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Tuesday, February 5, 2013


बाबा रामदेव के लापता गुरू की जांच सीबीआई से कराने से बेनकाब हुए मुख्यमंत्री बहुगुणा व कांग्रेस आला नेतृत्व 


-मुजफरनगर काण्ड-94 सहित राज्य गठन जनांदोलन को रौंदने वाले  तथा राज्य गठन के बाद प्रदेश के जल, जंगल व जमीन को लुटने व लुटवाने वाले दोषियों को सजा दिलाने की पहल क्यों नहीं कर रहे हैं बहुगुणा?

दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख व विश्व विख्यात योगगुरू से क्रांतिकारी आंदोलन के प्रणेता बने स्वामी रामदेव के गुरू स्वामी शंकरदेव के सन् 2007 से हरिद्वार से रहस्यमय ढ़ग से लापता होने की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरों से कराने के उत्तराखण्ड सरकार के निर्णय से न केवल प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा अपितु कांग्रेसी नेतृत्व भी पूरी तरह बेनकाब हो गया। जिस प्रकार से विजय बहुगुणा को मुख्यमंत्री के रूप में कांग्रेस के अधिकांश विधायकों की इच्छा के खिलाफ कांग्रेस आलाकमान ने थोपा था,  कांग्रेस नेतृत्व के इसी उपकार चूकाने के लिए मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कांग्रेस व कांग्रेस नेतृत्व को कालाधन के खिलाफ देश व्यापी आंदोलन करने वाले स्वामी रामदेव को प्रताडित करने के लिए उनके गुरू के लापता होने की जांच सीबीआई को सौंप दी है।
यहां पर मेरा इस बात से विरोध नहीं है कि इस प्रकरण की जांच सीबीआई से क्यों करायी जा रही है। अगर इसमें कोई दोषी है तो उसको जरूर दण्ड मिलना चाहिए। मैं बाबा रामदेव का कोई अंध समर्थक भी नहीं? उनके मुलायम व निशंक आदि से प्रेम का मै प्रखर विरोधी रहा। पर यहां पर मेरा विरोध केवल इस बात का है कि यह केवल मुख्यमंत्री बहुगुणा का कांग्रेस नेतृत्व को खुश करने का एक हथकण्डा व कांग्रेस का बाबा रामदेव द्वारा कालेधन के खिलाफ देश व्यापी जनांदोलन छेड कर कांग्रेस को कटघरे रखने का प्रतिशोध मात्र है।
यहां पर न्याय का ही नहीं अपितु लोकशाही का भी गला घोंटा जा रहा है। अगर उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को लोकशाही व न्याय के प्रति अपने दायित्व का जरा सा भी भान रहता तो वे प्रदेश के मुख्यमंत्री की गद्दी पर आसीन होते ही उत्तराखण्ड राज्य गठन जनांदोलन को मुजफरनगर काण्ड सहित तमाम दमनकारी काण्डों से जनांदोलन को कुचले के दोषियों को सजा देने का काम करते। उनमें जरा सी भी नैतिकता रहती तो वे मुजफरनगर काण्ड -94 के जिन पुलिस प्रशासन के भैडियों को सीबीआई व इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दोषी ठहरा था उनको इस काण्ड के 18 साल बीत जाने के बाद भी सजा तक न होने पर मजबूत पहल कर उनको दण्डित कराने के दायित्व का निर्वहन करते। प्रदेश के मुख्यमंत्री बहुगुणा में जरा सा भी उत्तराखण्ड माॅ बहिनों का दर्द होता तो वे कभी बेशर्मी से मुलायम सिंह यादव, उसके कहारों व मुजफरनगर काण्ड के अभियुक्तों को न्यायिक मान्यताओं को रौंद कर वरी करने की धृष्ठता करने वालों को प्रदेश के महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर आसीन करने की भूल तक नहीं करते।
अगर प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को उत्तराखण्ड से जरा सा भी प्रेम होता तो वे बाबा रामदेव के गुरू के लापता प्रकरण की जांच की मांग सीबीआई से करने से पहले प्रदेश गठन के बाद प्रदेश के जल जंगल व जमीन सहित तमाम विकास के संसाधनों को लुटने व लुटवाने वाले भ्रष्टाचारियों की जांच सीबीआई से करा कर इन दोषियों को कटघरे में खडा करते। न तो मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने प्रदेश को तिवारी सरकार में हुए 54 घोटालों के भ्रष्टाचारी दिखे व नहीं उनको अपने विरोधी भाजपा सरकार में स्टर्डिया, जलविधुत परियोजनायें सहित अनैक भूमि आदि घोटालों की जांच सीबीआई से करा कर गुनाहगारों को प्रदेश का संसाधन लुटने व लुटाने वाले सत्तांध लुटेरों को सजा देने की रत्ती भर इच्छा भी नहीं रही। अगर उनको प्रदेश से जरा सा भी लगाव रहता तो वे जांच करते कि कैसे जनभावनाओं के अनुरूप प्रदेश की राजधानी गैरसैंण बनाने के बजाय गुपचुप तरीके से देहरादून में राजधानी थापने का षडयंत्रकारियों को सजा देने का कार्य करते। वे प्रदेश में शराब माफियाओं के मकड़ जाल में फंसे प्रदेश के नेताओं व नोकरशाहों की जुगलबंदी को बेनकाब करने का काम करते।
परन्तु बहुगुणा ने ऐसा कोई कार्य नहीं किया। केवल भारत के संसाधनों को विदेशों में जमा करने वाले काले धनिकों के खिलाफ अलख जगाने वाले व भारतीय संस्कृति को मजबूत बनाने के कार्य करने वाले बाबा रामदेव को परेशान करने के हथकण्डे के रूप में उनके लापता गुरू की जांच कराने का काम किया। वह भी उस सीबीआई से जो कांग्रेसी नेता  व लाटरी किंग रहे सुब्बा के नेपाली मूल का भी पता तक नहीं कर पायी।
उत्तराखण्ड देवभूमि है भगवान बदरीनाथ यहां पर जनहितों को रौदने वाले किसी भी सत्तांध को माफ नहीं करते। मुख्यमंत्री बहुगुणा को अपने पूर्ववर्ती मुख्यमंत्रियों के शर्मनाक पतन से सीख लेते हुए जनहित में कार्य करना चाहिए न की व्यर्थ में रामदेव जैसे देशभक्त युगान्तकारी स्वामी को सहयोग देने के बजाय सीबीआई का डण्डा दिखा कर भयभीत करना चाहिए। महाकाल के दर पर कोई अपराधी बच नहीं सकता। कांग्रेसी नेतृत्व को भी अपने बहुगुणा जैसे नेताओं को समय रहते हुए नाहक ही प्रतिशोध में परेशान करने की आत्मघाती प्रवृति पर अंकुश लगवाना चाहिए। नहीं तो पूरा देश यही समझेगा कि बाबा रामदेव को कांग्रेस आला नेतृत्व के इशारे पर देशहित में आवाज उठाने के लिए प्रताडित किया जा रहा है।
                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                               

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