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Friday, February 15, 2013


16 मई को खुलेंगे भगवान श्री बदरीनाथ के कपाट 


नरेन्द्र नगर (प्याउ)। विश्व के सबसे प्राचीन हिन्दु धर्म के सर्वोच्च पावन धाम भगवान बदरीनाथ के पावन दर्शन अरबों सनातन धर्मी श्रद्धालु 16 मई से कर पायेंगे। 2013 में भगवान श्री बदरीनाथ धाम के कपाट  16 मई को प्रातः 4 बजे खुलेंगे। यह घोषणा बसंत पंचमी के पावन पर्व पर े टिहरी राजवंश के  महल में महाराजा मनुजेंद्र शाह के प्रतिनिधिी की उपस्थिति में की गयी। इस अवसर पर बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष गणेश गोदियाल सहित तमाम प्रमुख पदाधिकारी भी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि गत वर्ष 2012 में भगवान बदरीनाथ धाम के कपाट 29 अप्रैल को खुले थे। श्रीबदरीनाथ धाम के कपाट खोलने की रस्म के रूप में तेल कलश यात्रा जो  गाडूघड़ी नाम से जानी जाती है की तिथि 30 अप्रैल तय की गई है। गौरतलब है कि गढ़वाल के पूर्व नरेश  की ओर से पारम्परिक रूप से तेल कलश बदरीनाथ धाम के लिए भेजा जाता है। पिछले साल प्राकृतिक आपदाओं व अतिवृष्टि से इस पावन यात्रा में अत्यधिक व्यवधान आया था। यही नहीं इस दौरान अनैक तीर्थ यात्रियों की अकाल मृत्यु से इस यात्रा घिरी रही। दिव्य हिमालय में स्थित भगवान हरि हर के पावन सर्वोच्च धाम श्री बदरी केदार नाथ के यह पावन धाम उत्तराखण्ड में अनादिकाल से श्रद्धालुओं के लिए मोक्षधाम के रूप में जाने जाते हैं।परन्तु आज तक भी किसी भी सरकार ने इस पावन धामों की व्यवस्था में सुधार करने के लिए ठोस कदम तक  उठाने की जरूरत तक महसूस नहीं की। लम्बे समय से श्रद्धालु इस सर्वोच्च धाम की व्यवस्था वैष्णों देवी व तिरूपति जैसे तीर्थो की तर्ज पर करने की मांग उठा रही है। परन्तु दशकों से यहां की व्यवस्था पर काबिज निहित स्वार्थी तत्वों के दवाब में कोई भी सरकार इसका संचालन वैष्णोंदेवी व तिरूपति की तर्ज पर करके सुधार करने को तैयार ही नहीं है।  इससे न तो यह समिति मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को उचित व्यवस्था प्रदान कर पायी है नहीं जनहित में कोई महत्वपूर्ण सेवायें ही जनता को प्रदान कर पायी। जबकि वैष्णोंदेवी व तिरूपति जी के संस्थान अपने दोनों लक्ष्यों को बेहतर ढ़ग से संचालित कर रही हैं।  शीतकाल के दौरान  भगवान विष्णु व भगवान शिव के सर्वोच्च पावन धाम श्री बदरीनाथ व श्री केदारनाथ धाम के कपाट बंद रहते हैं और  हर साल ग्रीष्मकाल में यह देश विदेश से पावन दर्शनों को आने वाले लाखों भक्तों के लिए खोल दिये जाते हैं। इससे साफ हो गया कि राज्य गठन के 12 साल बाद भी एक भी सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर कमेटी में अपने प्यादों को बेठाने के लिए भले ही यहां के हुक्मरान उतावले रहते हैं परन्तु इस समिति को श्रद्धालुओं व जनहित में वेष्णोंदेवी व तिरूपति की तर्ज पर गठित करने की इनके पास एक पल की फुर्सत तक नहीं।

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