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Friday, February 15, 2013


भारतीय लोकगायकी का ध्रुवतारा -लोकगायक से जननायक बने नरेन्द्रसिंह नेगी 


भले ही देश में हिन्दी सहित तमाम भारतीय भाषाओं में गीत लिखने वाले व गाने वाले गायकों की संख्या असंख्य है। परन्तु जो मुकाम उत्तराखण्ड के शीर्ष लोकगायक नरेन्द्रसिंह नेगी ने अपने प्रदेश में युगान्तकारी व क्रांतिकारी गीतों को गा कर जननायक बन कर हासिल किया वह वर्तमान में हिन्दी के बाॅलीवुड के गायकों को भी हासिल नहीं है। अपने ही रचित गीतों को स्वर देकर न केवल नरेन्द्रसिंह नेगी देश की रक्षा में लगे लाखों जांबाज वीर सैनिकों के दिलों की धडकन है अपितु वे उत्तराखण्ड में यहां की जनविरोधी सरकारों द्वारा समुचित विकास न किये जाने के कारण पीढी दर पीढ़ी देश प्रदेश में वनवासी जीवन जीने के लिए अभिशापित लाखों उत्तराखण्डियों व अकेल ही उत्तराखण्ड में घर परिवार की जिंम्मेदारी ढोने के लिए मजबूर महिलाओं के सुख दुख के सहारा भी बने है।  आज देश का प्रबुद्ध लोग व राजनीतिज्ञ भी यह जानते हैं कि उत्तराखण्ड में एक ऐसा महान लोकगायक है नरेन्द्रसिंह नेगी जिन्होंनेे देश के सबसेे बडे दिग्गज राजनेता व कांग्रेसी मुख्यमंत्री नारायणदत्त तिवारी को ही नहीं  अपितु रामराज्य व भ्रष्टाचार मुक्त सुशासन देने के दावा करने वाली भाजपा को उत्तराखण्ड की पावन देवभूमि में अपने गीतों के माध्यम से बेनकाब किया। जहां तक बालीवुड में स्थान बनाने से बढ़  कर जनता के दिलों में छाने का जो सराहनीय कार्य नरेन्द्रसिंह नेगी ने अपनी दुखी जन्मभूमि के लोगों को इन कुशासकों से मुक्ति का स्वर दे कर सफलता हासिल की वह मुकाम भले ही सरकारी अलंकरणों से सम्मानित होने के बाबजूद असम के महान गायक भूपेन दा को हासिल नहीं हो पाया। वे जनमानस को असम को घुसपेटियों से रौदवाने वाले हुक्मरानों को बेनकाब करके जनता को दिशा देने में असफल रहे। वहीं नरेन्द्रसिंह नेगी आज देश का एक ऐसा जीवंत लोकगायक बन गया है जो प्रदेश के दिशाहीन पदलोलुपु राजनैतिक दलों से दुखी जनता को अपने गीतों के माध्यम से सही दिशा देने का काम भी बखूबी से कर रहे है। वे जनविरोधी सरकारी तकमों व अलंकरणों या बाॅलीवुड की मायानगरी में अपनी आत्मा व गीत संगीत का सौंदा न करके आज भी अपनी जन्मभूमि व प्रदेश की संस्कृति व लोकशाही को मजबूत बनाने के लिए समर्पित है। सबसे बडी सेवा यही है कि जो अपने निजी स्वार्थो  को भी दाव पर लगा कर जनहितों व लोकशाही की रक्षा के लिए समर्पित रहे। तिवारी व निशंक के कार्यकाल में इसी कार्य को करके नेगी जी ने न केवल अपनी प्रतिभा का डंका बजाया अपितु प्रदेश व देश में एक नजीर भी पेश की कि कलाकार केवल अपने स्वार्थ के लिए नहीं अपितु समाज के हितों की रक्षा के लिए अपने हितों को भी दाव लगा सकते हैं।   वहीं ‘जय भगौती नन्दा ’जैसे कालजयी गीत गा कर पूरे विश्व में नन्दादेवी राजजात से रूबरू कराया। हिन्दी में गुलजार, प्रदीप,  आंध्ंा्र में गदर, छत्तीसगढ़ में तीजनबाई, असम में भूपेन दा सहित असंख्य महान गीतकार व गायक हुए परन्तु जिस प्रकार से लोकत्रांत्रिक ढ़ग से जनविरोधी सरकारों को बेनकाब करने में महत्वपूर्ण सफलता नरेन्द्रसिंह नेगी ने हासिल की वह अपने आप में अद्वितीय है। ऐसे महान गायक नरेन्द्रसिंह नेगी को इसी पखवाडे दिल्ली में न केवल उत्तराखण्ड के सांस्कृतिक, सामाजिक सरोकारों के मर्मज्ञ डा. शेखर पाठक अपितु राष्ट्रीय व  अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ पुष्पेश पंत व देश के वरिष्ठ पत्रकार रहे डा गोविन्दसिंह भी उनको उत्तराखण्ड के महान गायक ही नहीं जननायक के रूप में सम्मानित किया। नरेन्द्र नेगी ने अपने 40 वर्षीय गायकी यात्रा से उत्तराखण्ड के ही नहीं अपितु देश के तमाम कलाकारों को एक संदेश दे दिया कि एक कलाकार को धन के लिए अपनी लोकसंस्कृति को विकृत्य करने की प्रवृति को छोड़ कर जनहितों का गलाघोंटने वाली सरकारों को भी बेनकाब करने के दायित्व को पूरा करना भी प्रत्येक गायक व लोककलाकार का प्रथम धर्म है । नेगी जी ने अपने गीतों के माध्यम से न केवल उत्तराखण्डी संस्कृति के साथ साथ शराब, पर्यावरण बलिप्रथा, भ्रष्टाचार सहित तमाम सामाजिक कुरितियों पर जमकर प्रहार किया। इस धर्म का निर्वाह करने से ही जनता उनको सर आंखों में बिठायेगी।

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