Pages

Monday, May 2, 2011

फर्जी मुठभेड़ में मारा गया ओसमा


अमेरिका की तरह भारत भी करे पाक में आतंकियों का सफाया
पाक हुक्मरानों ने अमेरिका से किया लादेन का सौदा!
फर्जी मुठभेड़ में मारा गया ओसमा!

विश्व के स्वयंभू थानेदार बने अमेरिका सहित पूरे विश्व को अपनी दुर्दान्त आतंकी गतिविधियों से आक्रांत करने वाले विश्व के सबसे खुंखार आतंकी ओसमा बिन लादेन को पाकिस्तान में घुस कर मारने की खबर से जहां पूरे विश्व समुदाय ने राहत की सांस ली। वहीं पाक सहित विश्व के रक्षा समीक्षकों को इस बात पर यकीन नहीं आ रहा है कि ओसमा बिन लादेन इस तरह से बिना अपने विरोधियों का कड़ा मुकाबला करने के बजाय एक आम आदमी की तरह मारा गया। इस प्रकरण पर आशंका जतायी जा रही है कि पाक के हुक्मरानों को अमेरिका ने अपने प्रलोभनों में रिझाने में सफल हुए और लादेन पाकिस्तानी हुक्मरानों के विश्वासघात से ही मारा गया। यह भी संभव है कि वह कहीं और पकड़ा गया हो और बाद में यहां पर लाया गया। कई बार अमेरिकी सेना से मुठभेड़ के बाद चकमा दे कर भागने में सफल होने वाला लादेन को इतनी आसानी से घेर कर मारना संभव नहीं था। जिस खून से सने लादेन की तस्वीर को दिखाई जा रही है, वह तस्वीर को जियो टीबी के इस्लामाबाद व्यूरो के चीफ राणा जावेद भी फर्जी मानते है। उनके अनुसार यह फोटो इंटरनेट पर 2009 से था। अगर अमेरिकी सुत्रों की इस बात पर यकीन करें की लादेन गत 5 सालों से यहीं इस घर में था तो वह इस घर को किले के रूप में तब्दील करता। अलकायदा का प्रमुख इतनी असहाय स्थिति में असुरक्षित रहने की मुर्खता कम से कम लादेन जैसे खुंखार आतंकी कभी नहीं करेगा। वह भी ऐसे में जब अमेरिका हवाई व ड्रोन हमले करके आतंकी अड़डों को तबाह कर रहा हो तो लादेन का इस घर में इस तरह से रहना किसी भी आदमी के गले नहीं उतरेगा। यही नहीं पाक सेना के महत्वपूर्ण क्षेत्र में एक नहीं चार अमेरिकी होलीकप्टरों का मिशन उसकी जानकारी व सहयोग के बिना संभव ही नहीं है। इसके साथ इस बात की भी अटकलें लगायी जा रही है कि ओसमा को पाक में रखने पर अमेरिका की भी मूक सहमति हो सकती हे। क्योंकि तोरा-तोरा की पहाडियों में विशेष मिशन से कुछ लोगों को सुरक्षित पाक में कहीं शरण भी दी गयी थी। पाकिस्तान तो एक प्रकार से अमेरिका का ही उपेनिवेश ही है। अमेरिका का पाक सेना, पाक खुफिया ऐजेन्सी व यहां के तमाम धार्मिक, कट्टरपंथी संगठनों व राजनैतिक दलों पर गहरा प्रभाव है। इसी माह अप्रैल में पाक की कुख्यात खुफिया ऐजेन्सी आईएस आई के प्रमुखजनरल शुजा पाशा की अमेरिकी यात्रा तथा पाक जनरल कयानी की अमेरिकी परस्ती के तारों को जोड़ कर इस घटना को जोड़ा जाय तो ओसमा की खात्मे की तार कहीं न कहीं अमेरिका द्वारा पाक को मिलने वाली 1.5 अरब डालर आर्थिक व सैन्य सहायता पर जा कर टिक जाती है। रक्षा विशेषज्ञों को ही नहीं आतंकी संगठनों को भी पाक द्वारा अमेरिका से लादेन का सौदा करने का यकीन है। इसी कारण पाकिस्तानी तानिबान सहित तमाम आतंकी संगठनों ने अब अमेरिका के बजाय अपना नम्बर एक दूश्मन पाक के हुक्मरान व सेना अधिकारी घोषित कर लिये है। आतंकियों ने अमेरिका को अब पहला नहीं दूसरा नम्बर दूश्मन मानते हुए पाक को विश्वासघात का सबक सिखाने का मन बना लिया है।
वहीं अमेरिका द्वारा पाक में घुस कर लादेन को मारने की खबर के बाद, आम भारतीय भी भारत सरकार से अमेरिका की तरह पाक में घुसकर आतंकियों के सफाये के लिए निरंतर दवाब बना रहे है। जैहादी आतंकी हमलों से त्रस्त भारत की सवा अरब जनता अपने भाग्य को यह कह कर कोस रहे थे कि काश भारतीय हुक्मरान भी अमेरिकी हुक्मरानों की तरह अपने जांबाज सैनिकों को पाक में छुपे हुए भारत की अमन शांति को तबाह कर रहे आतंकियों को सफाया करने की इजाजत देते। परन्तु देशवासी इस बात से हैरान है कि हमारे देश के हुक्मरानों के दिलो दिमाग में कहीं अमेरिकी हुक्मर ानों की तरह देश के स्वाभिमान व देश की अखण्डता की रक्षा करने के लिए समर्पित होने का भाव क्यों न हीं है। भारत के हुक्मरानों को देश की जनता का भान हे व नहीं देश के स्वाभिमान का। देश की आम जनता का जहां बेलगाम मंहगाई, अमेरिका व पाक द्वारा पोषित आतंक से तथा भ्रष्टाचार से जीना ही हराम है वहीं देश के हुक्मरान अमेरिकापरस्ती व सत्तामद में ऐसे धृतराष्ट्र बने हुए हैं कि उनको देश की आम जनता की सुध लेने की फुर्सत ही नहीं है। भारत में लोकतंत्र के सर्वोच्च संस्थान संसद पर हमला होने के बाबजूद भारत के हुक्मरान नपुंसकों की तरह भारत के स्वाभिमान को रौंदने वाले पाक के सम्मुख दोस्ती के तराने ही गाने में मस्त है। वहीं अमेरिका ने अपने देश के दो व्यवसायी भवनों पर हमले के बाद सात समुद्र पार कर न केवल अफगानिस्तान पर हमला कर कब्जा किया अपितु इस हमले के मुख्य दोषी ओसमा बिन लादेन को पाक में घुस कर मार डाला। इसके लिए न तो वह पाकिस्तान की सरकार के सम्मुख, नपुंसक भारतीय हुक्मरानों की तरह सबूतों के दस्तावेजों को घुमाता रहा व नहीं उसने पाक से दोषियों को दण्डित करने की गुहार लगायी। अपितु अमेरिका ने एक स्वाभिमानी देश की तरह अपने गुनाहगारों को सीधे उसकी मांद में जा कर मौत के घाट ही उतार कर अपने स्वाभिमान को रौंदने का स्वयं ही दण्ड दे दिया। यही नहीं उसने अलकायदा सरगना ओसामा बिन लादेन के शव को कब्जे में लेकर समुद्र में दफन कर दिया है।
अमेरिका ने लादेन को 11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर हुए सबसे भीषण आतंकी हमले का मुख्य अपराधी माना।ओसमा के मारे जाने की खबर को स्वयं अमेरिका के राष्ट्रपति ने अपने निवास में प्रेसवार्ता करके ऐलान किया। लादेन के सफाये करने के अभियान का ब्यौरा देते हुए ओबामा ने कहा कि पिछले हफ्ते उन्होंने जोर देकर कहा था कि ओसामा बिन लादेन को न्याय के कठघरे में लाने के लिए कार्रवाई करने और अभियान चलाने के लिए हमारे पास पर्याप्त खुफिया जानकारी है।उन्होंने कहा कि 1 मई को, मेरे निर्देश पर, अमेरिका ने पाकिस्तान में अबोटाबाद के उस परिसर को लक्ष्य कर अभियान चलाया। गौरतलब है कि एबटाबाद इस्लामाबाद के 60 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। यह भारतीय श्रीनगर से काफी समीप तथा नियंत्रण रेखा से महज 100 किमी पश्चिम में स्थित है।
सगर्व राष्ट्रपति ओबामा ने व्कहा कि मैं अमेरिकी लोगों और विश्व को बता सकता हूं कि अमेरिका ने एक अभियान चलाया जिसमें हजारों निर्दोष पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की मौत का जिम्मेदार अलकायदा नेता और आतंकवादी ओसामा बिन लादेन मारा गया।
जैसे ही लादेन के मारे जाने की खबर अमेरिकियों को मिली हजारों की संख्या में अमेरिकियों ने वाशिंगटन में व्हाइट हाउस के बाहर और न्यूयॉर्क में एक दूसरे को बधाईयां देने लगे। अमेरिका की जय हो के नारे लगाने लगे।
लादेन को अमेरिका की सेंट्रल इंटेलीजेंस एजेंसी (सीआईए) के एक विशेष अभियान में मारा गया। इससे पाकिस्तानी सरकार की हालत बहुत ही दयनीय हो गयी। जहां जनता में अंदर ही अंदर देश में अमेरिका को सैन्य कार्यवाही करने की इजाजत देने का आक्रोश है वहीं पाक हुक्मरान इस बात से भौचंक्के थे कि उनके द्वारा आतंकियों को संरक्षण देने की सारा खेल ही पूरी तरह बेनकाब हो गया। लादेन इस्लामाबाद से महज 60 किमी दूर एबटाबाद नामक जगह पर मारा गया। अमेरिकी 40 सदस्यीय कमांडो जिन्हें शील के नाम से जाना जाता है ने रात करीब 1 से 1.30 के बीच में कार्रवाई की। वह चार होलिकप्टर से इस इमारत मे 24 कमांडो के साथ उतरे। क्योंकि इसी इमारत में अपने कुछ खास लोगों के साथ वहां ओसमा रह रहा था। यह वही उत्तर-पश्चिमोत्तर पाकिस्तान का कबाइली क्षेत्र है, जहां उसके छिपे होने के बारे में पहले भी कायश लगाये जा रहे थे। कुल मिला कर अलकायदा के प्रमुख के सफाये से जहां लोगों ने चैन की सांस ली वहीं अब लोग अमेरिका की निरंकुशता से भी सहमें हुए है।
वर्ष 1957 में जन्मा लादेन सउदी अरब के सबसे धनी भवन निर्माता का बेटा पूरे संसार में जहां सबसे खुंखार आतंकी ही नहीं अपितु सबसे खौपनाक आतंकी संगठन अलकायदा का भी प्रमुख बन गया था। इसके निधन पर जहां पूरे विश्व ने चैन की सांस ली वहीं आम भारतीयों ने यह आहें भरी की काश भारतीय हुक्मरान भी अमेरिकी हुक्मरानों की इस कार्यवाही से सबक ले कर पाकिस्तान में शरण लिये हुए भारत को अपनी आतंकी गतिविधियों से तबाह करने वाले दहशतगर्दो का इसी प्रकार से सफाया का ठोस कदम उठाते। नहीं तो अटल व मनमोहन सिंह जेसे कमजोर हाथों में न तो घर सुरक्षित रहता है व नहीं देश। शेष श्री कृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्रीकृष्णाय् नमो।

No comments:

Post a Comment