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Thursday, September 1, 2011

षहीदों की सपनों को रौंदने वाले आंदोलनकारी कैसे बने

षहीदों की सपनों को रौंदने वाले आंदोलनकारी कैसे बने
खटीमा, मसूरी व मुजफरनगरकाण्ड-94 के गुनाहगारों को सजा दिलाने के बजाय जो हुक्मरान अपने आप को आंदोलनकारी के तकमें से नवाजने की धृश्ठता कर रहा हो वहीं उत्तराखण्ड की जनांकांक्षाओं को साकार करने के बजाय प्रदेष को भ्रश्टाचार, क्षेत्रवाद व जातिवाद से तबाह किया जा रहा हो ऐसे दुषासनों को न केवल प्रदेष की जनता धिक्कारती है अपितु षहीदों की आत्मा भी धिक्कारेती रहेगी। उत्तराखण्ड के अमर षहीद की पावन स्मृति को नमन् करते हुए उत्तराखण्ड की जनता को षपथ लेना चाहिए कि जो हुक्मरान मुजफरनगरकाण्ड के गुनाहगारों को दण्डित करने में नाकाम रहे, जो प्रदेष में जनसंख्या पर आधारित विधानसभाई परिसीमन थोप पर उत्तराखण्ड ेके राजनैतिक भविश्य की निर्मम हत्या करने वाले रहे व जो जनांकांक्षाओं के प्रतीक प्रदेष की राजधानी गैरसैंण बनाने के बजाय देहरादून में ही राजधानी थोपने का शडयंत्र कर लोकषाही की निर्मम हत्या करते रहे उन प्रदेष पर लगे कलंक हुक्मरानों को प्रदेष की जनता एक पल के लिए प्रदेष की सत्ता से हर हाल में पदच्युत करके ही दम लेगी। राज्य आंदोलनकारियों का सम्मान करने के बजाय उत्तराखण्ड विरोधी व जिनके कुकृत्यों के कारण जनता ने जिनका काला मुंह किया था उनको आंदोलनकारियों के रूप में नवाजनें व सम्मानित करने वाले कुषासन को धिक्कार।

1 comment:

  1. hamare chhetra ke liye yah ek kalank hi hoga ki aaj tak hamare shaheed logo aur un shaheed mahilaaon ko jinki asmat aur praan is andolan main gaye unhe nayay nahin mila....na koi andolan hua is aur...ki nayay diya jaaye

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