आखिर किस मुंह से अपने बेटे साकेत के लिए वोट मांग रहे हैं विजय बहुगुणा

टिहरी की स्वाभिमानी जनता ने अपने स्वाभिमान को रौंदने वाले थैलीशाहों, सत्तांधो को यहां जमीन सुंघाई है

‘सितारगंज विधानसभा सीट पर हुए कुछ माह पहले उप चुनाव में खुद को उत्त
राखण्डी नहीं बंगाली मूल का बताने वाले, (उत्तराखण्ड के जनादेश का अपमान करके निहित स्वार्थ में अंधे हो कर उत्तराखण्ड में कांग्रेस आला नेतृत्व द्वारा अधिकांश विधायकों की इच्छा के प्रबल विरोध के बाबजूद ) थोपे गये मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, जिन्होंने खुद विधानसभा चुनावों में टिकट वितरण के समय प्रदेश में कांग्रेस में परिवारवाद का घोर विरोध किया था, अब अपने बेटे साकेत के लिए किस मुंह से टिहरी संसदीय उप चुनाव में इस क्षेत्र की उत्तराखण्डी जनता से वोट मांगेगे?
उत्तराखण्ड के स्वाभिमान को मुजफरनगर काण्ड-94 सहित राज्य गठन जनांदोलन में कदम कदम पर रौदने के गुनाहगार मुलायम सिंह व उनके उत्तराखण्डी प्यादों को अपने गले लगा कर उत्तराखण्डियों के जख्मों को कुरेदने वाले विजय बहुगुणा या उनके बेटे साकेत बहुगुणा को कोई भी स्वाभिमानी उत्तराखण्डी क्यों वोट देगा। हाॅं जो लोग अपने निहित स्वार्थ या दलगत संकीर्णता में अंधे हुए हैं वे जरूर सियार की तरह इनकी जय हो या समर्थन कर सकते है? आज सवाल साकेत का नहीं अपितु उत्तराखण्डी लोकशाही पर प्रश्नचिन्ह लग चूके थोपशाही के प्रतिक प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा का है,? मुझे विश्वास है कि उत्तराखण्ड के स्वाभिमानी जनता जिसने तानाशाह बनी इंदिरा गांधी के धनबल व सत्तामद को चूर करके गढ़वाल लोकसभाई उपचुनाव में खुद को उत्तराखण्ड का सपूत बताने वाले हेमवती नन्दन बहुगुणा को विजय बना कर उनके राजनैतिक भविष्य की रक्षा की थी, उस स्वाभिमानी जनता को नमन् करके उनकी ताउम्र सेवा करने के बजाय खुद को उत्तराखण्डी मूल का नहीं बंगाली मूल का बताने वाले हेमवती नन्दन बहुगुणा के बेटे विजय बहुगुणा के इस बेगानेपन को अब प्रदेश की जनता कैसे भूल सकती है? मुझे विश्वास है कि टिहरी संसदीय क्षेत्र की जनता ने इसी स्वाभिमानीपन का परिचय आगामी 10 अक्टूबर को लोकसभा चुनाव में देगी। यह चुनाव केवल सामान्य चुनाव नहीं अपितु यह चुनाव प्रदेश के स्वाभिमान, लोकशाही, संसाधनों व हितों की रक्षा करने का भी चुनाव है। टिहरी संसदीय क्षेत्र की जनता ने हमेशा अपने स्वाभिमान की रक्षा में थैली शाहो, सत्तांधों व थोपशाही के प्रतीकों को यहां हमेशा करारा सबक सिखाया है। भगवान बदरीनाथ टिहरी संसदीय क्षेत्र के लोगों के इस महान अभियान में साथ दे।
 
लोकशाही में कोई मामला कांग्रेस या बीजेपी का निजी मामला नहीं होता है। लोकशाही में हर दल जनता व समाज का सेवक होता है। उसके हर कार्य पर निगरानी रखना जनता का पहला दायित्व है। टिहरी भी उत्तराखण्ड प्रदेश का महत्वपूर्ण संसदीय सीट है। यह चुनाव प्रदेश की लोकशाही में हो रहा है भाजपा व कांग्रेस के संगठन का नहीं। यह प्रदेश के हितों व स्वाभिमान का है।

जो भी व्यक्ति लोकशाही को रौदने का काम करेगा वह चाहे हरीश रावत हो या तिवारी, खण्डूडी हो या महाराज, बहुगुणा हो या भगतसिंह कोश्यारी या निशंक किसी को भी माफ नहीं किया जा सकता। मेरे लिए उत्तराखण्ड, देश व मूल्यों के लिए कोई व्यक्ति या पार्टी महत्वपूर्ण नहीं होती है। समाज का हित तमाम निहित स्वार्थो, संबंधों, जाति या क्षेत्र, रंग, धर्म तमाम संकीर्णता व सम्बंधों से उपर उठ कर ही साधा जा सकता है। जिन लोगों ने एक कदम भी अपने जीवन में अपने निहित स्वार्थ से उपर उठ कर नहीं सोचा होता है वे समझते हैं दुनिया में सभी उनकी तरह अपने निहित स्वार्थ के लिए ही जीते हैं, आंखे खोल कर देखों , हजारों लोगों ने देश व समाज के लिए शहादते दी तमाम उम्र सिद्धांत व मानवता के लिए खुद को कुर्वान किया है।

Comments

Popular posts from this blog

-देशद्रोह से कम नहीं है शिक्षा का निजीकरण

>भारत रत्न, अच्चुत सामंत से प्रेरणा ले समाज व सरकार