भाजपा में अंधा बांटे रेवड़ी व साफ छवि के जननेताओं से परहेज क्यों ?



भाजपा आला कमान के आदेश पर निशंक ने अपना इस्तीफा राज्यपाल कों सोंपा और पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद खंडूडी ली प्रदेश के नये मुख्यमंत्री की शपथ। सबसे हैरानी की बात यह है कि भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते जिन निशंक को उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री के पद से चुनाव से चंद चार माह पहले बदलने के लिए मजबूर होना पड़ा, उनको भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष गडकरी ने ,भाजपा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सोंपने का ऐलान किया। इसके अलावा निशंक को हटा कर भाजपा आलो नेतृत्व को संघ भाजपा के समर्पित वरिष्ठ नेता भगतसिंह कोश्यारी, केदार सिंह फोनिया व मोहनसिंह ग्रामवासी जैसे साफ छवि के नेता तो नजर नहीं आये, उन्हें फिर केवल वही खंडूडी नजर आये, जिनको जनता ने लोकसभा चुनाव में न केवल नकार दिया था अपितु पूरे प्रदेश से भाजपा का सफाया कर दिया था। जिन खंडूडी पर प्रदेश के विरोधी दल के नेताओं ने नहीं अपितु उनके कबीना मंत्रियों व अधिकांश विधायकों ने अलोकशाही प्रवृति के कारण प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए भाजपा आला नेतृत्व के दर पर कई बार गुहार लगायी थी। उनके करीबी नौकरशाह व थैलीशाह के भ्रष्टाचार के किस्से से पूरा प्रदेश मर्माहित रहा। क्या गडकरी देश की जनता को बतायेंगे कि भाजपा में भ्रष्टाचार को सम्मानित करने की महान परंपरा है या खाये हुए सेवा मेवाओं का प्रतिफल देने के लिए उनका मन बैचेन है ?

Comments

Popular posts from this blog

>भारत रत्न, अच्चुत सामंत से प्रेरणा ले समाज व सरकार