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Sunday, March 3, 2013


भगवान श्रीबदरीनाथ यानी महाकाल का चमत्कार कांग्रेसी जप रहे हैं गैरसैंण का जाप


भगवान बदरीनाथ यानी महाकाल के प्रभाव से ही कांग्रेसियों की बुद्धि व जिव्हा में इन दिनों गैरसैंण चढ़ा है। वे जाप कर रहे है न चाहते हुए भी, क्या कभी विजय बहुगुणा से गैरसैंण जुबान पर लाने की कल्पना उत्तराखण्ड के वे लोग कर सकते हैं जिन्होंने गैरसैंण मुद्दे को बहुत ही निरंकुशता से तिवारी, खण्डूडी व निशंक को मुख्यमंत्री के कार्यकाल में रौंदते हुए देखा। जब जनता भी सोयी हुई हो इस मुद्दे पर, ऐसे समय में केवल भगवान ने इन सत्तासीनों की बुद्वि में गैरसैंण का लगाव चिपका दिया है। अब कांग्रेस ही नहीं भाजपा सहित तमाम दल गैरसैण से चाह कर भी बाहर नहीं निकल सकते हैं। इनको इसी जाल में फंस कर गैरसैंण को राजधानी बनानी पडेगी। बहुत चालाक व धूर्त बनते थे अब देखों वक्त ने केसे इनको गैरसैण का जाप करने के लिए विवश किया। मुझे हंसी आती है उन लोगों पर जो गैरसैंण का हितैषी बन कर भी गैरसैंण का राग सुन नहीं पा रहे है। प्रदेश का हित होगा इन्हीं लूले लंगडे व मक्कार राजनेताओं को सही दिशा में काम कराने से। उत्तराखण्ड का नाम भी हमने ऐसे ही हासिल होते देखा अब गैरसैंण राजधानी चाहिए वह हो रही है उसे कोई नहीं रोक सकता। बाकी इन नक्कारे नेताओं की इतनी कुब्बत नहीं की ये इसको रोक सके। महाकाल मुर्दे से भी काम कराता है। विकासपुरूष को भी तार तार राजभवन में करता है। जिनको आज भी अपने अहंकार का गुमान है उनको भी कभी फूटी आंख गैरसैण को नहीं सुहाने वालों को देखों आज कैसे पूरे प्रदेश में गैरसैंण के ही गीत गा रहे है। यह चमत्कार नहीं तो और क्या है? भले ही ये एक दूसरे को राजनैतिक मात देने के लिए ऐसा कर रहे हैं परन्तु इसी मोह में इनको नहीं पता कि ये महाकाल के जाल में पूरी तरह फंस गये हैं । अब इनकी मुक्ति केवल गैरसैंण राजधानी बनाने से ही होगी।

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