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Thursday, February 7, 2013


जलविहार की गरीब बहादूर दामिनी की सहायता करने के लिए क्यों सांप सुघ गया दिल्ली व उत्तराखण्ड की सरकारों को 


दिल्ली में 16 दिसम्बर को सामुहिक बलात्कार की शिकार हुई दामिनी व उसके परिजनों की सहायता के लिए आनन फानन में दरियादिली दिखा ने वाली केन्द्र सरकार, दिल्ली, उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड की सरकारें उस समय बेनकाब हो गयी जब 3 फरवरी की रात को जल विहार दिल्ली की 17 वर्षीया दामिनी को बलात्कार की कोशिश करने में असफल रहने से दामिनी पर प्राणाघात हमला किया। इस विधवा गरीब माॅं की बहादूर दामिनी बहादूरी का इलाज अखिलभारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान दिल्ली के ट्रामां में चल रहा है । परन्तु इस गरीब व जांबाज दामिनी व उसके परिजनों की सहायता के लिए न तो दिल्ली सरकार आगे आयी व नहीं उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा व नहीं केन्द्र सरकार। इससे साफ हो गया कि इन हुक्मरानों ने 16 दिसम्बर को बस में सामुहिक बलात्कार के शिकार हुई दामिनी के लिए जो दरियादिली दिखा कर सहानुभूति अर्जित कर रहे थे वह असल में उनकी सहृदयता नहीं अपितु 22-23 दिसम्बर को इंडिया गेट से लेकर विजय चैक तक हजारों की संख्या में उमडे आक्रोशित जनता से भयभीत हो कर अपनी खाल बचाने के लिए किया था। अगर इनमें जरा सी भी नैतिकता होती या इनको इस प्रकार की घटनाओं से अपने दायित्व का बोध होता तो ये जल विहार की इस गरीब जांबाज दामिनी की विधवा माॅं का साथ भी ऐसा ही देते जो साथ उन्होंने 16 दिसम्बर की दामिनी के परिजनों का दिया था। उत्तराखण्ड के वीरोंखाल के खाटली पट्टी मूल की इस जल विहार(लाजपत नगर दिल्ली) की झुगियों में रहने के लिए मजबूर इस गरीब परिवार पर बलात्कारी व उसके गुण्डों के आतंक का साया आज भी मंडरा रहा है।  की जांबाज दामिनी का परिवार दिल्ली के लाजपत नगर के समीप जलविहार के झुगी बस्ती में जा कर आज प्यारा उत्तराखण्ड को वहां की स्थिति के बारे में सूचना देने वाले समाजसेवी हरीश चन्द्र धोलाखण्डी ने बताया कि सांसद संदीप दीक्षित के पीडि़त परिवार से मिलने पर जब बलात्कारी के भाईयों द्वारा धमकी दी जाने की बात उजागर हुई। इसकी शिकायत होने पर पुलिस ने आज धमकी देने वाले दोनों आरोपियों को भी बंद कर दिया। श्री धोलाखण्डी ने बताया कि परिवार की स्थित काफी दयनीय है । ऐसी स्थिति में तमाम समाजसेवी संगठनों का पहला दायित्व इस पीडि़त गरीब परिवार की सहायता करने के लिए आगे आना चाहिए।
गौरतलब है कि गत वर्ष 9 फरवरी को नजफगढ़ में सामुहिक बलात्कार की शिकार हुई दामिनी के परिवार की सहायता के लिए न तो दिल्ली सरकार आगे आयी व नहीं उत्तराखण्ड की सरकार? ये सरकारें तभी जागती है जब जनता 16 दिसम्बर को सामुहिक बलात्कार की शिकार हुई दामिनी प्रकरण पर आक्रोशित हो कर  22-23 दिसम्बर की तरह सडकों पर न उमड़ जाये।
देश के हुक्मरानों की इसी प्रवृति को देख कर पुलिस प्रशासन गरीब व उपेक्षित परिवार के पीडि़तों को कैसे न्याय देता है यह गत साल नजफगढ़ में सामुहिक बलात्कार पीडि़ता के प्रकरण में अब तक दम तोड़ रही न्याय से ही उजागर हो जाती है। जिस प्रकार से कमजोर पेरवी व हुक्मरानों की इस प्रकार की पक्षपात पूर्ण रवैये से मुजफरनगर काण्ड के अभियुक्तों को आज 18 साल बाद भी दण्डित करना तो दूर इनको कटघरे में भी खडा नहीं किया जा सका। ऐसे में तमाम वे समाजसेवी संगठन जो समाजसेवा के नाम पर लाखों रूपये आये दिन पानी की तरह बहाते हैं उनको आगे आ कर ऐसे पीडि़तों की सहायता के लिए आगे आना चाहिए।

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