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Tuesday, August 9, 2011

सरकारी आतंक से लोकशाही को रौंद रही है मनमोहनी सरकार

सरकारी आतंक से लोकशाही को रौंद रही है मनमोहनी सरकार/
राष्ट्रीय धरना स्थल जंतर मंतर पर लोकशाही पर लगा मनमोहनी अंकुश
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संसद की चैखट, राष्ट्रीय धरना स्थल जंतर मंतर दिल्ली में अब कोई 12घण्टे भी आंदोलन नहीं कर सकता। पुलिस उसे खदेड़ देती है। यह लोकशाही की निर्मम हत्या है। तानाशाही है जिसको लगाने वाले व सहने वाले देश की लोकशाही के दुश्मन है। देश के कोने कोने से लोग यहां पर न्याय की आश लेकर आंदोलन करने आते हैं यहां पर उन फरियादियों की समस्या का निराकरण करना तो रहा दूर देश के हुक्मरान उस फरियादियों को अपनी बात कहने या 12 घण्टे तक का भी आंदोलन करने की इजाजत तक नहीं दे रही है। इन दिनों 18 जुलाई से यहां पर पृथक राज्य कूच बिहार की मांग को लेकर 81 ंआंदोलनकारी आमरण अनशन पर बैठे हैं परन्तु क्या मजाल है कि सरकार उनकी मांग जरा भी सुने। सुनना तो रहा दूर सरकार सैकड़ों किमी दूरस्थ क्षेत्रा ें से आने वाले आंदोलनकारियों को सांय 5 बजे बाद वहां से खदेड़ देती है। यह एक प्रकार की तानाशाही ही नहीं सरकारी आतंकवाद है, जिस मनमोहनी सरकार अपनी पुलिस प्रशासन की लाठी व गोली के बल पर लोकशाही के समर्थकों को कुचल रही है। इसी सरकारी आतंकबाद के दम पर जनविरोधी मनमोहन सरकार ने विदेशों में छुपाये काले धन को वापस भारत लाने की हजारों देशभक्तों के साथ शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे विश्व विख्यात योग गुरू स्वामीराम देव को मध्य रात्रि में पुलिसिया दमन से खदेड़ कर उनके आंदोलन को रौंद दिया । वहीं शांतिपूर्ण तरीके से देश में व्याप्त भ्रष्टाचार को व्यवस्था के सभी महत्वपूर्ण संस्थानों से दूर करने के लिए जनलोकपाल विधेयक बनाने की मांग कर रहे गांधीवादी नेता वयोवृद्व अण्णा हजारे के 16 अगस्त 2011 से जंतर मंतर पर आहुत आमरण अनशन के ऐलान पर उनकी मांग पर गंभीरता से ध्यान देने के बजाय सरकार उनको ही आंदोलन की इजाजत ही न देकर प्रताडित करने का निकृष्ठत्तम कार्य कर रही है। लगता है इस देश में सरकार जनतंत्र को सरकारी आतंक के दम पर गला घोंटने का कृत्य कर रही है। लगता है कांग्रेस अतीत में इंदिरा गांधी द्वारा लगाये गयी तानाशाही के बाद जनता के आक्रोश के परिणाम से सबक लेने के लिए तैयार नहीं है। इंदिरा गांधी ने तो जनहितों का सैदव ध्यान रखा वहीं मनमोहन को सपने में भी अमेरिका के अलावा किसी के हितों की भान तक नही ंरहती होगा। अगर उनमें जरा भी लेशमात्र भी देश भक्ति होगी तो वे देश के अपने हाल में छोड़ कर तत्काल राजनीति से स्तीफा देने का काम करना चाहिए। आने वाले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस का पूरी तरह से सफाया होना निश्चित है। ऐसा लोकशाही का गला घोंटने वाला कृत्य पर मूक रहने वाला विपक्ष, मीडिया व जागरूक समाजसेवी को शतः शतः नमन्।।

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