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Saturday, September 29, 2012


स्व. शिवप्रसाद पुरोहित जैसे निष्काम कर्मयोगी ही होते है धर्म व समाज के नींव के पत्थरः शंकराचार्य माधवाश्रम जी महाराज 

 29 सितम्बर को अग्रणी समाजसेवी शिव प्रसाद पुरोहित को सर्व समाज ने दी भावभीनी श्रद्धांजली 

नई दिल्ली(प्याउ)। ‘स्व. शिवप्रसाद पुरोहित जैसे निष्काम कर्मयोगी  धर्म व समाज के नींव के पत्थर होते हैं। जिस समाज में ऐसे समर्पित लोग होते हैं उनके रचनात्मक जनहितकारी निष्काम कार्यो से समाज हमेशा समृद्ध, खुशहाल व धर्मवान बनता है। उनके आकस्मिक निधन से भारतीय संस्कृति का एक सच्चा ध्वजवाहक हमारे बीच में नहीं रहा, भगवान उनकी दिव्य आत्मा को अपने श्रीचरणों में समर्पित रखे ।‘ यह भावपूर्ण श्रद्धांजलि रूपि आर्शीवाद ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य माधवाश्रम जी महाराज ने अग्रणी समाजेसेवी व अपने अनन्य शिष्य शिव प्रसाद पुरोहित की श्रद्धांजलि समारोह में कही। इस श्रद्धांजलि सभा का आयोजन 29 सितम्बर को दोपहर पौने चार बजे दिल्ली के गढ़वाल भवन में अनैक अग्रणी सामाजिक संगठनों द्वारा दिवंगत शिवप्रसाद पुरोहित के करीबी मित्र कांग्रेसी नेता बृजमोहन उप्रेती,  भाजपा नेता डा विनोद बछेती व पत्रकार देवसिंह रावत के संयुक्त प्रयास से  किया । गौरतलब है कि 12 सितम्बर को दिवंगत हुए अग्रणी समाजसेवी व शंकराचार्य माधवाश्रम धर्मार्थ चिकित्सालय ट्रस्ट के महासचिव शिवप्रसाद पुरोहित के आकस्मिक निधन होने से उनके परिजन ही नहीं अपितु उनके मित्र, सहयोगी व शंकराचार्य माधवाश्रम जी महाराज के अनुयायी स्तब्ध व शोकाकुल है। इस श्रद्धांजलि सभा का संचालन करते हुए उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष देवसिंह रावत ने दिवंगत पुरोहित को सहृदय व सदैव जनहित के रचनात्मक कार्यो में समर्पित रहने वाला कर्मयोगी, बताते हुए उनका संक्षिप्त जीवनवृत श्रद्धांजलि सभा में रखा। इस सभा के शुभारंभ में सभी समाजसेवियों ने अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए उनके चित्र पर पुष्प अर्पित किये।
सभा में अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दिल्ली प्रदेश भाजपा के सचिव वीरेन्द्र जुयाल, उत्तराखण्ड महासभा के दिनेश ध्यानी, रूद्रप्रयाग जनविकास समिति के अध्यक्ष करण बुटोला, भाजपा नेता डा. विनोद बछेती, उत्तराखण्ड मानवाधिकार संगठन के अध्यक्ष एस के शर्मा, भाजपा नेता पूरण चन्द्र पंत, उत्तराखण्ड आर्य समाज के सतेन्द्र प्रयाशी, उत्तराखण्ड महासभा के रामेश्वर गोस्वामी, उत्तराखण्ड के अग्रणी संगीतकार राजेन्द्र सजवान, कवि व समाजसेवी पृथ्वीसिंह केदारखण्डी ने अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दिवंगत पुरोहित जी को एक सहृदय कर्मयोगी व सच्चा इंसान बताया जो अपना जीवन समाजसेवा में समर्पित कर गये।
इस श्रद्धांजलि सभा मे उपस्थित होने वालों में सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता व उत्तराखण्ड सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता अवतार सिंह रावत, समाजसेवी मोहन बिष्ट, उत्तराखण्ड जनता संघर्ष मोर्चा के महासचिव जगदीश भट्ट व उपाध्यक्ष पत्रकार सतेन्द्र रावत, उत्तराखण्ड महासभा के अनिल पंत, भाजपा नेता विजय सत्ती, संदीप बर्थवाल व जयेन्द्र भण्डारी, उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री भगतसिंह कोश्यारी के निजी सचिव जगदीश भाकुनी, कांग्रेसी नेता नन्दन सिंह रावत, रूद्रप्रयाग जनविकास समिति के महासचिव द्वारिका प्रसाद भट्ट, गोकुल सिंह राणा, समाजसेवी मनोहर निराला,  समाजसेवी मोहन सिंह रावत, समाजसेवी धर्मपाल कुमंई, उत्तराखण्ड क्लब के अध्यक्ष देवेन्द्र खत्री, आनन्द मेहरा व रौतेला, पत्रकार इन्द्रचंद रजवार व डा बिहारी लाल जलंधरी, समाजसेवी परमवीर सिंह रावत, संगीतकार नरेन्द्र पांथरी, अखिल भारतीय उत्तराखण्ड महासभा के शिव प्रसाद मुण्डपी, कैलाश कुकरेती, कांग्रेसी नेता पृथ्वीपाल पर्नवाल, साहित्यकार ललित केशवान, भाष्कर नौटियाल, श्री जदली, साहिबाबाद से आये समाजसेवी दिगमोहन नेगी,राकंपा के छात्र महासचिव दीपक द्विवेदी, बिल्डर चंदन सिंह गुसांई, समाजसेवी पंचमसिंह रावत, मनीष सक्सेना, योगेन्द्र पाण्डे, राजेन्द्र प्रसाद किमोठी, नोएडा सेक्टर 56  से आये समाजसेवी श्री किमोठी सहित अनैक समाजसेवी उपस्थित थे। श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित दिवंगत शिवप्रसाद पुरोहित की धर्मपत्नी श्रीमती पुष्पा पुरोहित व बेटा नीरज पुरोहित के अलावा उनके परिजन भी उपस्थित थे।
गौरतलब है कि 12 सितम्बर 2012 की रात को दिल्ली के साकेत स्थित के मैक्स अस्पताल में  आकस्मिक निधन हो गया था। उनका अंतिम संस्कार 13 सितम्बर को हरिद्वार में गंगा के पावन घाट पर किया गया। उनकी चिता को मुखाग्नि उनके इकलोते सुपुत्र नीरज पुरोहित ने दी। उनके शोकाकुल परिवार में उनकी धर्म पत्नी पुष्पा, उनका इकलोता बेटा नीरज व विवाहित बेटी पूनम किमोठी है। वे संसद भवन के समीप तपेदिक उन्मूलन संस्थान में कार्यरत थे व वहीं पर दशकों से सपरिवार निवास कर रहे थे। वे शंकराचार्य माधवाश्रम जी महाराज के अनन्य भक्त थें। उनकी समाजसेवी व समर्पित निष्टा को देख कर ही शंकराचार्य माधवाश्रम जी ने उनको भगवान बदरीनाथ केदारनाथ मार्ग पर रूद्रप्रयाग के समीप पावन कोटेश्वर में शंकराचार्य माधवाश्रम धर्मार्थ चिकित्सालय के भव्य निर्माण व संचालन का महासचिव का गुरूतर दायित्व का निर्वहन कई सालों से कर रहे थे। वे जनसेवा के मिशन में इस कदर समर्पित रहते थे कि उनको अपने परिवार, खाना पीना का भी भान नहीं रहता। आज उनकी इसी तपस्या से जहां कोटेश्वर में इस दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र में श्री शंकराचार्य माधवाश्रम धर्मार्थ चिकित्सालय संचालित है। यहां पर सीमान्त व दुरस्थ क्षेत्र के चिकित्सा सुविधा के लिए तरस रहे लोगों  को चिकित्सा सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। नहीं तो इस क्षेत्र की जनता को इलाज के लिए देहरादून व दिल्ली के दूरस्थ शहरों में मजबूरी में आना पड़ता है। आज स्व. शिवप्रसाद पुरोहित के समर्पित समाजसेवी तपस्या व  शंकराचार्य जी के आशीर्वाद से यहीं पर देश के अपोलो सहित कई बडे चिकित्सालयों के अनुभवी योग्य चिकित्सक यहां पर अपनी सेवायें दे रहे हैं और लोगों को एक्सरे, खून आदि सभी जांच यहीं पर मिलती है व महिला चिकित्सकों से युक्त इस चिकित्सालय में सस्ती दवाईयों के साथ अनैक प्रकार के रोगों का आप्रेशन भी हो रहे है। यहां पर अब तक हजारों लोग इस चिकित्सालय से लाभांन्वित हो चूके है। उनकी सहृदयता व समाजसेवा में निरंतर समर्पित रहने की प्रवृति के कारण  उन पर शंकराचार्य माधवाश्रम के साथ साथ भोले जी महाराज व माता मंगला का विशेष स्नेह रहा।
 उनकी इस निस्वार्थ समाजसेवी भावना से देश के दिग्गज नेता हेमवती नन्दन बहुगुणा उनसे अत्यधिक स्नेह रखते थे। उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवनचंद खण्डूडी उनके निस्वार्थ सेवा भाव से उनको अपना छोटा भाई से अधिक मानते थे। उनका उत्तराखण्ड के अधिकांश राजनेताओं से ही नहीं देश के अधिकांश राजनेताओं, उद्यमियों, अधिकारियों, समाजसेवियों व आम आदमियों से गहरा अपनत्व है। उत्तराखण्ड राज्य गठन आंदोलन के समर्पित सिपाई के तरह में सदैव समर्पित रहे। राज्य गठन आंदोलन में श्रीयंत्र काण्ड में शहीद हुई यशोधर बेंजवाल उनके साले थे। दिवंगत पुरोहित जी ने  तपेदिक से पीडि़त उत्तराखण्डियों को इस रोग से निजात दिलाने के लिए तपेदिक ऐसोशिएशन उत्तराखण्ड का गठन भी कुछ साल पहले किया। यही नहीं उनके प्रयास व मार्ग दर्शन से देहरादून में इसी ऐसोशियशन की महासचिव पूनम किमोठी ने 2011 में  राष्ट्रीय स्तर का एक विशाल सम्मेलन गत वर्ष देहरादून में आयोजित
किया था। जनसेवा में ताउम्र समर्पित समाजसेवी शिवप्रसाद पुरोहित के आकस्मिक निधन से न केवल उनके परिजन अपितु उनके मित्र व समाज बेहद शोकाकुल है।

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