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Saturday, September 17, 2011

उत्तराखण्ड के लिए नहीं अपितु अपनी कुर्सीं ंके लिए चिंतित रहते है भाजपा -कांग्रेस के नेता

-उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा की हुंकार से भयभी भाजपा व कांग्रेस के नेता पर्वतीय सीट छोड़ मैंदान की तरफ भागने के फिंराक में
- उत्तराखण्ड के लिए नहीं अपितु अपनी कुर्सीं ंके लिए चिंतित रहते है भाजपा -कांग्रेस के नेता
-सैनिक रंहते हुए देष के दुष्मनों से देष की रक्षा की अब भ्रश्टाचारियों से उत्तरांखण्ड की रक्षा करूंगा
-19 को धुमाकोट व 20 सितम्बर को कोटद्वार में मोर्चा की हुंकार रेली
-उत्तराखण्ड रक्षा के लिए समर्पण देख पूर्व सैनिकों व कर्मचारियों ने किया एक माह की पंषन का ऐलान


ंरामनगर(प्याउ)ं। उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा ने भाजपा व कांग्रेस को उत्तराखण्ड का घोर विरोधी बताते हुए इस बात का खुलाषा किया है कि उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा की हुंकार से भयभीत भाजपा कांग्रेस के वरिश्ठ नेता उनके खिलाफ लैन्सीडोनं से ंविधानसभा ंचुनाव लड़ंने से घबरा कर ंमैदानी क्षेत्र की ंतरफ ंभाग ंरहे है। उनके षीर्श नेताओं को खुली चुनौती दी है कि अगर उनमें हिम्मत है तो वे विधानसभा चुनाव नैनीडाण्डा विधानसभा क्षेत्र से लडें। गौरंतलब है कि उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा के अध्यक्ष पूर्व ले. जंनरल ंव पूर्व सांसद तेजपाल सिंह रावत ने ंभाजपा ंव कांग्रेस पर भ्र्रश्टाचारियों ंको ंप्रमुख्ंा संवैधानिक पदों परं आसीन कर प्रदेष को भ्रश्टाचार के गर्त में धकेल कर तबाह करने का आरोप लगाते हुए उत्तराखण्ड की रक्षा के लिए समस्त उत्तराखण्डियों से एकजूट हो कर ‘उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा से जुड़ने का खुला आवाहन किया। ंरामनगर से प्यारंा उत्तराखण्ड से दूरभाश से ंइस ंविशय पर ंबेबाक टिंप्पणी करते ंहुए उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा के ंविषेश सलाहकार व युवा नेता रघुवीर सिंह बिश्ट ने बताया कि 19 ंसितम्बर को धुमाकोट व 20 सितम्बर को कोटद्वार में उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा की विषाल ंरैली है।
उन्होंने साफ षब्दों में कहा कि आज ंउत्तराखण्ड राज्य गठन ंके दस साल बाद यहां की ंसत्ता मेें आसीन रहे भाजपा व कांग्रेस दोनों दंलों को प्रदेष के हिंतों की रत्तीभर भी चिंता नहीं है। ये दोनों दल उत्तराखण्ड के हितों को दाव पर लगा करे आकाओं के संकीर्ण हितों के लिए समर्पित रहते है। इसी कारण इन दलों के आका साफ छवि व जनहितों के लिए समर्पित नेताओं के बजाय घोर पदलालुप, भ्रश्ट व उत्तराखण्ड विरोधी नेताओं को प्रमुख्ंा संवेधानिक पदों पर आसीन कर लोकषाही का गला घोंट रहे हैं। इसी के विरोध में उन्होंने पहले कांग्रेस से सोनिया गांधी के तमाम प्रलोभनों देने के बाबजूद व अब भाजपा के आला नेताओं द्वारा तमाम प्रलोभनों देने के बाबजूद जनता में बेनकाब हो चूके लोगों को राज्य के प्रमुख संवेधानिक पदों पर आसीन करने के विरोध में इस्तीफा ंदे कर उत्तराखण्ड के हितों की रक्षा के लिए एक सषक्त राजनैतिक विलल्प देने के लिए उत्तराखण्ड के तमाम समर्पित बुद्विजीवियों, प्रतिभाओं व पूर्व सैनिक व सेवा निवृत ंसाफ छवि के आला अधिकारियों के मार्गदर्षन में ंउत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा का ंगठन कियां हैं। उन्होंने साफ षब्दों में कहा कि ंअगर खंडंूडी जी को प्रदेष के हितों की जरा सी भी चिंता रहती तो वे निषंक सरकार के कार्यकाल में हुए सटर्जिया, जलविद्युत परियोजनाओं व प्रदेष की जमीनों में बड़े स्तर पर हुए घोटाले के दोशियों को ंसजा दिलाने के लिए अब तक सीबीआई की जांच करने का आदेष तक दे देते।
श्री बिश्ट ने कहा कि उत्तराखण्ड के लिए ंसमर्पित प्रतिभाओं का एक ऐसा मोर्चा है जिसने अपने जीवन काल में अपंने कार्यो से उत्तराखण्ड का नाम पूरे विष्व में रोषंन किया है। ंइसी को देखते हुए उत्तराखण्ड गौरव से सम्मानित व उत्तराखण्ड के स्वर सम्राट नरेन्द्रंसिंह नेगी, पूर्व भारतीय प्रषासनिक सेवा के पूर्व अधिकारी सुरेन्द्रंसिंह पांगती, ंमेजर जनरल ष्ंौलेन्द्र राज बहुगुणा, ंभांजपा के ंपूर्व दर्जाधारी व ंजनरल टीपीएस के षीर्श ंसिपांहेसलार ंराजेन्द्र ंभण्डारी, गत सप्ताह ही ंभाजपा ंसे इस्तीफा देने का ऐलान करने वाले टिहरी जिला पंचायत अध्ंयक्ष रतन सिंह गुनसोला, उत्तराखण्ड पूर्व सैनिक संगठन के पीसी थपलियाल व उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन में ंअग्रणी छात्र नेता रहे डा एस पीएस सत्तीं सहित अनैक ंप्रतिभायें मोर्चे को उसकी मंजिल पंरं पंहुचाने के लिए रातदिन एकजुट हंै। ंमोर्चे ने अपनी स्थापना के बाद देहरादून, श्रीनगर, हल्द्वानी व टिहरी में ंअपने ंजो महत्वपूर्ण सम्मेलन किये उंनमें उमड़ी भारी भीड़ से भाजपा ंव कांग्रेस में हडकंप ही मच गया। खासकर श्रीनगर में मोर्चे के सम्मेलन में उमड़ी अपार जनसैलाब की गूंज ने भाजपा व कांग्रेस ंके मठाधीषों ंतक बेचेन कर दिया। इस ंरैली से भाजपा इंतनी भयभींत हुई कि उसको ंअपने ंलाडले रमेष पोखरियाल निषंक को तत्काल बर्खास्त कर ंहडबडी में जनता की नजरों में पहले ही बेनकाब हो चूके ंसंेना के पूर्व मंेजर जनरल भुवनचंद खण्डूडी को मुख्ंयमंत्री बना दिया। चुनाव से ंऐल ंवक्त पहले मुख्ंयमंत्री को बदले जाने की घटना से भाजपाई ही नहीं अपितु कांग्रेस भी हस्तप्रद ंहो कर इसे भाजपा का आत्मघाति कदम मान रहे है। वहीं भाजपा ंआला सुत्रों के अनुसार यह ंबदलाव ंपूर्व सैनिकों ंका भाजपा से हो रहे मोह भंग के नाम पर यह ंकंह कर लिंया गया कि ंटीपीएस ंभी खंडूडी के समर्थक हैं, खंडूडी की ंताजपोषी से उनकी वंापंसी ंतय ंहै। परन्तु भाजपा नेताओं को ंउस समय मुंह की ंखानी पड़ंीं जब टीपीएस ने दो टूक षब्दों में कहां उनकी प्राथमिकता उत्तराखण्ड के हित हैं ंकोई कुर्सीं नहीं। इसके बादं टिहरी सम्मेलन में जब भाजपां के जिला पंचायत अध्ंयक्ष ंरतन सिंह ंगुनसंोलां ने भाजपा से इस्तीफा देने का ऐलान किया तो भाजपा के आला ंनेता भौचंक्के रह गये। टीपीएस ने ंदंो टूक षब्दों में कहा कि ंउनकी प्राथमिकता भाजपा कांग्रेस को बचाने में नहीं अपितु ंउत्तरांखण्ड बचाने में है। ंउन्होंने कहा कि सेना में उन्होंने अपनां ंपूरा ं जीवन देषं की रक्षा के लिए ंसमर्पित किया। सेवा निवृत के बाद वे ंउत्तराख्ंांण्ड की सेवा के लिए कांग्रेस व भाजपा में जुडा, परन्तु वंहां मेेने देखा कि वे उत्तराखण्ड के हितों की ंरक्षा करने के बजायं भ्रश्टाचार व अपने दिल्ली के आकांओं के लिए समर्पित हो ंरहे हैं। जब कांग्रेस व भाजपां ने प्रदेष में ंसंवेधानिक पदों पर गलत ंलोगों को आसीन कियां तो उन्होने तमाम प्रलोभनों को ठुंकराते हुए ंदोनों दलों से इस्तीफा देने में एक पल की भी देर नहीं की। ं

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