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Monday, May 23, 2011

असुरक्षित पाक की परमाणु शक्ति को तत्काल नष्ट करे अमेरिका

आतंकी पाक की परमाणु शक्ति को तत्काल नष्ट करे अमेरिका
-कराची नौ सेनिक अड्डे पर हुए आतंकी हमले ने साबित किया कि पाक के परमाणु हथियार भी असुरक्षित हैं

रविवार 22 मई को तालिबानी आतंकियों द्वारा पाकिस्तान व अमेरिका द्वारा अपने आका ओसमा बिन लादेन की हत्या के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उसका बदला लेने के लिए पाकिस्तान के तटीय शहर कराची स्थित नौसेना के मेहरान हवाई ठिकाने पर विनाशकारी हमला किया। इस हमले से न केवल पाकिस्तानी हुक्मरान अपितु अमेरिका सहित भारतीय सुरक्षा ऐजेन्सियां सहम सी गयी।इस हमले से एक बात साफ हो गयी कि पाकिस्तान के परमाणु अस्त्र अब सुरक्षित नहीं हैं उन पर कभी भी आतंकी कब्जा कर सकते है। इसलिए अमेरिका जिसने पाकिस्तान को आणविक अस्त्रों से सुसज्जित व विश्व को तबाह करने वाला आतंकी देश बनाया, उसका अब सर्वोच्च दायित्व बनता है कि वह अविलम्ब पाकिस्तानी परमाणु अस्त्रों को कब्जा कर लादेन की तरह तबाह कर दे। यही अमेरिका के पाक को विश्व के लिए सबसे बड़ा खतरनाक देश बनाने की अक्षम्य भूल की प्रायश्चित होगा। लादेन की हत्या के बाद जिस प्रकार से लोगों को यह भ्रम हो गया था कि अमेरिका ने आतंकवाद की कमर तोड़ दी परन्तु आतंकियों ने पाकिस्तान की सेना पर उसके अड्डे पर ही हमला करके अपने मंसूबों व ताकत को जग जाहिर कर दिया कि अब भी वे कमजोर नहीं है। हालांकि इस आतंकी हमले पर कई घण्टों की मुठभेड़ के बाद काबू पा लिया है। इस हमले में सेना के कम से कम 12 जवान मारे गए, जबकि हमलावरों ने चीनी सैन्य कर्मियों सहित कुछ लोगों को बंधक बना लिया था।
पाकिस्तानी तालिबान ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए इसे अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन की मौत का इंतकाम करार दिया है।
इस हमले के बाद अमेरिका सहित विश्व की सुरक्षा के लिए एक ही विकल्प शेष रह जाता है कि अमेरिका अपने प्यादे पाकिस्तान के तमाम परमाणु अस्त्रों को यथाशीघ्र ही कब्जे में लेने के लिए लादेन पर किये जैसे ही हमला करे। क्योंकि लादेन की तरह ही पाकिस्तान को भी अमेरिका की कृपा व सहयोग से ही आज विश्व शांति के लिए खतरा बन गया है। अपने इन कुकृत्यों के लिए विश्व जनसमुदाय से माफी मांगते हुए अमेरिका को प्रायश्चित करने के लिए तत्काल पाकिस्तानी परमाणु अड्डों को तबाह कर परमाणु अस्त्रों को आतंकी हाथों में पंहुचने के लिए लादेन पर किये गये छापामार हमला करना चाहिए। इसमें जरा सी भी अमेरिका ने देर लगायी तो यह अमेरिका के साथ साथ विश्व शांति के लिए भी खतरा हो सकता है।
इस प्रकरण पर भारत सहित विश्व के आतंकवादी गतिविधियों पर गहरी नजर रखने वाले सभी समीक्षक बार बार इस बात को दोहरा रहे थे कि अमेरिका के शह पर ही न केवल लादेन अपितु उसका अलकायदा व पाक भी विश्व की शांति के लिए एक गंभीर खतरा बन गया है। इसके साथ साथ अमेरिका ने विश्व में अपना परचम फहराने के लिए व रूस व चीन तथा भारत पर अंकुश लगाने के लिए पाकिस्तान को अपना जो अंध समर्थन दिया और उसे रूस के खिलाफ अफगानिस्तान व भारत के खिलाफ दशकों तक संरक्षित व मजबूत बनाता रहा आज उसी का परिणाम है कि पाकिस्तान अमेरिका की सुरक्षा के लिए ही नहीं अपितु पूरे विश्व की सुरक्षा के लिए लादेन व अलकायदा से भी भयंकर आतंकी बन गया है। लादेन व अलकायदा का तो कोई एक ठोर ठिकाना नहीं था परन्तु पाकिस्तान तो एक राष्ट्र की तरह आज पूरे विश्व के अमन चैन पर ग्रहण लगाने वाला आतंकी राष्ट्र ही बन गया है।
वहां पर अमेरिका के अंध संरक्षण में ऐसा कठरपंथी समाज व जमात तैयार हो गयी है जो अब किसी भी तरह अमेरिका सहित किसी के अंकुश मानने के लिए तैयार नहीं हे। वह पूरे विश्व में इस्लाम का परचम फेहराने के लिए समर्पित आतंकियों की फेक्टरी ही बन गयी है। ऐसे में चाहे पाक में सेना हो या राजनैतिक दल, सामाजिक संगठन हो या धार्मिक संगठन, विधालय हो या अन्य खेल इत्यादि संगठनों का भी एक प्रकार से आतंकीकरण हो गया है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण अमेरिका के सम्मुख तक सामने आया जब अमेरिका को मालुम हुआ कि जिस लादेन को वह पूरे विश्व में तलाश रहा है वह लादेन कहीं नहीं अपितु उसके आस्तीन के सांप साबित हो चूके उसके मित्र पाक ने ही अपनी मिलेटरी के संरक्षण में सुरक्षित पनाह दे रखी है।
अब जब लादेन मारा गया। तो अमेरिकियों की आंखें खुली या खुलने का ढोंग कर रहा है। उसके बाद जिस प्रकार से पाक व अमेरिका में लादेन को आतंकी बनाने व अलकायदा को विश्व का सबसे खतरनाक आतंकी जमात बनाने के सम्बंध में आरोप एक दूसरे पर लगा रहे है। परन्तु इस दृष्टि से साफ है कि लादेन के साथ साथ अलकायदा को आतंकी संगठन बनाने में जहां अमेरिका का ही एक मात्र हाथ है, उसने सीधे साधे मुस्लिमों की धार्मिक भावनाओं को भड़का कर उसे रूस के खिलाफ अपने स्वार्थों के लिए भड़काया। इसके साथ ही उसने पाकिस्तान को भी उसकी भारत विरोधी भावनाओं को हवा व संरक्षण दे कर भड़काने का काम किया। अमेरिका ने न केवल लादेन व अलकायदा के साथ पाकिस्तान को भी अपने निहित स्वार्थो के खातिर आतंक की गर्त में धकेल कर भ्रष्मासुर बनाया। आज जब यह भ्रष्मासुर खुद अमेरिका को ही ग्रसने के लिए मुंह खोल रहा है तो तब अमेरिका को लगा कि उससे भूल होगयी।
लादेन व अलकायदा ने देखा कि जिस अमेरिका ने मुस्लिमों का हमदर्द बन कर अफगानिस्तान में काबिज रूस को भगाने के लिए उनको जंग की आग में झोंका था वह जंग फतह करने के बाद अफगानिस्तान में काबिज उसी ढंग से होना चाह रहा है जिस प्रकार से रूस अपने प्यादों के सहयोग से अफगानिस्तान में काबिज होना चाह रहा था। ऐसे में अमेरिका के खिलाफ उसके अपने ही बनाये गये भ्रष्मासुर लादेन व अलकायदा आदि आतंकी जमात हो गयी। जिन लोगों को वह रूस के साथ जंग करते समय महान बहादूर बताता था उन्हीं को अमेरिका ने अपनी कलई खुलते देख कर आतंकी बताना शुरू कर दिया। यही नहीं पाक को भी अमेरिका ने पूरी तरह से अपना गुलाम बना रखा है। वहां पर वह कभी भी लोकतंत्र स्थापित नहीं होने देता। उसने अपने प्यादों को तानाशाह व लोकशाही के नाम पर यहां पर आसीन कर वहां अमेरिका के हितों का अड्डा ही बनाया। ऐसे में अमेरिका के खिलाफ पाकिस्तान की आम अवाम में गुस्सा होना जाहिर हे। पाकिस्तानी अवाम को जब यह दिखाई देता कि उनके मूल देश भारत में विकास व लोकशाही का परचम फहरा रहा है व उनके देश में लूटशाही व तानाशाही का ही राज चल रहा है। इससे लोगों की नजरों में अमेरिका का असली चेहरा सामने आ गया। ऐसे में पूरे पाकिस्तान की आम अवाम में अमेरिका के प्रति गुस्सा दिन प्रति दिन बढ़ता ही जा रहा है। अमेरिका के शह पर ही पाकिस्तान ने भारत को तबाह करने के उद्देश्य से परमाणु अस्त्र बनाये हुए है। परन्तु आज जब अमेरिका को लग रहा है कि अब पाकिस्तान उसके लिए खतरा बन गया है तो वह भारत के कंधे में बंदुक रख कर पाक के साथ उसको भीड़ा कर दोनों मुल्कों को तबाह कर अपना हित साधना चाहता है।
जो भी हो वह किसी भी कीमत पर मजबूत भारत को नहीं देख सकता। क्योंकि मजबूत भारत उसके सम्राज्य के एकाधिकार को खुली चुनौती दे सकता है। इसी कारण अमेरिका वक्त आने पर भारत व पाक को भीड़ा कर दोनों को तबाह करना चाहता है। दोनों को कमजोर करना चाहता है। इसके अलावा अमेरिका को एक और डर सता रहा है कि पाकिस्तान के परमाणु हथियार कहीं भूल भटके किसी तरह अगर आतंकी जमातों के हाथ लग गये तो वे अमेरिका को इन परमाणु बमों से तबाह कर सकते है। इसी दुविधा व आशंका से भयभीत हो कर अमेरिका में इन दिनों यह जनमत बन रहा है कि हर हालत में पाकिस्तान के परमाणु अस्तों को ठीक लादेन पर किये गये हमले की तरह ही हमला कर नष्ट या कब्जे में ले कर पाकिस्तान को परमाणु अस्त्र से मुक्त किया जाय। उसकी परमाणु क्षमता को कुंद किया जाय।
इसी आशंका को भांपते हुए पाक ने भी अपनी सुरक्षा की तैयारी के लिए चीन का भी सहयोग मांगा है। हालांकि चीन भी किसी भी कीमत पर अमेरिका के जंग में टांग नहीं अडायेगा। क्योंकि उसे मालुम है कि देर न सबेर पाकिस्तान के आतंकी उसके लिए भी सरदर्द बन जायेंगे।
इसके अलावा अमेरिका को इस बात की भी आशंका है कि पूरे विश्व के मुसलमान उसके खिलाफ होने लगे है। परन्तु उसके सैन्य दृष्टि से कोई भी विरोध करने का साहस तक नहीं जुटा पा रहा है। जिस प्रकार से लादेन के कत्ल को पूरे इस्लामी जगत में शहादत माना जा रहा है। जिस प्रकार से पाकिस्तान ही नहीं पूरे अरब जगत के अलावा भारत के श्रीनगर क्षेत्र में बड़ी संख्या में मुस्लिमों ने प्रदर्शन किया। लादेन की मौत पर विशेष प्रार्थना व प्रदर्शन किया उससे साफ हो गया है कि आने वाले समय में लादेन विश्व मुस्लिम जगत के लिए एक बडे शहीद का दर्जा अमेरिका ने दे ही दिया है।
ऐसी स्थिति में अब अमेरिका के पास एक ही रास्ता बच गया है कि वह अपनी व विश्व की रक्षा के लिए अविलम्ब पाकिस्तान के परमाणु अड्डों को तबाह कर दे। नहीं तो आने वाले समय में ये ही अस्त्र अमेरिका सहित पूरे विश्व की शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बन जायेगा।
आज जरूरत है अमेरिकी नेतृत्व को अपनी पुरानी भूलों को सुधारने की। विश्व जनमत से अपने पापों के लिए माफी मांगने की। विश्व की शांति पर ग्रहण लगाने के अपने कृत्य का प्रायश्चित कर अमेरिका केवल पाक पर तत्काल हमला कर उसके परमाणु अस्तों को लादेन की तरह शिकंजे में लेने की। यही अमेरिका के लिए सबसे बड़ी विश्व सेवा होगी। शेष श्री कृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्रीकृष्णाय् नमो।

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