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Monday, September 12, 2011

आतंकियों की सरजमी में तांडव मचा कर की अमेरिका की रक्षा/ नपुंसक हुक्मरानों ने भारत को ही बनाया आतंक की तांडव स्थली

आतंकियों की सरजमी में तांडव मचा कर की अमेरिका की रक्षा/ नपुंसक हुक्मरानों ने भारत को ही बनाया आतंक की तांडव स्थली


-अमेरिका ने आतंकियों की सरजमी में ही तांडव मचा कर की अमेरिका की रक्षा/
-भारतीय हुक्मरानों ंने नपुंसक बन भारत को ही बनाया आतंक की तांडव स्थली/
-आखिर कब तक आतंकी हमलों योंही मारे जायेंगे भारतीय/
-आतंकी सरगनों से जब गले लगेंगें हुकमरान तो कैसे रूकेंगें आतंकी हमले/


अमेरिका में 10 साल पहले हुए 11 सितम्बर 2001 की दसवीं बरसी से मात्र पांच दिन पहले यानी 6 सितम्बर 2011 को आतंकियों ने भारत की राजधानी दिल्ली के उच्च सुरक्षा जोन में स्थित उच्च न्यायालय पर बम का धमाका किया उसने पूरे देश को एक बार फिर झकझोर कर रख दिया कि आखिर अमेरिका में 10 साल हुए आतंकी हमले के बाद तमाम हवाई दावों के बाबजूद आतंकी अमेरिका में फिर से असरदार हमला करने में नाकामयाब रहे। वहीं भारत में कश्मीर के हर क्षेत्र से लेकर भारत की सर्वोच्च संसद पर आतंकी हमले पर हमले करते रहे। परन्तु अमेरिका के स्वयंभू कहार बने भारतीय हुक्मरानों (चाहे शासन राजग के बेनर तले अटल का रहा हो या सप्रंग के तले मनमोहन का रहा हो ) को यह भी देख कर श र्म नहीं आ रही थी कि कैसे अमेरिका ने आतंकवाद का सरकुचल कर उनकी दूबारा अमेरिका की सरजमी पर ऐसा हमला करने की हिम्माकत तक नही ं कर पाये। वहीं भारत पर एक के बाद एक करके दर्जनों हमले, दिल्ली, मुम्बई, कश्मीर स्थित महत्वपूर्ण स्थानों पर ही नही ं अपितु भारतीय लोकशाही के सर्वोच्च संस्थान ‘संसद ’व लालकिले पर हमले करके हमारे देश व यहा ं हुक्मरानों को एक प्रकार से न केवल खुली चुनौती दी ,इसका अमेरिका जैसे मुंहतोड़ देने के बजाय वे पाक से गलबहिया करके पीड़ितों के जख्मों को कुरेदने में गले हुए हैं। जहां 11 सितम्बर की दसवीं बरसी पर भी अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति ओबामा के साथ अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जार्ज बुश सहित पूरे अमेरिका ने ही नहीं विश्व ने इस बरसी पर एकजूटता दिखाई । वहीं हम आज तक भी देश के हुक्मरानों के हाथ संसद हमले के दोषियों को फांसी की सजा तक देने से कांप रहे हैं। चही नहीं हमारे हुक्मरान देश पर हो रहे आतंकी हमलों को रोकने तक में नाकामयाब रहे।
6 सितम्बर 2011 को फिर आतंकियों ने देश की राजधानी दिल्ली स्थित उच्च न्यायालय के गेट नम्बर 5 पर बम विस्फोट कर एक दर्जन से अधिक लोगों को मौत के घाट उतार दिया और इस विस्फोट में आठ दर्जन से अधिक लोग घायल हो गये। इस घटना के बाद वही हर आतंकी घटना के बाद सरकारी व विपक्ष की तरफ से रट्टे रटाये बयान। फिर ढ़ाक के वहीं तीन पात। सबसे हैरानी की बात यह है कि जब देश के हुक्मरान संसद पर हमले के दोषी आतंकी, पूर्व प्रधानमंत्री के हत्या के दोषी हत्यारों, आतंकवाद के खिलाफ खुली जंग लडने वाले बिट्टा पर बम हमले के दोषी व अन्य आतंकी हमलों के दोषियों को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कई वर्षों पहले सजाये मौत पर अपनी सहमति देने के बाबजूद देश के हुक्मरान अपने निहित दलीय स्वार्थ के खातिर इन देश के गुनाहगारों को जीवनदान दे कर देश की एकता अखण्डता व सुरक्षा से भयंकर खिलवाड़ करने की शर्मनाक धृष्ठता कर रहे हैं।
आज देश का दुर्भाग्य है कि देश में इंदिरा गांधी जेसी फौलादी कदम उठाने वाली व आंतंकियों के आका बने अमेरिका व पाक को मुंहतोड़ जवाब देने वाला नेतृत्व का नितांत अभाव है। देश का दुर्भाग्य यह है कि देश में अटल व मनमोहन सिंह जैसे अमेरिका परस्त शासकों को ढोना पड रहा है। यहां पर सरकारें चाहे अटल बिहारी वाजपेयी नेतृत्व वाली राजग की सरकार रही या मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सप्रंग सरकार सत्तासीन रही दोनों सरकारें भारत को आतंकी हमलों से रौंदने वाले आतंकवाद के रहनुमा अमेरिका व पाक को मुंहतोड़ जवाद देने के बजाय नपुंसकों की तरह अमेरिका व पाक से गलबहियां करने की शर्मनाक प्रतियोगिता कर रही है। अमेरिका व पाक के भारत को आतंकी षडयंत्र का जीता जागता उदाहरण सीआईए व आईएसआई का डब्बल ऐजेन्ट हेडली व राणा से उजागर हो गया। यही नहीं किस प्रकार अमेरिका कश्मीर में आतंकी हमले व आतंक फेलाता है यह अमेरिका में अभी तक संरक्षण प्राप्त ऐजेन्ट को अब गिरफतार करने से भी उजागर हो गयी।
जब तक भारत सरकार व यहां के राजनैतिक दल दलगत संकीर्ण स्वार्थों से उपर उठ कर अमेरिका, चीन व इस्राइल की तर्ज पर एक मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा व स्वाभिमान की नीति नहीं बनायेंगे तथा उस पर मजबूती से अमल नहीं करेंगे तो तब तक भारत में आये दिन इसी प्रकार के आतंकी हमलों की आशंका बनी रहेगी। देश की आम जनता को इसी प्रकार के आतंकी हमलों का शिकार बनना पडेगा। अगर भारत सरकार को जरा सी भी शर्म होती तो वह अविलम्ब संसद हमले से लेकर अब तक आतंकी हमलों के सर्वा ेच्च न्यायालय से भी मौत की सजा पाये आतंकियों को फांसी के फंदे पर चढ़ाने का काम करते हुए अमेरिका व पाक से दो टूक बात करे। पाक से तब तक सभी प्रकार के सम्बंध तोड़ लिये जाय जब तक वह मुम्बई हमलों के दोषियों को भारत के हवाले तथा पाकिस्तान में तमाम आतंकी प्रशिक्षण शिविरों को बंद नहीं करता। अमेरिका से भी दो टूक शब्दों से भारत को तबाह करने के अपने नापाक हथकण्डों पर विराम लगाने की दो टूक बात की जाय। परन्तु करेगा कौन यहां तो सभी राजनैतिक दलों में वाम दलों को छोड कर सभी दलों में अमेरिका का हितैषी साबित करने की अंधी प्रतियोगिता चल रही है। देश की सुरक्षा व एकता अखण्डता की रक्षा के लिए सरकार को देश में समान नागरिक संहिता लागू करना चाहिए न की केवल बहुसंख्यक व अल्पसंख्यक समाज के नाम पर पक्षपाती व आतंकवाद पोषक कानून नहीं बनाना चाहिए। देश मे ं पक्षपात शासन ही आतंकवाद का सबसे बड़ा पोषक है। एक तरफ अमेरिका ने अपने देश पर हमले करने के गुनाहगारों के साथ उनके आका ओसमा बिन लादेन को मार गिराने में सफलता हासिल की। आतंकियों को उनके घरों व देशों में घुस कर अमेरिका ने तबाह करके आतंकियों को इतना रौद दिया कि वे अमेरिका पर हमला करने की हिम्मत दिखानी तो रहीं दूर आतंकी अपनी जान बचाने के खातिर इधर उधर दुबके फिरे रहे है। अमेरिका अपने गुनाहगारों को एक एक कर उनके घरों में मारने का काम कर रहा है। ओसमा बिन लादेन को उसी पाकिस्तान में घुस कर अमेरिकी जाबांजों ने की। वहीं भारत के हुक्मरानों ने पाक स्थित भारत को तबाह करने वाले आतंकी प्रशिक्षण अड्डों को तबाह करने की कोशिश करना तो रहा दूर वे सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भारत के स्वाभिमान व लोकशाही के सर्वोच्च संस्थान संसद पर आतंकी हमले के दोषी सहित अन्य फांसी की सजा की पुष्टि की गये आतंकियों को फांसी देने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहे हैं। यह तो एक सामान्य सा मामला है। जो असली मामला है कि अमेरिका की तरह भारतीय हुक्मरान न तो भारत को तबाह करने वाले आतंकियों को प्रशिक्षण व संरक्षण देने वाले पाकिस्तान व अमेरिका से अपने नापाक इरादों पर अंकुश लगाने की दो टूक बात करने का पहला व महत्वपूर्ण कदम अभी तक उठाने का साहस तक नहीं जुटा पा रहे है। जब भारत में फेलाये जा रहे आतंक की जड़ में जा कर उसमें मट्ठा डालने का काम ही हुक्मरान नहीं करेंगे तो भारत में निरंतर फेल रहे आतंकवाद पर अंकुश कैसे लग ाया जायेगा। अमेरिकी हुक्मरानों ने अपनी कुशल व सटीक देशहितों की रक्षा करने वाली रणनीति के तहत ही आतंकियों द्वारा अमेरिका को आतंक की सरजमी बनाने के मंसूबों को न केवल पूरी तरह से विफल किया अपितु अमेरिकी हुक्मरानों ने आतंकियों की सरजमी को ही आतंक की तांडव स्थली बना कर तबाह कर दिया है। आज अफगानिस्तान व पाकिस्तान आज ंअमेरिका के इसी दंश से तबाही के कगार पर पंहुच चूके है। वहीं भारतीय हुकमरानों ने आतंकियों को उसकी सरजमी पर तबाह करने के बजाय अपनी नालायकी व आत्मघाति रणनीति से भारत को ही आतंकियों की तांडव स्थली बना कर रख दिया है। आतंकियों व उनके आकाओं का समूल नाश करने के बजाय भारतीय हुक्मरान देशवासियों को एकजूट हो कर आतंक को रौंदने की मुहिम में सम्मलित करने के बजाय धार्मिक विद्वेष को हवा दे कर आपस में ही लडाने का काम कर रही है। देश के हुक्मरान व जनता को एक बात साफ समझ लेनी चाहिए कि भारत कोई 1947 के बाद का निर्मित देश नहीं अपितु यह हजारों साल पुराना संसार का सनातन देश है। इस देश की समृद्व संस्कृति ने कई शासकों को देखा। कई आततायियों का दंश झेला। इसलिए भारत से आतंक का समुल नाश के लिए धार्मिक संकीर्णता व तुष्टिकरण से उपर उठ कर भारत में फेलाये जा रहे अमेरिका, पाव व चीन द्वारा फेलाये जा रहे धार्मिक व नक्सली आतंक के साथ साथ देश की व्यवस्था को दीमक की तरह चपट कर रहे भ्रष्ट शासन प्रशासन पर भी कठोरता से अंकुश लगाना होगा । तभी भारत से आतंकवाद पर सही अर्थों में अंकुश लग पायेगा। शेष श्रीकृष्ण । हरि ओम तत्सत्। श्रीकृष्णाय नमो।

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