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Sunday, June 9, 2013


तीन धारा के होटलों से प्रेरणा ले सरकार व जनता 




उत्तराखण्ड में रिषिकेश से बदरीनाथ मार्ग में व्यासी व देवप्रयाग के बीच तीन धारा पर  डेढ़ दशक से अधिक समय से हर दिन हजारों लोगों को उत्तम व पर्वतीय खाद्यानों युक्त सस्ता नाश्ता व भोजन खिलाने वाले दो दर्जन से अधिक खाने की छोटे होटलों से  छोटी-मोटी नोकरी के लिए दिल्ली, दुबई व देश विदेश में जा कर पलायन का दंश झेलने वाले 70 लाख उत्तराखण्डियों को प्रेरणा लेना चाहिए। रिषीकेश से लेकर बदरीनाथ तक कहीं ऐसे सस्ते, अच्छे खाना खाने के होटल तक नहीं है जहां आम आदमी से लेकर यहां आने वाले पर्यटकों व तीर्थ यात्रियों को कम दामों से अच्छा खाना मिलता हो। सबसे अच्छी बात यहां यह है कि यहां पर अधिकांश दाल व सब्जी इसी क्षेत्र के गांवों में उत्पादित होती है। इस तीन धारा के आस पास के स्थानीय लोगों को ही यहां पर अच्छा रोजगार मिला हुआ है। जो काम हमारी सरकार 12 साल में नहीं कर पायी वह काम तीन धारा के इन दो दर्जन होटल वाले स्थानीय भाईयों ने करके दिखाया। यहां पर अधिकांश यात्री खाना नाश्ता खाना पसंद करते है। यहां पर वो लूट खसोट नहीं है जो इस मार्ग या देश के अन्य क्षेत्रों में देखने को मिलती है। नहीं तो रिषिकेश से लेकर बदरीनाथ तक व्यासी व देवप्रयाग के बीच स्थित यह तीन धारा में जहां पहले 20 रूपये में एक आदमी को भरपेट चांवल, रोटी, दाल, सब्जी व सलाद के साथ पहाड़ी चटनी भी मिलती थी। अब यह खाना 50 रूपये से कम ही है। इतना अच्छा खाना तीन धारा के अलावा पूरे प्रदेश में संयुक्त रूप में इतने कम दामों में साफ सुथरे ढंग से हर दम तैयार रूप में नहीं मिलता है। आज यात्रा पर आने वाला या इस मार्ग पर जाने वाले जानकार अधिकांश आदमी जोशीमठ,नन्द प्रयाग, कर्णप्रयाग, गोचर, रूद्रप्रयाग, श्रीनगर, कीर्तिनगर, देवप्रयाग व व्यासी में कहीं इतना अच्छा, सस्ता, पहाड़ी खाद्यानों का भरपेट उचित खाना नहीं मिलता है। यहां पर नाश्ता का भी उचित प्रबंध डेढ़ दशक से में देख रहा हॅू। यहां पर सेकडों स्थानीय युवकों को रोजगार भी मिला हुआ है। 

        अवैध अतिक्रमण जहां भी होता है शासन प्रशासन की शह पर होता है। उत्तराखण्ड जैसे अविकसित व उपेक्षित दुर्गम स्थानों में अवैध अतिक्रमण केवल यहां के कस्बाई शहरों में पुलिस प्रशासन से मिली भगत से यहां के स्थानीय व्यवसायी करते है। पर यहां तीन धारा का विषय ही दूसरा है। परन्तु अगर मेदानी मापदण्ड से देखा जाय तो  देवप्रयाग से लेकर श्रीनगर, कर्ण प्रयाग, हल्द्वानी व नैनीताल सहित  उत्तराखण्ड के अधिकांश क्स्बाई शहर इसका उलंघन करते नजर आते है। जरूरत हे उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्र में नये अतिक्रमण के नये नियम बनाने की व यहां के भौगोलिक विषम परिस्थिति को देख कर भूकम्प झेल पाने युक्त प्राचीन व आधुनिक का समिश्रण वाले पर्यटक व आम यात्रिओं की सुविधाये प्रदान करने वाला व स्थानीय लोगों को रोजगार बढ़ाने वाली नीति को लागू करना।  यहां पर पर्वतीय क्षेत्र की भौगोलिक विषम परिस्थितियों में मैदानी मापदण्ड नहीं लागू किये जा सकते है। यहां पर शासन प्रशासन ने जब कोई इस प्रकार की आम यात्रियों के लिए कोई तीन धारा जैसी सुलभ, सस्ती और स्थानीय खाद्यान्नों युक्त साफ सुथरा व ताजा भोजन परोसने वाले समुहों का जो स्थानीय लोगों को रोजगार दे सके उनको न तो विकास किया व नहीं इस दिशा में सोच तक रखी। पूरे यात्रा मार्ग पर आम जनता व तीर्थ यात्रियों को रिषिकेश, व्यासी, देवप्रयाग, श्रीनगर, रूद्रप्रयाग, गोचर, कर्णप्रयाग, नन्दप्रयाग, चमोली, जोशीमठ सहित तमाम पुराने कस्बों के मंहंगे व तीन धारा की तर्ज पर आम यात्रियों को उचित, ताजा, स्थानीय खाद्यान्नो वाला भोजन परोसने में पूरी तरह असफल है। मैं नैनीताल, दन्या, दन्या, गरमपानी,भतरोंजखान, रानीखेत, अल्मोड़ा, मासी, चैखुटिया से पिथोरागढ़ तक के तमाम मार्गो पर राज्य गठन जनांदोलन से लेकर विगत लोकसभा चुनाव के दौरान भी गया। इधर पुरानी टिहरी से लेकर नई टिहरी व चम्बा  आदि स्थानों में भी गया हॅू। परन्तु जो सामुहिक ढ़ग से उचित, साफ सुथरा व स्थानीय लोगों ने उचित भोजन परोस कर पूरे देश के तीर्थ यात्रियों व हजारों यात्रियों को प्रतिदिन परोसने का काम तीन धारा में किया जा रहा है उसका कोई जवाब नहीं।  तीन धारा में अन्य कस्बों से अच्छा व सही खाना मिलता है कि अधिकांश जानकार लोग सभी यही पर खाना पसंद करते है। इससे देवप्रयाग, व्यासी, श्रीनगर के होटल वाले परेशान हैं। इसी कारण अब ये अक्षम व्यापारी तीन धारा को किसी प्रकार अवैध अतिक्रमण के नाम पर ग्रहण लगाना चाहते है। हकीकत यह है कि ये तमाम  अन्य कस्बाई शहरों के ये अधिकांश होटल तीन धारा से मंहगे होने के साथ साथ ताजा व साफ सुथरा खाना परोसने में असफल है। सरकार जहां भी इस प्रकार का विकास भी करती तो वहां पर स्थानीय लोगों की उपेक्षा कर ऐसे प्रभावशाली लोगों को दुकाने व स्थान उपलब्ध करायी जाती जिनका न तो स्थानीय लोगों को रोजगार देने का कहीं इच्छा होती व नहीं आम यात्रियों व तीर्थ यात्रियों को सस्ता, अच्छा व स्थानीय खाद्यान्नों युक्त भोजन परोसने के साथ साथ स्थानीय लोगों को रोजगार देने की कहीं प्राथमिकता नहीं रहती है। तीन धारा जेसे ताजा, सस्ते व उत्तराखण्डी भोजन परोसने वाले स्थलों का सरकार और विकास करती तो उत्तराखण्ड में आने वाला तीर्थ यात्री व आम आदमी कभी नहीं कहता कि देवभूमि में भी लूट खसोट होती है। तीन धारा के होटल व्ययवसायियों को इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि क्यों श्रीनगर, देवप्रयाग व व्यासी के होटलों से आम यात्रियों व तीर्थ यात्रियों को मोह भंग हो गया है। तीन धारा के व्यवसायियों को भी यही ध्यान रखना होगा कि उनका खाना इसी तरह सस्ता, ताजा व उत्तराखण्डी खाद्यान्नों युक्त ही रहना चाहिए। उनकी यही सेवा उत्तराखण्ड की सच्ची सेवा व नाम को रोशन करने वाली सेवा है।

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