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Tuesday, May 24, 2011

अन्ना हजारे की 1 जून कोे उत्तराखण्ड यात्रा से सहमी भ्रश्टाचारों में आकंठ घिरी सरकार

अन्ना हजारे की 1 जून कोे उत्तराखण्ड यात्रा से सहमी भ्रश्टाचारों में आकंठ घिरी सरकार/
खंडूडी व निषंक में सत्ता संघर्श तेज

एक जून को अन्ना हजारे की दून यात्रा का स्वागत करते हुए भाजपाइयों ने कहा कि हजारे के अभियान को समर्थन दिया जाएगा। जिस समय 24 मई को खंडूडी के यहां पर बैठक हो रही थी उसी समय प्रदेष के मुख्यमंत्री निषंक भी अपने मंत्रिमण्डल की बैठक ले रहे थे। इस पर कई कायस लगा रहे हैं कि मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रियों को खंडूडी खेमें में जाने से रोकने के लिए यह कार्य किया। बात में कितनी सच्चाई हैं यह तो मुख्यमंत्री ही जाने परन्तु निषंक के राजनैतिक दावों से न केवल प्रदेष के वरिश्ठ भाजपा नेताओं के अपितु कांग्रेस सहित पूरी व्यवस्था व पत्रकारिता पर अपना मजबूत षिकंजा जकड़ लिया है। इसे देख कर लोग कह रहे हैं कि निषंक के मोहपाष में भाजपा संघ का आला नेतृत्व ही नहीं अपितु कांग्रेस के दिल्ली मठाधीष भी बंध चूके है। इसी कारण कांग्रेस ी जहां बड़े जोर षोर से भ्रश्टाचार के मुद्दे पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री को आये दिन घेरते हैं परन्तु उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री को एक प्रकार से अभय दान सा दे रहे है। उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री के कारनामों का उल्लेख तक करने में कांग्रेसी मठाधीषों व प्रवक्ताओं को सांप संुध रहा है। यह देख कर निषंक सरकार के भ्रश्टाचार को हाईकोर्ट में बेपर्दा करने वाले सर्वोच्च न्यायालय के वरिश्ठ अधिवक्ता अवतार सिंह रावत भी दंग है। कांग्रेसी नेताओं की इस निर्लज्जता पूर्ण व्यवहार से राजनीति के समीक्षक इसे कांग्रेसी मठाधीषों की जातिवादी सोच को जिम्मेदार मान रहे है।
उत्तराखण्ड की राजनीति में कांग्रेस पार्टी के सांसदों सहित बड़े नेता प्रायः निषंक के भ्रश्टाचार पर बोलने पर कतरा रहे है। अपने सांसदों की मूकता पर नेता प्रतिपक्ष डा हरक सिंह रावत भी दंग है। वहीं दूसरी तरफ निषंक का राजतिलक कराने वाले मेजर जनरल खंडूडी की राजनैतिक जमीन को निषंक द्वारा पूरी तरह से कब्जाने से आहत हो कर पूर्व मुख्यमंत्री खंडूडी अपने आप को हाषिये में महसूस कर रहे है। इसी को भांपते हुए उन्होंने अपने समर्थकों की एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन अपने निवास देहरादून में किया। इस बैठक में पूर्व विधायक भारत सिंह रावत, पूर्व विधायक व दायित्वधारी तीरथ सिंह रावत, बदररीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अनुसूया प्रसाद भट्ट, महिला आयोग की अध्यक्ष सुशीला बलूनी, देहरादून के मेयर विनोद चमोली, रविंद्र जुगरान, मोहल लाल बौंठियाल, टिहरी के जिला पंचायत अध्यक्ष रतन सिंह गुनसोला, उमेश अग्रवाल, ऋषिराज डबराल, पौड़ी के जिला पंचायत अध्यक्ष एम एस नेगी, राज्य सहकारी बैंक के अध्यक्ष उमेश त्रिपाठी , चमोली के विनोद करपवाण सहित ऊधमसिंह नगर, चंपावत, उत्तरकाशी आदि से कई भाजपाई मौजूद थे। इस बैठक के बाद खंडूडी व निषंक के बीच सत्ता संघर्श तेज हो गया है। सुत्रों के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री खंडूडी ही नहीं कोष्यारी भी भाजपा के आला नेतृत्व द्वारा निषंक का षर्मनाक संरक्षण करने पर हैरान ही है। क्योंकि खंडूडी के संरक्षक रहे ये नेता अब मुख्यमंत्री के पद पर निषंक के आसीन होने के बाद खंडूडी से उन्होंने अपनी कृपा दृश्टि एक प्रकार से हटा दी हे। राजनीति के इस सबक को देख कर खंडूडी जी जहां उमा भारती के हस्र को देख कर पार्टी से अलग हट कर राजनीति करने के अपने समर्थकों के भारी दवाब के बाबजूद भी स्वीकार करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे है। वहीं दूसरी तरफ भाजपा के आला नेतृत्व व अपने द्वारा बनाये गये मुख्यमंत्री निषंक द्वारा अपनी हो रही उपेक्षा से खंडूडी जी बहुत दुखी ही नहीं खिन्न भी हैं। इसी हालत में उन्हें अपना कोई हमदर्द नजर आ रहा है तो वह है कभी उनके राजनैतिक धुर विरोधी रहे पूर्व मुख्यमंत्री कोष्यारी। आज खंडूडी जी उस घड़ी को कोस रहे हैं जिस घड़ी उन्होंने अपने मुख्यमंत्री के पद पर हटने के बाद कोष्चारी के बजाय निषंक को प्रदेष के मुख्यमंत्री बनाने का निर्णय लिया। अपनी इस भूल को वह अपने राजनैतिक जीवन की सबसे बड़ी भूल बताते हुए अब नये सिरे से कोष्यारी के साथ निषंक को प्रदेष की सत्ता से हटाने के लिए केन्द्रीय नेतृत्व पर निरंतर दवाब बना रहे हे। खंडूडी ही नहीं कोष्यारी भी इस बात से हैरान हैं कि कैसे भ्रश्टाचार के विरोध में रही भाजपा का नेतृत्व आज उनके तमाम तर्को को नजरांदाज करते हुए निषंक को मुख्यमंत्री के पद पर आसीन होने का फरमान सुना रहे हैं। इसके साथ आला कमान जहां विधानसभा चुनाव से पहले ही प्रदेष की राजनीति से खंडूडी को केन्द्रीय संगठन का उपाध्यक्ष बना कर हाषिये में डालने का काम कर रहे हैं वहीं कोष्यारी की संगठन व आम जनता के बीच पकड़ को भुनाने के लिए उन्हें फिर निषंक के मुख्यमंत्रित्व में ही प्रदेष अध्यक्ष के पद पर आसीन करा कर निषंक को अभय दान देना चाह रहा है। भाजपा आला नेतृत्व की इस मंषा को भांप कर भले ही
दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों ने दो टूक षब्दों में इसे ठुकरा दिया हो परन्तु अभी आला नेतृत्व इतनी आसानी से हार मानने वाला नहीं। वह अपने वरिश्ठ इन दोनों नेताओं को अनुषासन का पाठ पड़ाने के लिए कृत संकल्प है। वहीं ंप्रदेष की हालत यह हो गयी हैं कि कांग्रेस के टिहरी क्षेत्र के तेज तरार नेता व प्रदेष के पूर्व मंत्री तथा वर्तमान विधायक किषोर उपाध्याय ने प्रदेष सरकार के भ्रश्टाचार को उजागर करने के कारण अपनी जान को मुख्यमंत्री व उनके लोगों से खतरे का आरोप लगाया। इस स्थिती में सहज है कि प्रदेष का सत्ता संघर्श कुछ दिनों में अपने उफान पर होगा। इस स्थिति के लिए भाजपा आला कमान के साथ साथ कांग्रेस के मठाधीष भी जिम्मेदार होंगे जो निषंक सरकार के कारनामों का मूक समर्थन कर रहे हैं।

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