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Friday, September 9, 2011

-अमेरिका, चीन व भारत सहित पूरे विश्व पर टूटेगा प्रकृति का कहर- बैज्ञानिक डा एच एस कपरवान

-अमेरिका, चीन व भारत सहित पूरे विश्व पर टूटेगा प्रकृति का कहर/
-प्रकृति के कहर के लिए जिम्मेदार है अमेरिका, चीन सहित विकसित देश/


विश्व जलवायु के अध्ययन करने को समर्पित संयुक्त राष्ट्र संघ की नोबेल पुरस्कार विजेता समिति के वरिष्ठ बैज्ञानिक डा एच एस कपरवान ने अमेरिका, चीन व भारत के उत्तराखण्ड सहित देश विदेश के कई भागों में इस पखवाड़े प्रकृति के विनाशकारी तबाही के लिए काफी हद तक अमेरिका व चीन स िहत विश्व के वे विकसित देश है जो अपने संकीर्ण व्यापारिक स्वार्थों के लिए अफ्रीका सहित विश्व के कई भागों में अंधाधुन्ध जंगलों का कटान कर रहे है। उन्होंने कहा कि आज विश्व क े अफ्रीका सहित कई विकासशील देशों में अमेरिका व चीन सहित अन्य विकसित देशों में जंगलों को अपने व्यवसायिक स्वार्थों की पूर्ति के लिए काटने की अंधी प्रतियोगिता चल रही है। इससे विश्व पर्यावरण को क ाफी नुकसान पंहुच रहा है। ग्लोबल वार्मिग से विश्व का प्रकृति विचलन बढ़ रहा है। ग्लेशियरों का पिघलना व समुद्री तूफान, नदियों में उफान व बादलों के फटने की घटनाओं में अचानक इजाफा आदि घ टनाये प्रकृति के प्रकोप के स्पष्ट उदाहरण है। अमेरिका में आये आइरिन तूफान ने तो ऐ सी तबाही मचायी कि पूरा विश्व स्तब्ध है। अमेरिका की पूरी अर्थव्यवस्था को अरबों करोड़ डालर की तबाही पंहुचाने वाले इस तूफान के बाद भी लगता है अमेरिका, ची न सहित अन्य विकसित ंदेश अपने विनाशकारी अभियान पर अंकुश नहीं लगा रहे है।
ग्लोबल वार्मिग पर विश्व प्रसिद्व नोबेल पुरस्कार सम्मान से सम्मानित संयुक्त राष्ट्र संघ की पर्यावरण अध्ययन के लिए समर्पित डा पचैरी के नेतृत्व वाली समिति के वरिष्ठ पर्यावरणीय वैज्ञानिक डा एच एस कर्पवान ने प्यारा उत्तराखण्ड से एक विशेष भ ेंट में आज 2 िसतम्बर को बताया कि बृक्षों के अंधाधुन्ध क टान के अलावा भारी संख्या में बाहनों की भरमार, व थर्मल पावन प्रोजेक्टों आदि ने पूरे विश्व के पर्या वरण को तबाही के गर्त में धकेल दिया है।
प्यारा उत्तराखण्ड के सम्पादक देवसिंह रावत ने जब यह पूछा कि इस ग्लोब ल वार्मिग में विश्व में बड़ी तेजी से पनप रही वातानुकुलित यानी एयरकंण्डिशन प्रवृति कहां तक जिम्मेदार है ं तो विश्व विख्यात पर्यावरण वैज्ञानिक डा एच एस कपरवान ने कहा कि अगर समय रहते विश्व क ी सरकारें नहीं जागेगी तो आने वाले समय में पूरे विश्व में प्रकृति के इससे भी भयंकर ता ंडव से पीड़ि त होना पडेगा।
विश्व प्रसिद्व वैज्ञा िनक डा एच एस कर्पवान ने कहा कि हालांकि उत्तराखण्ड में न तो अभी इतनी गाडियां ही है व नहीं ऐसे विनाशकारी स्तर पर जंगल ही काटे जा रहे है । नहीं वहां पर इस प्रकार के क ोई उद्योग धन्धे ही जो पर्यावरण को तबाह करते हैं उनकी भरमार है , उत्तराखण्ड में बादल फटने की यकायक एक साथ कई घटनाओं के रहस्य क ो उजागर करते हुए उन्होंन े स्पष्ट िक या कि ये ग्लोबल वार्मिग के ही बढ़ते प्रका ेप के कारण ऐसा घटित हो रही है । हालांकि कई पर्यावरणविद उत्तराखण्ड मे ं अंधांधुंध बन रहे सैकड़ों बांध व सुरंगों के निर्माण से प्रकृति क े साथ हो रही शर्मनाक खिलवाड़ क ो भी क ाफी हद तक जिम्मेदार मान रहे है ।
सबसे हैरानी की बात है कि उत्तराखण्ड के विश्व प्रसिद्व पर्यावरणीय वैज्ञानिक जिनकी सेवाओं को संयुक्त राष्ट सहित तमाम विश्व स्तर के विश्वविद्यालय ले रहे हैं ऐसी प्रतिभा का सदप्रयोग न तो उनके क रीबी रहे पूर्व मुख्यमंत्री भुवनचंद खंडूडी ने किया तो अब निशंक से आशा क रना भी एक प्रकार से बेईमानी ही हा ेगी।
देखना है कि आने वाले समय में वैज्ञानिक एच एस कपरवान की प्रक ृति के और तांडव मचाने की भविष् यवाणी क ो देखते हुए पूरा िवश्व के जन ज ीवन की सुरक्षा के लिए अमेरिका व चीन सहित विक िसत देश क्या बड़ े पैमाने पर बनो के सफाये के अपने विनाशकारी अभियान पर अंकुश लगाते हैं या नहीं। परन्तु इतना िन िश्चत है कि पूरे विश्व को अगर ंमनुष्य ने अभी से गंभीर पहल नहीं की तो िवश्व को प्रकृति क े प्रकोप से कोई भी नहीं बचा पायेगा। शेष श्री कृष्ण । श्री कृष्णाय् नमो। हरि ओम तत्सत्।

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