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Wednesday, March 20, 2013


 सीबीआई के हंटर से सरकार तो बचा सकती है कांग्रेस पर 2014 के चुनाव नहीं जीत पायेगी

स्टालिन को सीबीआई का हंटर चला कर मुलायम व माया से सरकार बचायेगी सरकार 

कांग्रेस सीबीआई के हंटर से अपनी सरकार तो बचा सकती है, परन्तु आगामी 2014 का चुनाव किसी प्रकार से नहीं जीत पायेगी। द्रुमुक के वरिष्ट नेता व द्रुमुक आलाकमान करूणानिधी के बेटे एम के स्टालिन के घर पर 21 मार्च की प्रातः साढ़े पांच बजे सीबीआई का छापा पड़ने के कदम को राजनैतिक क्षेत्रों में समर्थन के लिए आंखे दिखा रहे सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव व बसपा आला कमान मायावती को मजबूती से साथ देने का कांग्रेसी संदेश के रूप में देखा जा रहा है। सत्ता के लिए देश के राजनेता कितने निर्मम होते हैं इसका स्टालिन के घर पर पडा सीबीआई के छापे प्रत्यक्ष उदाहरण है। एक दिन पहले तक सप्रंग  सरकार की प्रमुख सोनिया व प्रधानमंत्री मनमोहन ही नहीं पूरी सरकार जिन करूणानिधि के लिए हर समय लाल कालीन बिछा कर स्वागत करने में दण्डवत रहती थी वह समर्थन वापस लेते ही कितनी निरंकुश व निर्दयी हो जाती है कि करूणानिधि के राजनीति के वारिस स्टालिन के घर पर हीं स्टालिन के फिल्म निर्माता बेटे उदयनिधी की एक विदेशी कार की आयात शुल्क डयूटी न चूकाने का बहाना बना कर सीबीआई का छापा डाल कर समर्थन वापस लेने का हंटर चलाने में जरा सी भी देरी नहीं की। यह कार कल ही नहीं खरीदी होगी यह पहले खरीदी होगी। सीबीआई की निष्पक्षता पर सवाल यही है कि सीबीआई को तब ही तुरंत क्यों यह गलती नजर आयी जब सरकार से दु्रमुक ने समर्थन वापस ले लिया। कांग्रेसी राजनीति के मर्मज्ञों का साफ मानना है कि सीबीआई द्वारा  स्टालिन के बेटे पर चलाया गया यह हंटर  स्पष्ट रूप से अस्तित्व की रक्षा में जुटी कांग्रेस सरकार को बेनी प्रकरण का बहाना बना कर आंखे दिखा रहे मुलायम को साधने में साहयक ही होगा। इसके साथ माया सहित उन तमाम दलों के नेताओं को यह एक साफ संदेश होगा कि सबकी जन्मपत्री कांग्रेस के पास है जरा भी किसी ने उन्नीस बीस की तो उसका हस्र भी करूणानिधि की तरह होगा। गौरतलब है कि मुलायम सिंह यादव के ही नहीं मायावती के खिलाफ भी कई मामले चल रहे हैं। जो इन दिनों कछुये की चाल से चल रहे हैं। अगर  इन दोनों ने जरा भी कांग्रेस को आंखे दिखाने की कोशिश की तो कांग्रेस कहां तक जा सकती है यह करूणानिधी प्रकरण पर कांग्रेस नेतृत्व ने सभी समर्थकों व विरोधियों को दिखा दिया। ऐसा नहीं कि केवल कांग्रेस अपने समर्थकों को ही इस हंटर से सबक सिखाती है। कांग्रेस अपनी ऐजेन्सियों से कांग्रेस के सबसे बड़े विरोधी बने बाबा रामदेव व भाजपा के पूर्व अध्यक्ष गडकरी को भी इसका स्वाद चखा चूकी है। हालांकि यह सच्चाई है कि कांग्रेस अकेले ऐसी पार्टी नहीं जो सत्तारूढ़ हो कर इस प्रकार की ऐजेन्सियों का हंटर अपनी सत्ता को बनाये रखने के लिए करती है। इस देश में अधिकांश राजनेतिक दल जब भी सत्तासीन हुए उनके काम कांग्रेस से हट कर अलग नहीं रहे। परन्तु कांग्रेस की यह कार्यवाही द्रुमुक राजनीति के गढ़ तमिलनाडू में भी ठीक ऐसा ही आत्मघाती साबित हो सकती है जैसे आंध्र प्रदेश में जगनमोहन रेेड्डी पर पडे सीबीआई के छापों के बाद वहां लोगों के दिलों में कांग्रेस के लिए नफरत बढ़ गयी। लोग जगन के गुनाह को साथ देने तक नजरांदाज करने वाली कांग्रेस को जगन से  अधिक गुनाहगार मान रहे है। कांग्रेस ने जगन पर सीबीआई का हंटर चला कर उसे प्रदेश का सबसे चेहता राजनेता बना कर कांग्रेस की सबसे समर्थक राज्य से अपनी कब्र ही खोद दी। 

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