावत जो प्रदेश के पूर्व मंत्राी के रूप में पूर्व सैनिक प्रधन इस राज्य के लाखों पूर्व सैनिकों व आम जनता में अपनी अच्छी खासी पकड़ बना चूक है। उनके साथ भाजपा के कई नामी नेताओं के अलावा प्रदेश के सबसे बड़े लोक गायक नरेन्द्रसिंह नेगी, कई पूर्व सैनिक उच्चाध्किारी, समाजसेवी व राज्य गठन जनांदोलन के कई प्रमुख आंदोलनकारी इस भ्रष्टाचार के खिलापफ छेड़े जाने वाले ऐतिहासिक जंग में सम्मलित होने का मन बना चूके है। इस मोर्चे की बनने की खबर ने पूरे प्रदेश की राजनीति में उथल पुथल सी मचा दी है। एक तरपफ भाजपा व कांग्रेस के कुशासन तथा उक्रांद की दिशाहीनता से त्रास्त प्रदेश की जनता बहुत ही बेसब्री से तीसरे विकल्प की इंतजारी में पलके बिछाई हुई है। वह इस तीसरे विकल्प की दिशा की तरपफ बढ़ रहे इस ‘उत्तराखण्ड बचाओं मोर्चा ’ को खुले स्वागत के लिए तैयार है। ऐसे में जब प्रदेश के लोग प्रदेश के संसाध्नों की खुली लूट खसोट व गैर उत्तराखण्डियों के बढ़ते हुए दखल को देखते हुए जनता प्रदेश की निशंक सरकार को भी पूर्ववर्ती तिवारी सरकार की तरह जल्द ही मुक्ति चाहती है। इस दिशा में वह किसी भी मजबूत संभावित राजनैतिक विकल्प का स्वागत करने के लिए तत्पर है, जिसमें जरा सी भी राजनैतिक सुझबुझ व उत्तराखण्डी हितों का भान हो।
गौरतलब है कि भाजपा के दो वरिष्ठ जननेता पूर्व मुख्यमंत्राी भुवनचंद खंडूडी व भगतसिंह कोश्यारी वर्तमान मुख्यमंत्राी रमेश पोखरियाल सरकार के भ्रष्टाचार के कृत्यों से लम्बे समय से संतुष्ट है। वे दिल्ली दरवार में कई बार अपनी वेदना प्रकट कर चूके हैं । भाजपा के दोनों वरिष्ट नेता ही नहीं प्रदेश की आम जनता यह देख कर हैरान है कि सटर्जिया सहित कई भ्रष्टाचारों में पूरी तरह से घिर चूकी उत्तराखण्ड सरकार के मुखिया रमेश पोखरियाल को तलब करने के बजाय केन्द्रीय नेतृत्व न जाने किस लोभ में उनको शर्मनाक संरक्षण देने को उतारू है। यहां स्थिति कर्नाटक से शर्मनाक होने के बाबजूद शायद भाजपा नेतृत्व कर्नाटक सी पफजीहत होने देने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि भाजपा नेतृत्व प्रदेश में समय समय पर उभर रहे असंतोष को दबाने के लिए जुटा रहता है। परन्तु उनके दवाब के बाबजूद प्रदेश भाजपा के नेतृत्व को आम जनता तो रही दूर प्रदेश का भाजपा के नेता ही स्वीकार नहीं कर पा रहे है। हालत यह है कि तमाम दवाब के बाबजूद निशंक के साथ खड़े होने में खडंूडी व कोश्यारी ही नहीं केदारसिंह पफोनिया व मोहनसिंह ग्रामवासी भी अपने आप को सहज नहीं पा रहे है। यहीं नहीं जिस प्रकार से प्रदेश की राजनीति में भाजपा नेतृत्व पर सामाजिक सौहार्द के लिए विख्यात उत्तराखण्ड में जातिवादी संकीर्ण राजनीति करने का आरोपों में अब जनता को सच्च सा लग रहा है।
नई दिल्ली। भाजपा नेता व सेवानिवृत ले. जनरल तेजपाल सिंह रावत ने प्रदेश में आकंठ व्यापत भ्रष्टाचार के खिलापफ खुली हुकार से जहां भ्रष्टाचार के आगोश में जनता की नजरों में कटघरे में घिरी निशंक सरकार सहम सी गयी है वहीं प्रदेश की राजसत्ता में सत्तासीन होने के कांग्रेसी मंसूबों पर भी मानो ग्रहण सा लग गया है। भाजपा व कांग्रेस की उत्तराखण्ड विरोध्ी कुनीति व उक्रांद की घोर आत्मघाति सत्तालोलुपता के कारण प्रदेश की राजनीति में तीसरे मोर्चा के भविष्य से निराश उत्तराखण्ड की जनता को भी प्रदेश की राजनीति में जनरल रावत के नेतृत्व में उभरे इस तीसरे विकल्प को आशा के प्रखर सूर्य की रूप में देख रहे है। आगामी 14 अगस्त को देहरादून में आहुत उत्तराखण्ड के प्रथम सम्मेलन पर पूरे प्रदेश के ही नहीं दिल्ली दरवार के राजनेताओं की नजरे गड़ी हुई है।
14 अगस्त को होने वाले इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में जहां प्रदेश की संस्कृति व समाज को अपने स्वरों से नई दिशा देने वाले महान गायक नरेन्द्रसिंह नेगी सम्मलित हो रहे हैं। वहीं इसमें स्थापित कई राजनेताओं के अलावा उत्तराखण्ड राज्यगठन जनांदोलन व सामाजिक संगठनों के कई अग्रणी नेता पधर रहे है। प्रदेश की राजनीति में उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा के उदय ने कई स्थापित राजनेताओं की नींद जहां हराम कर दी है वहीं प्रदेश के राजनीति में भी भारी उथल पुथल मचा दी है। प्रदेश के मुख्यमंत्राी निशंक से लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष जनरल रावत से अपनी मुहिम पर भाजपा के हित में बिराम लगाने की गुराह लगा चुके हैं परन्तु जनरल रावत ने दो टूक शब्दों में सापफ कर दिया कि उनकी मुहिम अब किसी भी कीमत पर बंद नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यह दलगत राजनीति से उपर उठ कर प्रदेश के अस्तित्व की रक्षा का सबसे बड़ा सवाल है। जनरल के कड़े तेवरों को देख कर जहां प्रदेश की जनता में भारी उत्साह है वहीं राजनैतिक दलों में भारी हड़कंप मचा हुआ है। इसकी गूंज दिल्ली दरवार में भी सापफ सुनाई दे रही है। गौरतलब है कि गत सप्ताह उत्तराखण्ड में घटित इस राजनैतिक घटना ने भाजपा को पूरे देश के समक्ष बेनकाब कर दिया है। भले ही निशंक के मीडिया मनेजमेंट के कारण यह घटना देश की मीडिया में स्थान हासिल नहीं कर पाया परन्तु उत्तराखण्ड की राजनीति के मठाध्ीशों के चेहरे के हवाईयों उडाने में कापफी हद तक कामयाब रहा। उनकी घबराहट का नतीजा यह है कि सारे नेता भ्रष्टाचार के खिलापफ संघर्ष करने के बजाय भ्रष्टाचार के खिलापफ हंुकार भरने वाले तेजपाल सिंह रावत के खिलापफ ही शब्द बाण चला रहे हैं । जिसे जनता पहली नजर में ही ध्क्किार रही है।
कर्नाटक में भ्रष्टाचार में पफंसी भाजपा की सरकार के शर्मनाक पतन प्रकरण से अभी भाजपा नेतृत्व उबर भी नहीं पाया था कि उत्तराखण्ड में आसीन भाजपा सरकार के मुखिया निशंक सरकार के कुशासन के खिलापफ पार्टी में ही व्यापक असंतोष की खबरों ने भाजपा मठाध्ीशों की नींद उडा दी। खासकर भाजपा नेतृत्व इन विश्वसनीय खबरों से भौचंक्का है कि उत्तराखण्ड भाजपा के कई वरिष्ठ नेता भ्रष्टाचार के खिलापफ प्रदेश व्यापी खुली जंग का ऐलान करने का मन बना चुके है। प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलापफ इस ऐलान का नेतृत्व कोई और नहीं अपितु भाजपा के पूर्व सांसद रहे ले. जनरल तेजपाल सिंह रावत कर रहे है। ले. जनरल तेजपाल सिंह रावत जो प्रदेश के पूर्व मंत्राी के रूप में पूर्व सैनिक प्रधन इस राज्य के लाखों पूर्व सैनिकों व आम जनता में अपनी अच्छी खासी पकड़ बना चूक है। उनके साथ भाजपा के कई नामी नेताओं के अलावा प्रदेश के सबसे बड़े लोक गायक नरेन्द्रसिंह नेगी, कई पूर्व सैनिक उच्चाध्किारी, समाजसेवी व राज्य गठन जनांदोलन के कई प्रमुख आंदोलनकारी इस भ्रष्टाचार के खिलापफ छेड़े जाने वाले ऐतिहासिक जंग में सम्मलित होने का मन बना चूके है। इस मोर्चे की बनने की खबर ने पूरे प्रदेश की राजनीति में उथल पुथल सी मचा दी है। एक तरपफ भाजपा व कांग्रेस के कुशासन तथा उक्रांद की दिशाहीनता से त्रास्त प्रदेश की जनता बहुत ही बेसब्री से तीसरे विकल्प की इंतजारी में पलके बिछाई हुई है। वह इस तीसरे विकल्प की दिशा की तरपफ बढ़ रहे इस ‘उत्तराखण्ड बचाओं मोर्चा ’ को खुले स्वागत के लिए तैयार है। ऐसे में जब प्रदेश के लोग प्रदेश के संसाध्नों की खुली लूट खसोट व गैर उत्तराखण्डियों के बढ़ते हुए दखल को देखते हुए जनता प्रदेश की निशंक सरकार को भी पूर्ववर्ती तिवारी सरकार की तरह जल्द ही मुक्ति चाहती है। इस दिशा में वह किसी भी मजबूत संभावित राजनैतिक विकल्प का स्वागत करने के लिए तत्पर है, जिसमें जरा सी भी राजनैतिक सुझबुझ व उत्तराखण्डी हितों का भान हो।
गौरतलब है कि भाजपा के दो वरिष्ठ जननेता पूर्व मुख्यमंत्राी भुवनचंद खंडूडी व भगतसिंह कोश्यारी वर्तमान मुख्यमंत्राी रमेश पोखरियाल सरकार के भ्रष्टाचार के कृत्यों से लम्बे समय से संतुष्ट है। वे दिल्ली दरवार में कई बार अपनी वेदना प्रकट कर चूके हैं । भाजपा के दोनों वरिष्ट नेता ही नहीं प्रदेश की आम जनता यह देख कर हैरान है कि सटर्जिया सहित कई भ्रष्टाचारों में पूरी तरह से घिर चूकी उत्तराखण्ड सरकार के मुखिया रमेश पोखरियाल को तलब करने के बजाय केन्द्रीय नेतृत्व न जाने किस लोभ में उनको शर्मनाक संरक्षण देने को उतारू है। यहां स्थिति कर्नाटक से शर्मनाक होने के बाबजूद शायद भाजपा नेतृत्व कर्नाटक सी पफजीहत होने देने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि भाजपा नेतृत्व प्रदेश में समय समय पर उभर रहे असंतोष को दबाने के लिए जुटा रहता है। परन्तु उनके दवाब के बाबजूद प्रदेश भाजपा के नेतृत्व को आम जनता तो रही दूर प्रदेश का भाजपा के नेता ही स्वीकार नहीं कर पा रहे है। हालत यह है कि तमाम दवाब के बाबजूद निशंक के साथ खड़े होने में खडंूडी व कोश्यारी ही नहीं केदारसिंह पफोनिया व मोहनसिंह ग्रामवासी भी अपने आप को सहज नहीं पा रहे है। यहीं नहीं जिस प्रकार से प्रदेश की राजनीति में भाजपा नेतृत्व पर सामाजिक सौहार्द के लिए विख्यात उत्तराखण्ड में जातिवादी संकीर्ण राजनीति करने का आरोपों में अब जनता को सच्च सा लग रहा है।
नई दिल्ली। भाजपा नेता व सेवानिवृत ले. जनरल तेजपाल सिंह रावत ने प्रदेश में आकंठ व्यापत भ्रष्टाचार के खिलापफ खुली हुकार से जहां भ्रष्टाचार के आगोश में जनता की नजरों में कटघरे में घिरी निशंक सरकार सहम सी गयी है वहीं प्रदेश की राजसत्ता में सत्तासीन होने के कांग्रेसी मंसूबों पर भी मानो ग्रहण सा लग गया है। भाजपा व कांग्रेस की उत्तराखण्ड विरोध्ी कुनीति व उक्रांद की घोर आत्मघाति सत्तालोलुपता के कारण प्रदेश की राजनीति में तीसरे मोर्चा के भविष्य से निराश उत्तराखण्ड की जनता को भी प्रदेश की राजनीति में जनरल रावत के नेतृत्व में उभरे इस तीसरे विकल्प को आशा के प्रखर सूर्य की रूप में देख रहे है। आगामी 14 अगस्त को देहरादून में आहुत उत्तराखण्ड के प्रथम सम्मेलन पर पूरे प्रदेश के ही नहीं दिल्ली दरवार के राजनेताओं की नजरे गड़ी हुई है।
14 अगस्त को होने वाले इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में जहां प्रदेश की संस्कृति व समाज को अपने स्वरों से नई दिशा देने वाले महान गायक नरेन्द्रसिंह नेगी सम्मलित हो रहे हैं। वहीं इसमें स्थापित कई राजनेताओं के अलावा उत्तराखण्ड राज्यगठन जनांदोलन व सामाजिक संगठनों के कई अग्रणी नेता पधर रहे है। प्रदेश की राजनीति में उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा के उदय ने कई स्थापित राजनेताओं की नींद जहां हराम कर दी है वहीं प्रदेश के राजनीति में भी भारी उथल पुथल मचा दी है। प्रदेश के मुख्यमंत्राी निशंक से लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष जनरल रावत से अपनी मुहिम पर भाजपा के हित में बिराम लगाने की गुराह लगा चुके हैं परन्तु जनरल रावत ने दो टूक शब्दों में सापफ कर दिया कि उनकी मुहिम अब किसी भी कीमत पर बंद नहीं होगी। उन्होंने कहा कि यह दलगत राजनीति से उपर उठ कर प्रदेश के अस्तित्व की रक्षा का सबसे बड़ा सवाल है। जनरल के कड़े तेवरों को देख कर जहां प्रदेश की जनता में भारी उत्साह है वहीं राजनैतिक दलों में भारी हड़कंप मचा हुआ है। इसकी गूंज दिल्ली दरवार में भी सापफ सुनाई दे रही है। गौरतलब है कि गत सप्ताह उत्तराखण्ड में घटित इस राजनैतिक घटना ने भाजपा को पूरे देश के समक्ष बेनकाब कर दिया है। भले ही निशंक के मीडिया मनेजमेंट के कारण यह घटना देश की मीडिया में स्थान हासिल नहीं कर पाया परन्तु उत्तराखण्ड की राजनीति के मठाध्ीशों के चेहरे के हवाईयों उडाने में कापफी हद तक कामयाब रहा। उनकी घबराहट का नतीजा यह है कि सारे नेता भ्रष्टाचार के खिलापफ संघर्ष करने के बजाय भ्रष्टाचार के खिलापफ हंुकार भरने वाले तेजपाल सिंह रावत के खिलापफ ही शब्द बाण चला रहे हैं । जिसे जनता पहली नजर में ही ध्क्किार रही है।
कर्नाटक में भ्रष्टाचार में पफंसी भाजपा की सरकार के शर्मनाक पतन प्रकरण से अभी भाजपा नेतृत्व उबर भी नहीं पाया था कि उत्तराखण्ड में आसीन भाजपा सरकार के मुखिया निशंक सरकार के कुशासन के खिलापफ पार्टी में ही व्यापक असंतोष की खबरों ने भाजपा मठाध्ीशों की नींद उडा दी। खासकर भाजपा नेतृत्व इन विश्वसनीय खबरों से भौचंक्का है कि उत्तराखण्ड भाजपा के कई वरिष्ठ नेता भ्रष्टाचार के खिलापफ प्रदेश व्यापी खुली जंग का ऐलान करने का मन बना चुके है। प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलापफ इस ऐलान का नेतृत्व कोई और नहीं अपितु भाजपा के पूर्व सांसद रहे ले. जनरल तेजपाल सिंह रावत कर रहे है। ले. जनरल तेजपाल सिंह रावत जो प्रदेश के पूर्व मंत्राी के रूप में पूर्व सैनिक प्रधन इस राज्य के लाखों पूर्व सैनिकों व आम जनता में अपनी अच्छी खासी पकड़ बना चूक है। उनके साथ भाजपा के कई नामी नेताओं के अलावा प्रदेश के सबसे बड़े लोक गायक नरेन्द्रसिंह नेगी, कई पूर्व सैनिक उच्चाध्किारी, समाजसेवी व राज्य गठन जनांदोलन के कई प्रमुख आंदोलनकारी इस भ्रष्टाचार के खिलापफ छेड़े जाने वाले ऐतिहासिक जंग में सम्मलित होने का मन बना चूके है। इस मोर्चे की बनने की खबर ने पूरे प्रदेश की राजनीति में उथल पुथल सी मचा दी है। एक तरपफ भाजपा व कांग्रेस के कुशासन तथा उक्रांद की दिशाहीनता से त्रास्त प्रदेश की जनता बहुत ही बेसब्री से तीसरे विकल्प की इंतजारी में पलके बिछाई हुई है। वह इस तीसरे विकल्प की दिशा की तरपफ बढ़ रहे इस ‘उत्तराखण्ड बचाओं मोर्चा ’ को खुले स्वागत के लिए तैयार है। ऐसे में जब प्रदेश के लोग प्रदेश के संसाध्नों की खुली लूट खसोट व गैर उत्तराखण्डियों के बढ़ते हुए दखल को देखते हुए जनता प्रदेश की निशंक सरकार को भी पूर्ववर्ती तिवारी सरकार की तरह जल्द ही मुक्ति चाहती है। इस दिशा में वह किसी भी मजबूत संभावित राजनैतिक विकल्प का स्वागत करने के लिए तत्पर है, जिसमें जरा सी भी राजनैतिक सुझबुझ व उत्तराखण्डी हितों का भान हो।
गौरतलब है कि भाजपा के दो वरिष्ठ जननेता पूर्व मुख्यमंत्राी भुवनचंद खंडूडी व भगतसिंह कोश्यारी वर्तमान मुख्यमंत्राी रमेश पोखरियाल सरकार के भ्रष्टाचार के कृत्यों से लम्बे समय से संतुष्ट है। वे दिल्ली दरवार में कई बार अपनी वेदना प्रकट कर चूके हैं । भाजपा के दोनों वरिष्ट नेता ही नहीं प्रदेश की आम जनता यह देख कर हैरान है कि सटर्जिया सहित कई भ्रष्टाचारों में पूरी तरह से घिर चूकी उत्तराखण्ड सरकार के मुखिया रमेश पोखरियाल को तलब करने के बजाय केन्द्रीय नेतृत्व न जाने किस लोभ में उनको शर्मनाक संरक्षण देने को उतारू है। यहां स्थिति कर्नाटक से शर्मनाक होने के बाबजूद शायद भाजपा नेतृत्व कर्नाटक सी पफजीहत होने देने का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि भाजपा नेतृत्व प्रदेश में समय समय पर उभर रहे असंतोष को दबाने के लिए जुटा रहता है। परन्तु उनके दवाब के बाबजूद प्रदेश भाजपा के नेतृत्व को आम जनता तो रही दूर प्रदेश का भाजपा के नेता ही स्वीकार नहीं कर पा रहे है। हालत यह है कि तमाम दवाब के बाबजूद निशंक के साथ खड़े होने में खडंूडी व कोश्यारी ही नहीं केदारसिंह पफोनिया व मोहनसिंह ग्रामवासी भी अपने आप को सहज नहीं पा रहे है। यहीं नहीं जिस प्रकार से प्रदेश की राजनीति में भाजपा नेतृत्व पर सामाजिक सौहार्द के लिए विख्यात उत्तराखण्ड में जातिवादी संकीर्ण राजनीति करने का आरोपों में अब जनता को सच्च सा लग रहा है।

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