Pages

Monday, February 11, 2013


राजधानी बनाओ गैरसैंण 


माफिया, नेता और नौकरशाह यूं बनियांच काल आज
उत्तराखण्डियों की एक ही मांग आज राजधानी गैरसैंण
उत्तराखण्ड का जू च विरोधी, तों कू क्यूं च दून प्यारी,
गैरसैंण मां बसियां च उत्तराखण्डी वीर शहीदों का प्राण
तख नी च कखी भू माफिया, खाली कलंक न लगावा
देहरादून माॅं कख रन देवता भेजी जरा ये भी बतावा
एक बात सभी आज कान लगावा गैरसैंण ना गैर बतावा
गैरसैंण च उत्तराखण्ड की आन मान शान -पहचान 
दीदा गैरसैंण को न गैर बतावा, शहीदों की भूमि यो च
उत्तराखण्ड की प्राण यो च, गैरसैण राजधानी गैरसैण 
लखनऊ से जब छोडी मोह क्यों थोपी अब देहरादून 
आओ मिलके गीत गावा, राजधानी हमारी च गैरसैंण 
-देवसिंह रावत 
(11 फरवरी की रात 9.24 बजे)

1 comment:

  1. Theek bunaa chhau bhaijee,
    myaaru jabaab REPLY maa padhin,
    aasha kardu sabbi hamaari vyathaa
    se hame chhutkaaru dilelaa jaldi.

    ReplyDelete