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Tuesday, August 2, 2011

-कर्नाटक के शर्मनाक पतन के लिए येदियुरप्पा से अधिक दोषी है भाजपा नेतृत्व



-कर्नाटक के शर्मनाक पतन के लिए येदियुरप्पा से अधिक दोषी है भाजपा नेतृत्व/
- निशंक को कब तक शर्मनाक सरंक्षण देती रहेगी भाजपा /


भ्रष्टाचार के प्रतीक बन चूके अवैध खनन के मामले में कर्नाटक के ल¨काय्ाुक्त संत¨ष हेगड़े की ऐतिहासिक रिपोर्ट ने जहां भाजपा को भी कांग्रेस की तरह देश की जनता के समक्ष पूरी तरह से बेनकाब कर दिया, वहीं भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व का बौनापन जगजाहिर हो गया। लगता है भाजपा नेतृत्व ने कर्नाटक में हुई शर्मनाक पतन के बाद भी सबक नहीं लिया। इस प्रकरण के बाबजूद विधानसभा चुनाव के मुहाने में खडे भाजपा शाशित उत्तराखण्ड सरकार के मुख्यमंत्री निशंक को भी शर्मनाक संरक्षण जारी रखा हुआ है। क्यों भाजपा नेतृत्व ंभ्रष्ट ाचार के मामले में आकंण्ठ फंसी भाजपा सरकार के मुखिया निशंक, जो उत्तराखण्ड की जनता व भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के नजरों से पूरी तरह से उतर चूके हैं उनको शर्मनाक संरक्षण जारी रख कर भाजपा की जड़ों व उत्तरा खण्ड की जनता के विश्वास पर मठ्ठा डालने का आत्मघाति कृत्य कर रहा है ? उत्तराखण्ड में भाजपा के निशंक सरकार के कार्यकाल मे ं हुए भ्रष्टाचारों की गूंज हाईकोर्ट व सर्वोच्च न्यायालय में सुनाई दे रही है। देश की मीडिया भले ही भाजपा नेतृत्व की तरह अपने निहित स्वार्थों में अंधे हो कर मूक बने हुए हैं परन्तु उत्तराखण्ड की स्वाभिमानी जनता किसी तानाशाही को एक पल के लिए स्वीकार नहीं करती।
बी एस येदियुरप्पा के मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा काफी जिद्दोजहद के बाद लेने में सफलता हासिल करने के बाद भले ही भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व चैन की सांस ले रहा हो परन्तु इस प्रकरण से देश के जनमानस के सामने भाजपा को कांग्रेस की तरह ही कटघरे में खड़ा कर दिया है। देश का आम जनमानस इसके लिए येदियुरप्पा से अधिक गुनाहगार भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व को जिम्मेदार मान रहा है जो अपने निहित स्वार्थ के लिए जननेताओं के बजाय अपने प्यादों को आगे बढाते हें तथा इसके लिए वे एक तरफ अपनी ही जननेताओं को अस्थिर करते हैं वहीं रेड़डी बंधुओं जैसे नेताओं को संरक्षण दे कर राजनीति को भ्रष्ट करने का कृत्य करते है। गौरतलब है कि कर्नाटक में अवैद्य खनन के लिए भाजपा को शिकंजें में जकड़े हुए रेड़डी बंधुओं को संरक्षण केन्द्रीय नेतृत्व ने ही दिया हुआ है। इसी कारण येदियुरप्पा को असुरक्षा का भान हुआ तो वह भी रेड्डी बंधुओं को संरक्षण देने लगा।
भाजपा के केंद्रीय्ा नेतृत्व के लाख कोशिशों के बाबजूद येदियुरप्पा ने तीन दिन इस्तीफा नही ं दिया। उसके बाद दिया भी तो अपनी मर्जी व अपनी शासन से। इसका एक ही कारण है कि येदियुरप्पा की नजरों के केन्द्रीय नेतृत्व पहले ही बेनकाब हो चूका है। क्योंंिक नेतृत्व जब नैतिक रूप से कमजोर होता है तभी कोई मुख्यमंत्री ऐसा कृत्य करता है। भाजपा नेतृत्व की जातिवादी संर्किणता से आहत येदियुरप्पा ने तीन दिन बाद कर्नाटक के मुख्य्ामंत्री पद से राज्य्ापाल हंसराज भारद्वाज क¨ अपना इस्तीफा स©ंपा । जिसे राज्यपाल ने तत्काल स्वीकार कर लिया।
गौरतलब है कि य्ोदिय्ाुरप्पा ने अपना इस्तीफा अवैध खनन घ¨टाले में ल¨काय्ाुक्त की अ¨र से आर¨पित किए जाने के बाद दिय्ाा है। भारी नाटक के बीच य्ोदिय्ाुरप्पा अपने वफादार मंत्रिय्ा¨ं अ©र 60 से अधिक विधाय्ाक¨ं के साथ राजभवन पहुंचे अ©र राज्य्ापाल क¨ अपना इस्तीफा स©ंपा। य्ोदिय्ाुरप्पा 38 महीने तक राज्य्ा के मुख्य्ामंत्री रहे। इस राजभवन से बाहर निकलने के बाद य्ोदिय्ाुरप्पा ने घ¨षणा की कि उन्ह¨ंने केंद्रीय्ा नेतृत्व के निर्देश क¨ मानते हुए ‘बिना किसी हिचकिचाहट‘ के मुख्य्ामंत्री के पद से इस्तीफा देने की बात कही, परन्तु केन्द्रीय नेतृत्व के फरमान को जिस ढ़ग से उन्होने आयना दिखाया उससे केन्द्रीय नेतृत्व की जो जग हंसाई हुई वह जग जाहिर है।
भले ही बाहरी मन से य्ोदिय्ाुरप्पा ने कहा कि वह पार्टी के वरिष्ठ¨ं के निर्देश क¨ मानते हुए ‘बिना किसी हिचकिचाहट‘ के मुख्य्ामंत्री पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया। यही नहीं उन्होंने अपने आपको पार्टी का अनुश ासित सिपाई बताया। परन्तु देश ने देखा कि केसे एक सिपाई ने भाजपा के आला कमान के पसीने निकाल दिये। कैसे भाजपा के पूर्व अध्यक्ष बैंकटया का लेपटाप पटका व अपने एक मंत्री को थप्पड़ प्रसाद में दिया। अब भाजपा प्रदेश में किसी को भी मुख्यमंत्री बनाये पर इस प्रकरण से भाजपा पूरी तरह से जनता में कांग्रेस की तरह ही बंदरंग हो गयी है। इसके साथ ही येदियुरप्पा ने राज्य्ा का द©रा शुरू करने का ऐलान करते हुए कहा कि वे अब गांव गांव जाकर पार्टी क¨ मजबूत बनाने का काम करेंगे। कर्नाटक के मुख्य्ामंत्री के रूप में 38 महीने के कायर््ाकाल के द©रान अपनी उपलब्धिय्ा¨ं का जिक्र करते हुए उन्ह¨ंने कहा कि राजक¨षीय्ा प्रबंधन के कारण राज्य्ा पहले नबंर पर पहुंच गय्ाा है, जबकि साम्प्रदाय्ािक स©हार्द अ©र कानून एवं व्य्ावस्था की स्थिति बेहतर हुई है। उन्ह¨ंने कहा, ‘‘ल¨ग¨ं की इच्छा य्ाह है कि भाजपा अगले 15 से 20 वषर्¨ं तक सत्ता में बनी रहे।‘‘ य्ोदिय्ाुरप्पा ने कहा कि वह विधानसभा चुनाव में 150 सीटें अ©र ल¨कसभा चुनाव में 25 सीटें जीतने के लक्ष्य्ा क¨ हासिल करने की दिशा में काम करेंगे। अब देखना यह है कि कर्नाटक में ऊंट किस तरफ करवट लेता है।
इस्तीफा जाते वक्त 60 से अधिक विधायकों के साथ पद यात्रा करते हुए राजभवन में जाने को एक प्रकार से उनका शक्ति प्रदर्शन ही समझा जा रहा है। सवाल यह है कि कांग्रेस ने जो आत्मघाति भूल आंध्र में जगन को ठुकरा कर की क्या वैसी ही भूल भाजपा भी कर्नाटक में करके अपनी जडों में मटठा डालेगी। शेष श्रीकृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्रीकृष्णाय् नमो।

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