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Friday, June 21, 2013

श्री केदारनाथ की त्रासदी में पीउि़तों की साहयता के लिए आये श्रद्धालुः शंकराचार्य माधवाश्रम जी महाराज

श्री केदारनाथ की स्थिति सुधरने तक ऊखीमठ में हो सतत् पूजाः शंकराचार्य माधवाश्रम 


श्री केदानाथ में शंकराचार्य की कोई समाधि नहीं, झूठ न फेलाये मीड़िया

हजारों लोगों के मारे जाने व केदारनाथ के रावल यानी मुख्य पूजारी लिंग
की कोई जानकारी न मिलने से चिंतित शंकराचार्य 

शंकराचार्य माधवाश्रम आश्रम जोशीमठ में 2000 से अधिक श्रद्धालुओं को आश्रय व भोजन देने में जुटा

शंकराचार्य माधवाश्रम चिकित्सा ट्रस्ट कोटेश्वर ने पीउितों के भेजी दवाईयां

मोक्षभूमि उत्तराखण्उ में आयी प्रलयंकारी त्रासदी पर गहरा दुख प्रकट करते हुए शंकराचार्य माधवाश्रम जी महाराज ने भगवान केदानाथ की सत्त पूजा ऊखीमठ में कराने की जरूरत बतायी। दूरभाष से प्यारा उत्तराखण्ड के सम्पादक देवसिंह रावत से 22 जून को अपने विचार प्रकट करते हुए शंकराचार्य माधवाश्रम जी महाराज ने कहा कि जिस प्रकार से मीउि़या केदारनाथ में आदिगुरू शंकराचार्य की समाधि बहने के बारे में जानकारी दे कर लोगों को गुमराह कर रहा है, वह निन्दनीय है। शंकराचार्य माधवाश्रम जी महाराज ने स्पष्ट किया कि आदि गुरू शंकराचार्य का निधन नहीं अपितु वे सदेह नंदी पर जटाजूट हो कर आरूढ़ हो कर शिवलोक में गमन कर गये। फिर उनकी केदारनाथ में समाधि बनाना व उसमें शिवलिंग स्थापित करना अपने आप में गलत था।
वर्तमान तबाही से काफी दुखी शंकराचार्य माधवाश्रम जी महाराज इस बात से भी चिंतित थे कि न तो मीड़िया व नहीं कोई सरकारी ऐजेन्सी केदारनाथ के मुख्या पूजारी लिंग के बारे में कोई जानकारी मिल रही है।
शंकराचार्य माधवाश्रम जी महाराज ने देश विदेश के तमाम समर्थ श्रद्धालुओं व स्थानीय नागरिकों से अनुरोध किया कि वे इस त्रासदी से पीड़ितों को आश्रय, भोजन, पानी व वस्त्रादि दे कर साहयता में हाथ बंटायें।
शंकराचार्य महाराज ने केदारनाथ धाम में हुई त्रासदी से यहां भगवान केदारनाथ की पूजा में पड रहे व्यवधान को देखते हुए स्थिति के सामान्य होने तक पूजा को ऊखीमठ स्थित भगवान केदारनाथ की शीतकालीन गद्दी- औकारेश्वर मंदिर में ही पूजा होनी चाहिए। शंकराचार्य माधवाश्रम के शिष्य वशिष्ट जी ने बताया कि पंच केदारों में पांच लिंग मुख्य होते है। लिंग के प्रमुख केदारनाथ के कपाट  खोलने व बंद करने के अवसर पर विशेषरूप से उपस्थित होते है। परन्तु इस आपदा के बाद न तो प्रशासन ने व नहीं मीडिया उनके बारे में कोई खबर तक नहीं ले पायी।

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