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Friday, September 14, 2012


पूरे साल  विदेशी भाषा में राजकाज चला कर एक दिन हिन्दी दिवस मनाना लोकशाही का अपमान 

  संसद की चैखट जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन व शोक दिवस के रूप में मनाया हिन्दी दिवस व किया सामुहिक मुण्डन 

नई दिल्ली(प्याउ)। ‘आजादी के बाद भी देश की राजभाषा में काम काज करने के बजाय उन्हीं फिरंगियों की भाषा अंग्रेजी से देश में राजकाज चलाना जहां देश की आजादी पर कलंक है वहीं देश के आजादी के अमर सैनानियों के साथ देश की लोकशाही का भी घोर अपमान है।  यह दो टूक विचार भारत की आजादी को अंग्रेजी की दासता से मुक्त करने के लिए संसद की दर्शक दीर्घा से देश के हुक्मरानों को धिक्कारने वाले भारतीय मुक्ति सेना के प्रमुख देवसिंह रावत ने हिन्दी दिवस के उपलक्ष में संसद की चैखट जंतर मंतर पर राष्ट्रीय निर्माण पार्टी द्वारा आयोजित एक दिवसीय धरने पर अपने संबोधन में कहे। यह शर्मनाक कलंक देश पर आजादी के 65 साल बाद भी लगाये रखने वाले देश के सभी हुक्मरानों व दलों को धिक्कारते हुए श्री रावत ने देश की जनता से आवाहन किया कि देश के स्वाभिमान व लोकशाही की रक्षा करने के लिए तुरंत फिरंगी भाषा से मुक्ति के लिए आगे आयें।’ राष्ट्र निर्माण पार्टी के क
राष्ट्र निर्माण पार्टी द्वारा 14 सितम्बर को आयोजित इस धरने का संचालन  राष्ट्रीय महासचिव डा वरूण वीर ने किया। इस धरने में मुख्य अतिथि संघ लोकसेवा आयोग पर भारतीय भाषाओं में संघ लोकसेवा आयोग की तमाम परीक्षायें संचालित करने व अंग्रेजी की अनिवार्यता का हटाने की मांग को लेकर अपने प्रमुख साथी राजकरण सिंह और अन्य साथियों के साथ एक दशक से अधिक समय तक धरना प्रदर्शन करने वाले भारतीय भाषा आंदोलन के प्रमुख पुरोधा पुष्पेद्र चैहान थे। इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए भाषा आंदोलन के पुरोधा व अग्रणी साहित्यकार डा बलदेव वंशी, कई विदेशी भाषाओं का भारत में ज्ञान देने वाले निदेशक ज्योति संग, ओमप्रकाश हाथपसारिया, समाजसेवी संजय यादव, मीरापुर मुजफरनगर के समाजसेवी वीरेन्द्र गुप्ता, पुरूषोत्तम कपूर आदि प्रबुद्ध जनों ने अपने संबोधन में सरकार द्वारा देश को आजादी के बाद भी विदेशी भाषा की गुलामी देश पर बनाये रखना एक प्रकार का देश के साथ जघन्य अपराध है। ‘राष्ट्र निर्माण पार्टी ने इस अवसर पर हिन्दी को राष्ट्र भाषा घोषित करने, देश का नाम इंडिया हटा कर केवल भारत करने, उच्च न्यायालय व सर्वोच्च न्यायालय में अंग्रेजी स्थान पर हिन्दी में भाषा का प्रयोग करने की पुरजोर मांग की।
वहीं जंतर मंतर पर आयोजित एक अन्य धरने में बिहार के कटियार जनपद से सर्वोदय समाज के एक दर्जन से अधिक आये राष्ट्रभक्त स्वयंसेवियों ने अपने अध्यक्ष अशोक कुमार के नेतृत्व में  14 सितम्बर को हिन्दी दिवस को शोक दिवस मनाते हुए अपना सामुहिक मुण्डन करके विरोध प्रकट किया। सर्वोदय के आंदोलनकारी ‘राजभाषा हिन्दी को राष्ट्र भाषा का अधिकार देने, सर्वोच्च न्यायालय में हिन्दी लागू कराने व संसदी की कार्यवाही हिन्दी भाषा में कराने की मांग की। देश के स्वाभिमान व लोकशाही की रक्षा के लिए समर्पित समाजसेवी देवसिंह रावत, साहित्यकार डा बलदेव वंशी , ज्योति संग व समाजसेवी मोहनसिंह रावत ने सर्वोदयी कार्यकत्र्ताओं को उनके इस आंदोलन को धन्यवाद व समर्थन देते हुए राष्ट्र निर्माण पार्टी के कार्यक्रम में सम्मलित हुए।

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