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Friday, May 6, 2011

जब सोनिया को दिलाया ताज व भाजपा को फंसाया मक्कर में काला बाबा ने

जब काला बाबा के मक्कर में फंसी भाजपा,
जब सोनिया को दिलाया ताज व भाजपा को फंसाया मक्कर में काला बाबा ने
महान रहस्ममय शक्तियों के स्वामी काला बाबा
जनविरोधी नेताओं के साक्षात काल थे कालाबाबा
इतिहास की दिशा बदलने की ताकत रखने वाले काला बाबा को समझ नहीं पायी दुनिया

‘340 सांसदों के समर्थन से मैं देश में सोनिया गांधी का राज कराऊंगा’ जेसे ही रहस्यमय शक्तियों के महान चमत्कारी ‘काला बाबा’ ने 13 वीं लोकसभा चुनाव से एक साल पहले जब मध्य प्रदेश सहित चार राज्यों की विधानसभा चुनाव में भाजपा का परचम फेहराने की खबर पर तत्काल प्रतिक्रिया प्रकट करते हुए कहा ‘देवी अब फंसे भागती जनता पार्टी वाले मेरे मक्कर में (बाबा भाजपा को भागती जनता पार्टी ही कहते थे)। काल का चक्कर चलता है और काला का चलता है मक्कर। काल के चक्कर से तो कोई बच भी सकता है परन्तु काला के मक्कर से कोई नहीं बच सकता। अब मैं अपने मक्कर के चक्कर में भाजपा को फंसा कर छह माह पहले ही मध्यावति चुनाव कराऊंगा और 340 सांसदों के बहुमत से देश में सोनिया गांधी का राज चलाऊंगा।’ बाबा यही नहीं रूके उन्होंने अपनी रो में कहा देवी मैं अब किसी भी कीमत पर कांग्रेस से सपा व बसपा का चुनावी समझोता नहीं होने दूंगा।
तो मुझे हंसी आ गयी। क्योंकि उस समय देश में चारों तरफ भाजपा का ही परचम लहरा रहा था। उसी समय मध्य प्रदेश सहित चार राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने ही कांग्रेस को पराजित करके अपना डंका ही बजा दिया था। ऐसे समय में 340 सांसदों के समर्थन से सोनिया जी का शासन देश में चलाने की घोषणा करना एक प्रकार से मेरे लिए ही नहीं आम राजनीति के जानकारों के लिए भी मजाक से कम नहीं था। परन्तु मुझे काला बाबा पर उनके चमत्कारों को देख कर विश्वास था। बाबा की इस युगान्तकारी भविष्यवाणी के कई साक्षी रहे। इनमें वर्तमान में संसद में मुख्य चिकित्साधिकारी व करीबी भक्तों में अग्रणी डा. जयप्रकाश, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा दिल्ली के कनाट प्लेस में स्थापित संस्था ‘बाल सहयोग’ के तत्कालीन सचिव डा शर्मा, कांग्रेस सेवा दल के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उमेद सिंह राठी सहित देश के कई वरिष्ठ राजनेता इस घोषणा के राजदार थे। मैने उसी समय प्यारा उत्तराखण्ड साप्ताहिक समाचार पत्र में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया। मैने समझने में जरा भूल की कि सोनिया 340 सांसदों के समर्थन से प्रधानमंत्री बनेगी। मैने बाबा की भविष्यवाणी को अक्षरशः प्रकाशित किया था। उस भविष्यवाणी की खबर पर कोई विश्वास ही नहीं मान रहा था। कांग्रेस मुख्यालय में कांग्रेसी नेता भी इस खबर को मजाक समझ रहे थे। परन्तु जैसे ही वाजपेयी प्रधानमंत्री वाले एनडीए सरकार ने छह माह पहले ही लोकसभा मध्यावति चुनाव की घोषणा की तो मुझे लगने लगा कि काला बाबा की भविष्यवाणी सही साबित होने की दिशा में बढ़ रही है। उस समय मेने कई बार इस बारे में समाचार प्रकाशित किया तो इसका असर यह हुआ कि सोनिया गांधी के निजी सहायक माधवन भी दिल्ली के सुपर बाजार स्थित बाल सहयोग में जहां काला बाबा रहते थे वहां उनसे मिलने गये। परन्तु जिस प्रकार कुरू सभा में भगवान श्री कृष्ण को नहीं पहचान पाये थे, उसी प्रकार सोनिया ही नहीं उनके कोई दरवारी भी काला बाबा को नहीं पहचान पाये। हालांकि पुराने दरवारी जिनमें धवन थे वे इतना जानते थे कि काला बाबा इंदिरा गांधी से मिलते रहते थे। परन्तु उनको भी काला बाबा की रहस्यमय शक्तियों का शायद ही भान हो। इसके अलावा अधिकांश नेता काला बाबा को काल ही मान कर उनकी भृकुटी से भयभीत रहते थे। काला बाबा के परमकृपा से उप्र के मुख्यमंत्री पद पर आसीन रहे हेमवती नन्दन बहुगुणा जी की सुपुत्री रीता बहुगुणा जो उन दिनों 24 अकबर रोड़ कांग्रेस मुख्यालय में अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की अध्यक्षा के पद पर आसीन थी, वह भी काला बाबा को ढूढने गयी परन्तु बाबा उनको नहीं मिले। परन्तु उनको भी शायद ही उनकी रहस्यमय शक्तियों का भान हो। शायद रीता बहुगुणा, बाबा को बहुगुणा जी का मात्र समर्थक समझती थी। परन्तु बाबा तो बहुत ही रहस्यमय थे।
उनकी भविष्यवाणी अक्षरशः 2004 में सम्पन्न हुए लोकसभा चुनाव परिणाम से जब मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने व सोनिया गांधी यूपीए की चियरपरसन बनी तो तब साकार हुआ। इसी लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा की नेत्री सुषमा स्वराज इत्यादि भाजपा को दो तिहाई बहुमत की दहाडें मार रही थी। कांग्रेस का समझोता लाख चाहने के बाबजूद सपा-बसपा से नहीं हो पाया। भले ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बने हो परन्तु राज देश में आज भी सोनिया गांधी का ही चल रहा है। बाबा की एक नहीं दर्जनों भविष्यवाणी का मैं साक्षी रहा हूॅ। उप्र के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष जगदम्बिका पाल व हरियाणा से सांसद के चुनाव जीते शर्मा सहित कितने ही नेताओं को मैने अपनी आंखों से देखा। पर बाबा सदा कहते थे कि आज राजनीति भी धर्म, शिक्षा की तरह व्यापार बना दिया है। नेताओं पर कटाक्ष करते हुए वे सामने कहते थे क्यों घोटाला करने के लिए राजनीति में आ रहे हो। वो नेताओं को देखते ही कहते थे जय हो घोटाले वालों की। बाबा की सहजता व रहस्यमयता को आज याद करता हॅू तो उनको देख कर मुझे रामकृष्ण परमंहंस व सांई बाबा की याद आती है। बहुत ही सहज व रहस्यमय शक्तियों के स्वामी थे। वे कहते थे कि बिना मेरी इजाजत के हवा, पानी भी मेरे पास फटक नहीं सकते। मैं प्रकृति से डंडा दे कर काम कराना जानता हॅू। दुनिया में तमाम बाबा, पादरी, मोलवी, तांत्रिकोे ने दुनिया को पाखण्ड में फंसा कर इनको जड़ बना दिया है। वे अंधविश्वास, पाखंड व षोषण के सदा खिलाफ रहते थे। वे कहते थे कि पत्थर को पूज पूज कर इनके दिमाग भी पत्थर बन गये। इन्हें इंसानों से कोई दया धर्म निभाना नहीं आता।
आज भाजपा की दुर्दशा को देख कर मुझे याद आते हैं काला बाबा। मुझे ऐसा लगता है कि बाबा कहते हैं कि देवी देखा भाजपा आज भी मेरे मक्कर में फंसी है। बेटे मेरा नाम ही काफी है इन समाज विरोधियों को मजा चखाने के लिए। आज बाबा के वह शब्द मेरे कानों में बार बार गुंजता है कि देवी कृष्ण का अर्थ होता है काला। मैं ही काल हॅू और कृष्ण हूॅ। आज भले ही कांग्रेसी नेतृत्व इस महान युगान्तकारी काला बाबा से अनजान हो परन्तु भाजपा की जो दुर्दशा हो रही है मुझे विश्वास है कि उनका मक्कर आज भी भाजपा को पतन के गर्त में धकेल रहा है। भाजपा नेतृत्व भी अपने पतन का कारण नहीं जान पाया। बाबा कहते भी थे देवी काल कभी डण्डा ले कर किसी को मारने नहीं जाता वह कारण बनाता है। मै तो काला बाबा हूॅ, सारा काम प्रकृति को डण्डा दे कर कराता हॅू। काला बाबा ने अपनी इसी रहस्यमय ताकत से नरसिंह राव द्वारा सत्ता मद में अमेठी के समीप नरोरा सम्मेलन कराने के बहाने गांधी परिवार को अपनी ताकत दिखाने की प्रवृति को बाबा ने आंधी तूफान से पूरा सम्मेलन स्थल तबाह कर होने ही नहीं दिया था। ऐसा ही कार्य उन्होंने लखनऊ में वाजपेयी के चुनाव में अपनी भृकुटी तान कर की थी। बाबा भले ही आज अपने स्थूल देह में न हो परन्तु वे कहते थे देवी मैं तो सदा रहूूंगा तुम मुझे जहां भी पुकारोगे मैं सदा साथ रहूॅंगा। काला बाबा के बारे में यह महसूर था साफ आसमान में जब चाहे भारी वर्षा करा देते थे और जब चाहे भारी वर्षा को रोक देते थे। वे किसी निरापराध का शोषण के इतने खिलाफ थे। वे राजनीति को लूटेरों व अंग्रेजों से बदतर लूटेरां बताते थे। वे कहते थे ये आजादी नहीं हरामजादी हो गयी। वे भाजपा को धर्म व जाति की राजनीति करने के बहुत खिलाफ थे। इसी लिए उन्होंने बाबरी मस्जिद प्रकरण को सदा के लिए समाप्त करने का निर्णय भी लिया । वे कहते थे बीजेपी को मंदिर से कोई लेना देना नहीं उनको तो राजनीति करनी है, इसी लिए उन्होंने कहा न रहेगा बांस व न रहेगी बांसुरी। भाजपा की वर्तमान दुर्दशा को देख कर मुझे काला बाबा की याद बरबस आती है। उन्हीं की तर्ज में उत्तराखण्ड से इस लोकसभा चुनाव में भाजपा की जातिवादी अलोकशाही का सफाया करने में मैं समर्पित रहा। कांग्रेस भी भाजपा की तरह बदतर है परन्तु उसका मुखोटा पूरी तरह जनता के सामने बेनकाब है परन्तु भाजपा ने जनता के विश्वास के साथ धोखा दिया। जब तक भाजपा अपनी तरफ से प्रायश्चित नहीं करेगा उसको मुक्ति नहीं मिलेगी। यह बाबा का मक्कर है। यह देश की जनविश्वास के साथ किये गये छल का श्राप भी है। उन्होंने जातिवादी व क्षेत्रवादी ताकतों को देश के लिए खतरा बताते थे। मानवता के लिए शोषक बताते थे। इसी कारण वे सपा व बसपा से कांग्रेस का समझोता नहीं होने देते थे। भले ही कांग्रेसी व सपा-बसपा नेतृत्व लाख कोशिश करते रहे। पर क्या मजाल बाबा के मक्कर से ये तीनों भी उबर पाये। बाबा कांग्रेस के पथभ्रष्ट मानते परन्तु फिर भी बाबा वर्तमान में कांग्रेस को विकल्प न मिलने तक सहारा देश हित में देते रहते। उनको इंदिरा जी भाई मानती थी। परन्तु वे सदा जनहित के कार्यो के लिए इंदिरा जी को प्रेरित करते रहे। मुझे लगता है कि इलाहाबाद के कोरांव तहसील के सुहास गांव के मूल निवासी काला बाबा आज भी देश व मानवता की रक्षा के लिए मेरे से कार्य कराने के लिए तत्पर हैं।उनकी पावन यादों को अपने जीवन में संजोये हुए मैं आज इस कुरूक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण की अपार कृपा व काला बाबा के आर्शीवाद से जनविरोधियों को परास्त व बेनकाब करने के लिए समर्पित हॅू। यही मेरी सबसे बड़ी ताकत व पूंजी है। शेष श्री कृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्रीकृष्णाय् नमो।

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