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Monday, September 12, 2011

-खंडूडी के तारनहार फिर बने जनरल रावत की हुंकार से भौचंक्का भाजपा नेतृत्व

-खंडूडी के तारनहार फिर बने जनरल रावत की हुंकार से भौचंक्का भाजपा नेतृत्व
-खंडूडी कराये निशंक के घोटालों की शीघ्र सीबीआई से जाॅंच कराये
-खंडूडी के मुख्यमंत्री बनने के बाबजूद रक्षा मोर्चा का तेज अभियान से भाजपा नेतृत्व हैरान
-भाजपा व कांग्रेस ने उत्तराखण्ड को बनाया घोटालों का प्रदेश व सचिवालय को दलालो का अड्डा
-टिहरी जिला पंचायत अध्यक्ष गुनसोला ने दिया भाजपा से इस्तीफा
-गायक नरेन्द्रसिंह नेगी ने बताया खण्डूडी को तपीयों घाम


नई टिहरी (प्याउ)। जिस जनरल तेजपाल सिंह रावत के नेतृत्व में गठित उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा की हुंकार से अपने अस्तित्व को बचाने के खातिर भाजपा आला नेतृत्व ने प्रदेश से चुनाव के ठीक पहले हडबड़ी में अपने आंखों के तारे रमेश पोखरियाल को मुख्यमंत्री की कुर्सी से हटा कर पूर्व मेजर जनरल खंडूडी को आसीन करने का दाव चला था, वह दाव भी जनरल तेजपाल रावत की हुंकारं के आगे कुंद होते देख भाजपा व संघ के मठाधीश हस्तप्रद है। क्योंकि संघ व भाजपा नेतृत्व का यह भरोसा दिलाया गया था कि ये सब खंडूडी जी को प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाते ही अपने आप भाजपा में जुड जायेंगे। सुत्रों के अनुसार इसी झांसे में आ कर शायद आला नेतृत्व ने प्रदेश की कमान खंडूडी के कंधों में सोंपी। जिसकी कलई उनके शपथ ग्रहण के तीसरे दिन ही उस समय खुल गयी जब ले. जनरल तेजपाल सिंह रावत के नेतृत्व में उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा के आवाहन पर भाजपा के वरिष्ठ नेता नव जिला पंचायत अध्यक्ष टिहरी रतनसिंह गुनसोला ने भाजपा से इस्तीफा देने का ऐलान करते हुए कडे प्रहार किये । इस अवसर पर टिहरी जिले के जिला पंचायत अध्यक्ष रतन सिंह गुनसोला ने कहा कि जलविद्युत परियोजना के आवंटन में भारी भ्रष्टाचार हुआ है और राज्य के लोगों की अनदेखी की गई है और उनके द्वारा जब आवाज उठाई गई तो उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की गई है। इसी सम्मेलन में रक्षा मोर्चा के आला नेतृत्व के साथ भ्रष्टाचार के खिलाफ खुली मुहिम छेड़ने वाले प्रदेश के अग्रणी लोकप्रिय गायक गायक नरेन्द्रंिसंह नेगी ने खंडूडी की पदलोलुपता पर गहरा कटाक्ष करते हुए कहा कि तपीयू घाम क्या तापण,। ंउन्होंने खंडूडी ंको अपने दल व कुर्सी के लिए समर्पित नेता बताते हुए उनसे उत्तराखण्ड के हितों के लिए एक संघर्ष या खडे होने की आश करना भी निरर्थक माना। खंडूडी के शपथ ग्रहण के बाद जिस प्रकार से प्रदेश में मीडिया ने उनको महिमा मण्डित किया उसके बाबजूद टिहरी सम्मेलन में बड़ी संख्या उमडे लोगों को देख कर भाजपा ही नहीं कांग्रेस भी भोचंक्की है। गत दिनों दिल्ली में हिमालय दिवस के अवसर पर आयोजित सम्मेलन के बाद अपने मंत्रालय लोटते हुए कार में स्वयं कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत ने टिहरी के विधायक किशोर उपाध्याय की उपस्थिति में प्यारा उत्तराखण्ड से इस बात का खुलाशा किया कि जिस प्रकार जनरल रावत की मोर्चे के साथ हजारों की संख्या में लोग जुड रहे हैं, खासकर श्रीनगर रेली में उमड़ी अप्रत्याशित भीड़ से भाजपा ही नहंी कांग्रेस भी घबरा गयी है। वे प्यारा उत्तराखण्ड के सम्पादक देवसिंह रावत की इस टिप्पणी का समर्थन कर रहे थे कि टी पी एस ही दोनों बार खंडूडी के तारनहार बन कर उभरे। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहली बार जब खंडूडी के लिए कोई विधानसभा सीट छोडने के लिए उनके अपने करीबी विधायक भी तैयार नहीं थे उस समय टीपीएस ने अपनी सीट छोड़ कर न केवल खंडूडी का ताज बचाया अपितु अपनी राजनैतिक जीवन को भी कांग्रेस से इस्तीफा दे कर दाव पर लगा दिया। दूसरी बार अब जब जातिवाद व क्षेत्रवाद के मोह में डूब कर खंडूडी ने जिस अपने विरोधी निशंक को जनरल रावत के तमाम विरोध को नजरांदाज करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन किया , मुख्यमंत्री बन कर निशंक ने जिस प्रकार से जनरल खंडूडी का राजनैतिक कोर्ट मार्शल किया उससे खंडूडी को राजनैतिक में हासिये से बदतर स्थिति में पंहुचा दिया था। ऐसे समय में जब जनरल तेजपाल सिंह रावत ने निशंक के कुशासन के खिलाफ जब भाजपा आला नेताओं का शर्मनाक संरक्षण देख कर खुला विद्रोह किया और इसमें उत्तराखण्ड की प्रबुद्व जनता ने चढ़ बढ़ कर हिस्सा लिया तो भाजपा के आला नेताओं को खंडूडी ने अपने सम्पर्को से यह समझाने में सफलता हासिल की कि ये सब खंडूडी जी की उपेक्षा से आहत है। अगर प्रदेश में भाजपा को बचाना है तो निशंक को हर हाल में हटा कर प्रदेश की कमान खंडूडी जी के हाथों में सोंप दी जाय।
प्रदेश की कमान निशंक के हाथों से छिन कर मेजर जनरल खंडूडी के हाथों में सौंपने के लिए विवश हुई भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व उस समय भौचंक्का रह गया जब खंडूडी की तापपोशी होने के बाबजूद भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भाजपा को कटघरे में रखते हुए भाजपा से त्यागपत्र दे कर पूर्व सैनिक बाहुल्य उत्तराखण्ड में पूर्व सैनिकों व समर्पित समाजसेवियों व चिंतकों को एकजूट करके पूर्व सांसद ले. जनरल ने उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा का गठन कर प्रदेश में भाजपा की चूलें हिला दी। इसमें उत्तरा खण्ड के दिग्गज गायक नरेन्द्रसिंह नेगी, अग्रणी चिंतक व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सुरेन्द्रसिंह पांगती सहित तमाम समाजेवी व व बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिकारी जुडने लगे। इसे देख कर ही भाजपा के आला नेतृत्व ने प्रदेश में भाजपा का अस्तित्व बचाने के खातिर प्रदेश में मुख्यमंत्री की कमान निशंक के हाथों से छीन कर पूर्व सैनाधिकारी खंडूडी के हाथों में सौंपा था कि इससे पूर्व सैनिको का गुस्सा शांत होगा व जनरल टीपीएस की मुहिम कुंद होगी।
नई टिहरी से प्यारा उत्तराखण्ड से इस सम्मेलन के बारे में जानकारी देते हुए मोर्चा के वरिष्ट नेता राजेन्द्र भण्डारी व रघुवीर सिंह बिष्ट ने बताया कि उत्तराखंड रक्षा मोर्चा के अध्यक्ष टीपीएस रावत ने नई टिहरी में खचाखच भरे बोरारी स्टेडियम में आयोजित सम्मेलन में हुंकार भरते हुए कहा कि अगर खंडूडी जरा सा भी ईमानदार है तो वे तत्काल निशंक के कार्यकाल में हुए घोटालों की सीबीआई से जांच कराने से पीछे अब क्यों हट रहे है। उन्होंने कहा कि निशंक के राज में बंद कमरों में सीबीआई की जांच की मांग करने वाले खंडूडी का अब प्रदेश प्रेम कहां चला गया। जनरल तेजपाल सिंह रावत ने दो टूक शब्दों में कहा कि मोर्चा अब प्रदेश में न केवल तीसरे विकल्प के रूप में लोगों के सामने होगा अपितु प्रदेश को भ्रष्टाचार से रौंदने वाले भाजपा व कांग्रेस को प्रदेश की सत्ता से उखाड़ फेंक कर उत्तराखण्ड की रक्षा करके ही दम लेगा । उन्होंने प्रदेश की वर्तमान भाजपा सरकार के मुखिया भुवन चंद्र खंडूड़ी के सामने अपनी तीन मांगें भी रखीं जिसमें राज्य में भाजपा सरकार के दौरान कराये गये विभिन्न घोटालों की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों से उनकी आय के बारे में मांगा गया ब्योरा तब तक बेमानी है, जब तक कोई समय सीमा न बांधी गई हो। नई टिहरी में आयोजित रक्षा मोच्रे के सम्मेलन में मोर्चा के अध्यक्ष टीपीएस रावत ने मोर्चा को राजनीतिक दल घोषित करते हुए कहा कि भाजपा और कांग्रेस राज्य को खोखला करने में लगे हुए हैं। राज्य में स्थित सचिवालय दलालों की श्रेणी में शामिल हो गया है जहां बिना लिये दिये कोई काम नहीं होता है। उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियां फैक्टरियों की तरह हो गई हैं जिसमें पहले नोट और फिर वोट पैदा किया जाता है। उत्तराखंड के गांव के गांव इन्ही की गलत नीतियों से खाली हो गये है। खेत बंजर हो रहे हैं, बड़े-बड़े ठेकेदारों की पौ बारह हो रखी हैं और राज्य के लोग रोजगार के लिए भटक रहे हैं। चारों तरफ लूट खसोट का सम्राज्य बना हुआ है। टीपीएस रावत ने मुख्यमंत्री श्री खंडूड़ी के सामने अपनी मांगों का मसौदा पेश करते हुए कहा कि यदि दम है तो भाजपा सरकार के तमाम घोटालों की जांच सीबीआई से करवाई दाए। उन्होंने कहा कि अधिकारियों से ब्योरा मांगने की बात की जाए तो इसमें नेताओं, संगठन के लोगों और दर्जाधारियों की भी गुप्त जांच की जानी चाहिए और समय सीमा निश्चित किया जाना चाहिए। सम्मेलन का संचालन पूर्व सैनिको व अन्य आंदोलनकारी संगठनों की धुरी बने रहे पीसी थपलियाल ने किया। इस सम्मेलन में पूर्व कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह पांगती,पूर्व आईएएस बीसी चंदोला, राजेन्द्र भंडारी, केन्द्रीय विवि की डा. सुरेखा डंगवाल, महिपाल नेगी, डा. एसबी सती, डा. प्रदीप सकलानी, गोविन्द सिंह बिष्ट, रघुवीर सिंह बिष्ट सहित अनैक प्रतिष्ठित लोगों ने सम्मेलन को सम्बोधित किया। जिस प्रकार से इस सम्मेलन को मीडिया खासकर इलेक्ट्रोनिकस मीडिया ने नजरांदाज किया उससे साफ लग गया कि भले में प्रदेश में निजाम बदला हो परन्तु प्रदेश की नीतियां नही ं बदली। खंडूडी के शासन में भी मीडिया मनेजमेंट को देख कर कई दबे स्वर में बोलते दिखे कि निशंक तो इस मामले में खंडूडी के आगे बच्चा ही साबित होगे।

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