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Thursday, June 27, 2013


मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा 13 वें दिन भी केदारनाथ तक नहीं जा पाये 


भगवान शिव ने दिया केदानाथ धाम में जूता पहने के घुसे दर्जा धारी कांग्रेसी मंत्री को चेतावनी 

उत्तराखण्उ का एक सचिव हर दिन आ रहा है हेलीकप्टर से दिल्ली

विजय बहुगुणा थोपने के लिए माफी मांगे सोनिया 

उत्तराखण्ड आपदा में बचाव व राहत के लिए सेना को सलाम, विजय बहुगुणा सरकार को लानत

सेना के कमाण्डर फंसे यात्रियों के साथ 12 किमी पैदल चले, 


पूरा विश्व केदारनाथ में हुई विनाशकारी त्रासदी से स्तब्ध है। हजारों आदमी मारे जा चूके हैं परन्तु उत्तराखण्ड का मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा 13 वें दिन (27 जून तक ) भी केदारनाथ धाम की सुध लेने का दायित्व भी नहीं निभा पाये। वह तो भला हो भारतीय सेना का जिसने एक लाख से अधिक पीड़ितों को बचाव व राहत पंहुचायी। एक तरफ भारतीय सेना/वायुसेना/भातिसुब/आपदा प्रबंधन के जाबांज जवानो ने अपनी जान को दाव पर लगा कर उत्तराखण्उ में गत सप्ताह आयी प्राकृतिक आपदा में फंसे सवा लाख से अधिक श्रद्धालुओं को ेबचा कर पूरे देशवासियों का दिल जीत लिया वहीं उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री इस प्राकृतिक आपदा में सबसे ज्यादा तबाह हुए केदारनाथ धाम में 13 दिन बाद भी हेलिकप्टर के सहायता से भी वहां की धरती पर उतरने का साहस नहीं कर पा रहे है। पूरा देश भौचंक्का है कि उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा आखिर क्यों इस आपदा से सबसे ज्यादा तबाह हुए संसार भर के सवा सो करोड़ भारतीयों के आराध्य धाम केदारनाथ में 13 वें ेदिन भी क्यों नहीं जा पाये है। वहां न जा पाने के कारण उन्होंने शायद मोदी को भी वहां जाने से रोका। उनको लगता कि लोग क्या कहेगे कि प्रदेश का मुख्यमंत्री तो जा नहीं पाया और सुदूर गुजरात का मुख्यमंत्री वहां चले गया। शायद इसी कारण उन्होंने मोदी को भी वहां जाने से रोक कर पूरी कांग्रेस को जनता की नजरों में खलनायक बनाने की धृष्ठता की। इससे लगता है या तो बहुगुणा अंदर से बहुत भयभीत है या किसी ज्योतिषि ने उनको डरा दिया। जो वे सुदूर पिथोरागढ़ से लेकर रूद्रप्रयाग की धरती पर तो जा रहे हैं दिल्ली भी पंहुच रहे हैं परन्तु केदारनाथ की धरती पर जाने से अंदर से साहस तक नहीं जुटा पा रहे है। उनके केदानाथ में उतर कर वहां की त्रासदी का जायजा लेने का पहला पदेन दायित्व का भी निर्वाह उन्होंने किया हो ऐसा किसी समाचार या सरकार द्वारा जारी समाचारों में पढ़ने व सुनने में नहीं आया।
वहीं उत्तराखण्ड की इस आपदा मे जहां पूरे विश्व का ध्यान लगा हुआ है। अरबों लोगों की श्रद्धा के केन्द्र केदारनाथ धाम की पावनता के साथ कांग्रेस के मुख्यमंत्री ने कितनी उपेक्षा की यह उनके दर पर अब तक न पंहुचने से साफ हो गया। होना तो यह चाहिए था कि इस आपदा में मारे गये लोगों के लिए हरिद्वार में शांति यज्ञ करने की घोषणा करने वाले मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को सबसे पहले केदारनाथ धाम में जा कर भगवान शिव के समक्ष अपने मंत्रिमण्डल व सभी दलों के नेताओं को ले जा कर देवभूमि की जनआस्था व प्रकृति से खिलवाड़ करने के लिए माफी मांगनी चाहिए थी। ऐसा करना तो रहा दूर मुख्यमंत्री केदारनाथ भगवान का इस त्रासदी में रूद्र रूप देख कर वहां पर जाने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहे है। उन्हें अंदर से शायद यह डर सता रहा है कि अगर वहां गये तो कहीं भगवान शिव फिर क्रांेधित हो गये।
भगवान बदरी केदानाथ की पावनता का उत्तराखण्ड की सरकारों को कितना खिलवाड़ किया, इसका जीता उदाहरण विजय बहुगुणा की सरकार द्वारा बदरी-केदारनाथ मंदिर समिति द्वारा जूते सहित भगवान केदारनाथ मंदिर में जाने से ही उजागर होता है। भगवान केदारनाथ में तो साक्षात भगवान शिव विराजमान है। इस घटना के बाद गणेश गोदियाल के क्षेत्र में बादल फटने की घटना को भी लोग भगवान शिव की गोदियाल को चेतावनी ही मान रहे है। इससे पहले तिवारी शासन काल में भी ऐसे ही एक ऐसे वाममार्गी को इस मंदिर समिति का अध्यक्ष बना दिया गया जो धार्मिक भावनाओं को नहीं मानते है।
मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, उनके मंत्री व नौकरशाह कितने संवेदनहीन है यह तो उनके दिल्ली दौरे से उजागर हो गया। परन्तु प्रदेश का  मुख्यमंत्री का सबसे करीबी वरिष्ट सचिव का हर रोज दिल्ली में हवाई मार्ग से आना भी प्रदेश की नौकरशाही व प्रदेश की आपदा के प्रति उनके कार्यो को ही बेनकाब करती है। जिस हेलीकप्टर को लोगों के निकासी के लिए लगना चाहिए था, आपदा के कार्यो में लगना चाहिए था वह हेलीकप्टर को वहां का एक महत्वपूर्ण नौकरशाह हर रोज दिल्ली आने में लगाये रखता तो वहां के आपदा प्रबंधन की क्या दशा होगी। भला हो सेना वालों का जिन्हेाने लोगों का बचाव व आपदा पंहुचायी। प्रदेश सरकार के भरोसे तो ेहो गया था यह काम। वहां पर प्रदेश सरकार ने जो  प्राइवेट हेलीकप्टर किये है प्रतिदिन उनका लाखो रूपया किराया चुकाता है प्रदेश वह हेलीकप्टर प्रदेश सरकार ने नेताओं व नोकरशाहों की आपदा के नाम पर सैर सपाटे में लगा रखे है। प्राइवेट हेलीकप्टर ने किस प्रकार के राहत पीड़ितों को ेदी वह तो एक हेलीकप्टर संचालक द्वारा यात्रियों को पहले निकालने के लिए लाखों रूपया की मांग करने ेसे उजागर हो गयी। हेलीकप्टर प्रकरण में कितना चूना प्रदेश को लगेगा यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा या आपदा के शौर में जमीदोज हो जायेगा। परन्तु एक बात स्पष्ट है आज कांग्रेस आला कमान व उनके उन सलाहकारों को ेभगवान शिव से ओर उत्तराखण्ड की जनता से विजय बहुगुणा जेसी निक्कमी सरकार थोपने के लिए माफी मांगनी चाहिए।
इस आपदा की कमान अपने हाथों में ले कर स्वयं आपदा प्रभावितों व सेना के जांबाजों का होेसला बढाने के लिए उतरे सेना के मध्य कमान के कमांडर जनरल को हमारा सलाम। सेना की मध्य कमान के जनरल आफिसर कमांडिंग इन चीफ ले. जनरल अनिल चैत ने 27 जून को बृहस्पतिवार को कुछ ऐसा ही कर दिखाया। बताया जा रहा है कि जनरल चैत पांडुकेश्वर व गोविंदघाट में फंसे 532 लोगों के जत्थे के साथ न सिर्फ 12 किमी पैदल चलकर जोशीमठ पहुंचे बल्कि विकट रास्ते में लोगों की मदद के लिए अपना कंधा भी बढ़ाया। सैन्य इतिहास में शायद यह पहला अवसर है जब इस तरह की प्राकृतिक आपदा में आर्मी कमांडर ओहदे का सैन्य अफसर भी खुद पहाड़ की पैदल पगडंडियों को नापकर आपदा प्रभावितों की मदद कर रहा है। 

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