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Tuesday, March 19, 2013


नीतीश को चन्द्रशेखर बनना कर मोदी को प्रधानमंत्री 

बनने से रोकेगी कांग्रेस ?

मूर्ति प्रेम ने  किया नीतीश को माया की तरह  बेनकाब


 

प्यारा उत्तराखण्ड का विशेष लेख-
क्या नीतीश कुमार कांग्रेस के लिए अगले चरणसिंह या चन्द्रशेखर  बन कर देश का प्रधानमंत्री बनने की हसरत पूरा कर पायेंगे? यह सवाल देश की राजनीतिक पंडितों के मानस पटल पर कई दिनों से रह रह कर उठ रहा है। गौरतलब है भाजपा में  गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को भावी प्रधानमंत्री के दावेदार के रूप में तेजी से उभर रहे हैं उससे प्रधानमंत्री बनने के लिए राजग के दूसरे बडे साझेदार जदयू के नेता व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व कांग्रेस के बीच दूरियां कम होते जा रही है। कांग्रेस को इस बात का भान हो चूका है कि मनमोहन की सरकार से देश की जनता बेहद खपा हैं और 2014 के लोकसभाई चुनाव में कांग्रेस को सत्ता से दूर होना पडेगा। भाजपा सत्ता में आसीन न हो पाये इसके लिए वह ऐसे नेता को सामने रखना चाहती है जिससे उसको ज्यादा नुकसान भी न हो और नरेन्द्र मोदी जैसे तेजतरार घोर कांग्रेस विरोधी भाजपा नेता को प्रधानमंत्री बनाने से रोका जा सके। इसके लिए कांग्रेस के लिए नीतीश कुमार चन्द्रशेखर साबित हो सकते हैं। कांग्रेस के मठाधीशों इस बात से भयभीत हैं कि अगर  2014 में  नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बन गये तो देश में कांग्रेस को निकट 15-20 सालों तक सत्ता में वापसी के दरवाजे बंद हो जायेंगे। इसी कारण कांग्रेस राजग गठबंधन के सबसे मजबूत घटक जदयू के नेता व विहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रधानमंत्री बनने की प्रबल महत्वकांक्षा को हवा देने का काम कर रही है। 
जहां तक नीतीश कुमार के विकास व सुशासन के दावे को उनके द्वारा पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में 10 करोड़ की लागत से बनायी गयी गांधी की 72 फीट ऊंची मूर्ति से ही बेनकाब हो जाती है। किस प्रकार नीतीश कुमार विकास के संसाधनों को मायावती की तरह मूर्ति लगाने में लगा कर अपनी अहं की पूर्ति कर सकते हैं। हकीकत यह है कि गांधी मैदान में गांधी जी की एक 16 फीट ऊंची मूर्ति पहले से लगी है जिसको 22 साल पहले लालू यादव के शासनकाल में केवल 2 लाख 10 हजार रूपये की लागत से लगी हुई है। अब नीतीश कुमार जनता को बतायें कि अगर कोई अन्य मुख्यमंत्री अगले चुनाव में जीत कर आये और वह 100 करोड़ से गांधी की 100 फीट ऊंची मूर्ति बनाये तो उसका विरोध क्या करके करेंगे नीतीश। क्या जनता के विकास का पैसा माया व नीतीश की तरह मूर्ति बनाने में ही खर्च करने के लिए किया जा सकता है। गांधी स्वयं जनता के धन की फिजूलखर्ची के विरोध में थे ऐसे में गांधी के नाम पर जनता का धन को अपनी अहं की तुष्टिकरण के लिए बर्बाद करने वाले देश में क्या आदर्श शासन देंगे?
हालांकि मोदी को अभी तक भाजपा ने प्रधानमंत्री का दावेदार घोषित नहीं किया। वे अघोषित दावेदार हैं। आम कार्यकत्र्ता ही नहीं देश के अधिकांश जनमानस आज मोदी को प्रधानमंत्री के रूप में वर्तमान तमाम उमीदवारों से बेहतर मान कर उनको एक बार प्रधानमंत्री के रूप में देखना चाहता है। परन्तु राजग में ही नहीं खुद उनकी अपनी पार्टी भाजपा में भी मोदी का काफी विरोध है। संघ व भाजपा की एक मजबूत गुट मोदी को नापसंद करता है। भाजपा के सबसे बडे नेता लालकृष्ण आडवाणी का तो रूख स्पष्ट विरोध में है, जिस प्रकार से भाजपा में उनकी वरिष्ठता को नजरांदाज करके उनको प्रधानमंत्री पद के दावेदार भी नहीं समझा गया इससे से झुझला कर उन्होंने दो टूक शब्दों में बयान दिया कि कांग्रेस से ही नहीं भाजपा से भी लोगों को मोह भंग हो गया है। आडवाणी के अलावा भाजपा में सुषमा स्वराज, अरूण जेटली, मुरली मनोहर जोशी, राजनाथ, गडकरी भी प्रधानमंत्री के पद के लिए अपनी अपनी गोटियां गुपचुप ढंग से चला ही रहे है।  इस तरह खुद भाजपा में भी मोदी की राह आसीन नहीं है परन्तु जनता व भाजपा कार्यकत्र्ताओं के बीच में मोदी ही आज पूरे देश में सबसे मजबूत प्रधानमंत्री के दावेदार है। ऐसा नहीं कि जदयू में कोई दूसरा नेता प्रधानमंत्री का दावेदार नहीं है। जदयू के अध्यक्ष शरद यादव जो वर्तमान में राजग के संयोजक भी है मोदी व नीतीश के आपसी द्वंद से काफी आशान्वित हैं कि बिल्ली के भाग का छीटा कहीं उनके नाम से न गिर जाय। भाजपा के सत्तालोलुपु नेताओं के कारण ही भाजपा नेतृत्व अभी मोदी को प्रधानमंत्री का दावेदार घोषित नहीं कर पाया। जितनी देर वह मोदी को प्रधानमंत्री का दावेदार घोषित करने में लगायेंगे उतना नुकसान उन्हें आगामी कोकसभा चुनाव में होगा। देश की जनता इस समय मजबूत प्रधानमंत्री देखना चाहती है जो देश को मनमोहनी कुशासन, भ्रष्टाचार, आतंकवाद से मजबूती से रक्षा कर विश्व में भारत की शान बढ़ा सके। हालंांकि कांग्रेस की इस दयनीय हालत में धकेलने के लिए कोई दूसरा नहीं अपितु कांग्रेसी नेतृत्व ही जिम्मदार है जिसने कुशासन के प्रतीक मनमोहन सिंह को जनता के भारी विरोध के बाबजूद बनाये रखा। अगर कांग्रेस मनमोहन को समय पर हटा देती तो देश की जनता उसकों फिर से अवसर दे सकते थे । परन्तु सोनिया व राहुल गांधी ने मनमोहन का अंध समर्थन करके न केवल देश की जनता के घावों पर नमक छिडका अपितु कांग्रेस का भविष्य भी जमीदोज कर दिया। इसका दण्ड जनता आगामी चुनाव में कांग्रेस को सत्ता से दूर हटा कर देगी।
 
दिल्ली में गत वर्ष हुए राष्ट्रपति के चुनाव से लेकर कांग्रेस गठबंधन वाली सप्रंग सरकार से द्रुमुक का समर्थन वापसी के मामले में नीतीश व उनकी पार्टी का रूख इस बात की तरफ साफ इशारा कर रहा है कि नीतीश व कांग्रेस के बीच कुछ ऐसा पक रहा है जो आगामी 2014 में होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए तैयार हो रहा है। नीतीश द्वारा मोदी को भाजपा द्वारा भावी प्रधानमंत्री बनाने की पहल पर नीतीश का पुरजोर विरोध पर भाजपा व जदयू के नेताओं के बीच पक रहा खटराग के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन व उनकी यूपीए सरकार द्वारा नीतीश सरकार के विकास की यशोगाथा गाना यकायक नहीं हुआ। यह सब आगामी 2014 में लोकसभा चुनाव में सप्रंग व राजग गठबंधन की मिली जुली सरकार बनाने  की रणनीति का एक महत्वपूर्ण चाल ही है। जिसके सहारे स्पष्ट बहुमत न मिलने के बाद केन्द्र में बनने वाली सरकार के संभावित गठबंधन की इमारत बनने जा रही है। कांग्रेस के पास यह मजबूरी है कि उनको वर्तमान में नीतीश के अलावा कोई ऐसा नेता दिखाई नहीं दे रहा है जिसे वह प्रधानमंत्री का ताज चरणसिंह या चन्द्रशेखर की तरह पहना कर भविष्य की राह आसान करी जाय। मुलायम सिंह, मायावती, ममता या जया किसी पर कांग्रेस का भरोसा नहीं है। ये सब कांग्रेस के लिए भविष्य के लिए कांटे बिछा सकते हैं। कांग्रेस के लिए आज सबसे बडी चुनौती राजग के वर्तमान गठबंधन में सेंघ लगा कर मोदी को आंधी को रोकने की है। इस रणनीति के तहत कांग्रेस के लिए नीतीश के अलावा कोई दूसरा ऐसा राजग का नेता नहीं जो उसके राजग गठबंधन में मजबूती से दरार पैदा करके मोदी को रोकने के लिए कांग्रेसी के साथ ताल से ताल मिला कर आगामी लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस के बनवास को आसान बना सके। 

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