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Sunday, March 24, 2013


निशंक पर शिकंजा कस कर अपनी डूबती नौका पार लगायेंगे बहुगुणा?


-मुख्यमंत्री के चक्रव्यूह से उबर पायेंगे क्या निशंक

-निशंक पर मामला दर्ज करने की मांग कर लेकर कांग्रेस विधायक ने दिया धरना

प्रदेश के तमाम सियासी समीक्षकों के बीच इन दिनों एक खास चर्चा है कि आगामी 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को जनता की नजरों में पूरी तरह से बदरंग करने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा क्या भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री निशंक पर शिकंजा कसेंगे?  जिस प्रकार से आगामी लोकसभा चुनाव से पहले कांग्रेसी आला नेतृत्व पर उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री बहुगुणा को पार्टी के लिए कमजोर मानते हुए मुख्यमंत्री के पद से हटाने का भारी दवाब बढ ़रहा है।  इन्हीं सियासी दवाब को कमजोर करने के लिए मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा भाजपा की सबसे
संवेदनशील कड़ी समझे जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री निशंक पर शिकंजा कस कर अपनी व कांग्रेस की स्थिति मजबूत करने का मन बना चूके है।
सुत्रों के अनुसार कांग्रेसी रणनीतिकारों को इस बात का पूरा भरोसा है कि अगर प्रदेश सरकार निशंक पर शिकंजा कसती है तो प्रदेश की जनता में भाजपा के तमाम विरोध का कोई असर नहीं पडेगा और कांग्रेस के प्रति जनता में समर्थन बढेगा। क्योंकि लोगों को भले ही कांग्रेस भी दुध की धुली नजर नहीं आ रही है परन्तु जिस प्रकार से अपने कार्यकाल में भाजपा की निशंक सरकार स्टर्जिया, जल विद्युत परियोजनाओं , कुम्भ सहित कई प्रकरणों में आये दिन विवादों में घिरी रही उससे आम जनता को उस समय बेहद निराशा हाथ लगी जब सत्तासीन होने के बाद खण्डूडी ने निशंक के कार्यकाल में विवादस्थ रहे तमाम प्रकरणो पर एक प्रकार से मूकता साधी रही। जनता की मनोभावनाओं को समझने में न केवल खण्डूडी असफल रहे, परन्तु दूसरी तरफ कांग्रेस के वर्तमान मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने जनभावनाओं को समझ कर जनभावनाओं  के अनुरूप निशंक की तरफ अपना शिकंजा बढा रहे हैं।
गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री के सबसे चेहते तराई बीज विकास निगम के तत्कालीन अध्यक्ष हेंमंत द्विवेदी पर जिस प्रकार से भाटी आयोग में शिकंजा कस रहा है, उससे साफ हो गया कि प्रदेश सरकार का असली निशाना हेंमंत द्विवेदी नहीं अपितु भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री निशंक ही है। यह केवल सियासी कायस लगाना नहीं अपितु पूर्व मुख्यमंत्री निशंक पर मामला दर्ज करने के लिए न केवल एक कांग्रेसी विधायक ने विधानसभा गैलरी में इसी सप्ताह धरना दिया अपितु प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता धीरेन्द्र प्रताप ने तो सीधे इसका संकेत देते हुए कहा कि भ्रष्टाचार के मामले में भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री, मंत्री व नौकरशाह भी हरियाणा के भ्रष्टाचारी पूर्व मुख्यमंत्री चोटाला की तरह जेल जायेंगे। ऐसा नहीं कि प्रदेश भाजपा के नेताओं इसका भान नहीं है। बहुगुणा के अप्रत्याशित कदमों से भाजपा नेता आशंकित है। क्योंकि प्रदेश के अब तक के मुख्यमंत्रियों में बहुगुणा ही अपने निर्णयों से प्रदेश की राजनीति में न केवल विपक्षियों व अपनी पार्टी के बीच ही नहीं आम जनता में भी काफी उथल पुथल मचाते रहे। जिस विवादस्थ ढंग से मुख्यमंत्री की ताजपोशी हुई, उसके बाद उनका खुद को बंगाली मूल का बताना,  भू मालिकाना पट्टे देने, गैरसैंण में विधानसभा के भवन की नीव रखना, सरकार से राहत मांगने वाले उत्तरकाशी के प्राकृतिक आपदा पीडि़तों को भजन करने की नसीहत देने वाले, भू उपयोग परिवर्तन का कानून बनाना, मूल निवास प्रमाणपत्र, अपने बेटे को टिहरी संसदीय सीट से उप चुनाव में उतारना, उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री होने के बाबजूद दिल्ली में आये दिन डेरा डालना, प्रदेश में अपने चेहतों को भारी विरोध के बाबजूद महत्वपूर्ण पदों पर आसीन करना आदि ऐसे कदम है जिसकी जनता में भी भारी प्रतिक्रिया सुनाई दी।
अपनी राजनैतिक कदमों से प्रदेश की राजनीति में भारी हलचल मचाने वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा क्या प्रदेश में अपनी व कांग्रेस की पकड़ 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए मजबूत बनाने के लिए रमेश पोखरियाल निशंक पर शिंकंजा कस कर करने का दाव चलेंगे। इसी आशंका से भयभीत भाजपा ने भी सरकार के खिलाफ पूरी तरह से कमर कस
ली है।
पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग को लेकर सत्तारूढ़ कांग्रेस के विधायक डा शैलेन्द्र मोहन सिंघल ने विधानसभा की गैलरी में धरना दिया। विधानसभा सत्र के दौरान आयोजित इस धरने को उन्होंने मुख्यमंत्री के द्वारा हर दोषी के खिलाफ कार्यवाही करने के आश्वासन के बाद समाप्त किया। गौरतलब है कि तराई बीज विकास निगम से जुड़ी भाटी आयोग की रिपोर्ट सदन में पेश करने से एक दिन पहले व बाद में प्रदेश की राजनीति में एक प्रकार से उबाल ही आ गया। इस घोटाले के निशाने पर भले ही तत्कालीन इस निगम के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी हों परन्तु प्रदेश की राजनीति के जानकारों को इस बात का भली भांति भान है इस प्रकरण का असली निशाना भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री निशंक ही है।
राजनैतिक क्षेत्रों में उठ रहे इस बबंडर को अपने धरने से हवा दे कर कांग्रेसी विधायक ने पूरी तरह से उजागर कर दिया। सत्तापक्ष के विधायक व मंडी परिषद के अध्यक्ष डा. शैलेंद्र मोहन सिंघल ने विधानसभा गैलरी में धरना देते हुए पुरजोर मांग की कि भाटी आयोग की रिपोर्ट  के अनुसार निगम के अध्यक्ष द्वारा बरती गई गंभीर अनियमितताएं और अवैधानिक ढंग से उन्हें अध्यक्ष बनाए जाने का अनुमादेन करने वाले तत्कालीन मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की। उनके धरने में कांग्रेस के दो विधायक शैलारानी रावत, उमेश शर्मा भी उपस्थित थे। यह धरना भले ही मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद समाप्त हो गया हो परन्तु इसकी गूंज 2014 तक साफ सुनायी देगी। यह तो आने वाला समय ही बतायेगा कि जनभावनाओं का विजय बहुगुणा सम्मान करके क्रियान्वयन करते हैं या खण्डूडी की तरह वे जनभावनाओं की उपेक्षा ़करके जनाक्रोश का भागी बनते है। सबसे हैरानी की बात यह है कि  गंगा यमुना का उदगम स्थली रही देवभूमि उत्तराखण्ड आज तक के मुख्यमंत्रियों के कुशासन के कारण शराब का गटर बना कर तबाही के गर्त में घंस चूका है। इस पूरे प्रकरण में लोग इस बात पर भी नजर गढ़ाये हुए हैं कि क्या निशंक इस भंवर से अपने दावों से स्टर्जिया सहित तमाम प्रकरणों से उबर पायेंगे ? क्या निशंक, खण्डूडी की तरह विजय बहुगुणा को भी संकटकाल में अपने पक्ष में रखने में कामयाब हो पायेगे? वहीं कांग्रेस निशंक प्रकरण से भाजपा की गुटबाजी को हवा दे कर उसकी एकजूटता को तार तार करना चाहती है। क्योंकि कांग्रेस को मालुम है कि भले ही निशंक व खण्डूडी दोनों इस समय एकजूट दिखे परन्तु खण्डूडी के समर्थक अंदर से कोटद्वार में मिली करारी पराजय के लिए निशंक से बेहद खपा है। शेष श्री कृष्णाय् नमो। हरि ओम तत्सत्। श्रीकृष्णाय् नमो।

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