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Tuesday, June 18, 2013

आडवाणी ही हैं राजग को बिखराव के सूत्रधार 


मनमोहनी कुशासन को प्राणुवायु देगी जदयू


नई दिल्ली(प्याउ)। रेल मंत्री जोशी के इस्तीफे के बाद दिल्ली के राजनैतिक दलों में जदयू के केन्द्रीय मंत्रीमण्डल में सम्मलित होने की अटकलें जोरों पर थी । परन्तु 17 जून को मंत्रीमण्डल में विस्तार के बाद इस पर उमड़ रहे बादल छट गये। भले ही जदयू केन्द्रीय मंत्रीमण्डल में भले ही सम्मलित नहीं हुआ हो परन्तु वह बाहर से मनमोहन सरकार के संकटमोचक बनेगे। गौरतलब है कि  मुलायम की सपा की कभी भी केन्द्रीय सरकार से समर्थन वापस की आशंका को दूर करने के लिए कांग्रेस नेतृत्व ने जदयू से मिला अघोषित समर्थन किसी प्राणवायु से कम नहीं है। अब साफ है कि जदयू द्वारा भाजपा नेतृतव वाला राजग गठबंधन छोडने के ऐलान के साथ ही मनमोहन सरकार की अस्थिरता का भय भी दूर हो गया। परन्तु नीतीश व कांग्रेस का संभावित गठजोड़ में क्या गुल खिलायेगा?  यह तय है कि नीतीश कुमार की यह तिकड़म भले ही उनको सियासी कुछ फायदा दे दे परन्तु जनता की नजरों में उनकी विश्वसनीयता पर गहरा प्रश्न चिन्ह लग गया है। इसके अलावा एक बात भी चर्चाओं में है कि भले ही नीतीश इस प्रकरण के खलनायक बन गये हों परन्तु असली सुत्रधार लालकृष्ण आडवाणी है जो अपने पदलोलुपता के लिए भाजपा में ही नहीं राजग के घटक दलों मे इस प्रकार के अलगाव को हवा दे रहे है। जिस प्रकार से आडवाणी के इस्तीफे के प्रकरण के बाद जदयू ने मोदी का विरोध व आडवाणी का समर्थन किया, और इसके बाद रविवार को 17 साल पुराने गठ बंधन को तोडने के बाद लालकृष्ण आडवाणी ने गोवा फेसले को इसके लिए जिम्मेदार बताया । ये सभी कारक चीख चीख कर आडवाणी के मोदी को रोकने का चक्रव्यूह को ही बेनकाब कर रहा है। 

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