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Friday, February 22, 2013


हेदराबाद के आतंकी हमले के बाद हुआ गया में नक्सली हमला


आतंकी और नक्सली समस्या का स्थायी समाधान करने से क्यों डर रही है सरकार? 

देशवासी अभी 21 फरवरी बृहस्पतिवार को हेदराबाद में हुए आतंकी हमले से उबर भी नहीं पाया था कि अगले ही दिन 22 फरवरी शुक्रवार दोपहर बिहार के गया जनपद में नक्सलियों ने  बारूदी सुरंग से पुलिस जीप उड़ा कर उसमें सवार सभी सात पुलिसकर्मियों सहित एक ग्रामीण को मौत के घाट उडा दिया। बिहार के गया में हुए नक्सली हमले के बारे में पुलिस सुत्रों के अनुसार विस्फोट रौशनगंज थाने से लगभग 600 मीटर दूर उचला गांव में 22 फरवरी की दोपहर 12.08 बजे हुआ।  इस विस्फोट में स्थानीय थाने के एएसआई प्रद्युम्न कुमार राय और एसपीओ पवन कुमार सहित 7 पुलिस कर्मियों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। ये पुलिसकर्मी आंगनवाडी सेविकाओं के चयन के बाद वापस लोट रहे थे कि उनकी वापसी पर वारूदी सुरंग से विस्फोट करने का जाल नक्सलियों ने पहले से बिछा दिया था। इस हमले के बाद  नक्सलियों ने पुलिसकर्मियों के हथियार भी लूट लिए। इस कायराने हमलों से भले  ही देश के सत्तांध हुक्मरान व राजनेता केवल रस्मी बयान बाजी करने में लगे हुए है वहीं इनके कुशासन, आतंकी व नक्सली हमलों से  बेहद व्यथित है। परन्तु देश के हुक्मरान आहत देशवासियों को  अपने हाल पर छोड कर पुन्न अपनी अंधी सत्तालोलुपता की चंगैजीवृति में लगे हुए है। गौरतलब है कि 21 फरवरी को हेदराबाद के दिलसुखनगर रोड़  पर हुए सांयकाल 7 बजे हुए बम विस्फोटों में 16 लोग मारे गये व 119 लोग घायल हो गये। इस हमले से कुछ ही महिने पहले हेदराबाद में ही एक मुस्लिम नेता ने जो भडकाऊ बयान दिये थे। वह तो भले ही सलाखों के अंदर बंद है परन्तु इस बम विस्फोट के बाद साफ हो गया है कि हेदराबाद आतंकियों का गढ़ बन गया है। केन्द्र सरकार व प्रदेश सरकार ने यहां मजबूत ब न चूके आतंकी गढ़ों को ध्वस्थ करने में अभी तक कोई कदम नहीं उठाया। अपितु राजनैतिक दल इस प्रकार के कृत्यों को अपने दलगत स्वार्थो के खातिर इन तत्वों को संरक्षण देने काम कर रहे है। खासकर जिस प्रकार से देश में करोड़ों की संख्या में घुसपेट कर चूके बंगलादेशियों ने असम से लेकर बंगाल, उप्र व दिल्ली में अपनी गहरी पेठ बना ली है इस समस्या का गंभीर समाधान निकालने के बजाय सरकारें इसे नजरांदाज कर रही है। उप्र में जिस प्रकार से वर्तमान सपा सरकार ने जेल में बद आतंकियों को छोडने के लिए न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया उस पर उच्च न्यायालय ने जो गंभीर टिप्पणी की वह देश के वर्तमान दलों की राष्ट्रघाती राजनीति को ही बेनकाब करती है। देश के हुक्मरान देश की एकता व अखण्डता के लिए गंभीर खतरा बन चूके आतंकी व नक्सली समस्या का स्थाई निदान करने के बजाय इसको नजरांदाज करके देश के हितों से खिलवाड करने का गंभीर कुकृत्य ही कर रहे हैं। इससे यह समस्या दिन प्रति दिन और विकराल बन गयी है। नक्सली समस्या भले ही सरकार की भेदभाव पूर्ण गलत नीतियों के कारण भी देश के 15 प्रतिशत भू भाग को अपनी चपेट में ले चूका है। वहीं आतंकी समस्या पाकिस्तान सहित विदेशी दुश्मन देशों के भारत को तबाह करने वाले षडयंत्र के कारण भारत में निरंतर बढ़ रहा है। परन्तु दशकों से इन दोनों समस्या से ग्रसित भारत की सरकारें इन गंभीर मसलों पर स्थाई समाधान के लिए एक कदम भी ईमानदारी से उठाना तो रहा दूर ईमानदारी से इस समस्या पर विचार करने को तैयार नहीं है। इससे देश की एकता व अखण्डता को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है। वहीं देश का बडा भू भाग न केवल आतंकी अपितु नक्सली प्रभाव में आ गया है। राजनैतिक दलों की तुष्टिकरण की आत्मघाती कुनीति आज देश की एकता व अखण्डता पर ग्रहण लगाने का कारण बन चूकी है।

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