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Tuesday, March 13, 2012

उत्तराखण्ड में भाजपा कांग्रेस के गुलाम नहीं अपितु ममता जैसे नेताओं की जरूरत

उत्तराखण्ड में भाजपा कांग्रेस के गुलाम नहीं अपितु ममता जैसे नेताओं की जरूरत
जिस प्रकार से उत्तराखण्ड के लोगों ने अपने विकास व सम्मान की रक्षा के लिए दशकों लम्बा संघर्ष करके तथा तमाम शहादतें दे कर भी पृथक उत्तराखण्ड राज्य का साकार किया था। उस राज्य को मात्र 12 सालों में भाजपा व कांग्रेस के तिवारी, खंडूडी व निशंक जैसे संकीर्ण  सत्तालोलुपु प्यादों के कुशासन से देश का सबसे भ्रष्टतम राज्य बना दिया। इनके 12 साल के कुशासन में न केवल प्रदेश की राजनैतिक शक्ति को जनसंख्या पर आधारित परिसीमन से जमीदोज करने का अक्षम्य अपराध किया, अपितु उत्तराखण्ड के आत्मसम्मान को रौंदने वाले मुजफरनगरकाण्ड के अभियुक्तों को भी एक प्रकार से शर्मनाक संरक्षण दिया। वहीं प्रदेश के आमूल विकास के प्रतिक गैरसैंण राजधानी बनाने के बजाय लूट खसोट व अपनी अयाशी के लिए लोकशाही की हत्या करके जबरन राजधानी देहरादून में थोप दी गयी। भाजपा कांग्रेस ने यहां के जनहितों के लिए समर्पित व अनुभवी साफ छवि के नेताओं के बजाय यहां पर जातिवाद व दिशाहीन पदलोलुपुओं को सत्तासीन करके प्रदेश में जातिवाद-क्षेत्रवाद तथा भ्रष्टाचार का अंधा कुशासन दिया। आज पूरा उत्तराखण्ड त्राही त्राही मचा रहा है। परन्तु क्या मजाल है यहां के नेता प्रदेश के हितों व अपने सम्मान की रक्षा के लिए बंगाल की शैरनी ममता बनर्जी की तरह बंगाल के स्वाभिमान की रक्षा के लिए इन दलों को लात मार कर अपना ही एक दल बनाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे है। प्रदेश के हितों व यहां की लोकशाही का किस बेशर्मी से कांग्रेस व भाजपा के आला कमान अपमान नित्यानन्द स्वामी, तिवारी, निंशक और अब विजय को मुख्यमंत्री बना कर रहे है।  यहां पर भाजपा व कांग्रेस के आला नेतृत्व को ठुकरा कर जो राजनैतिक विकल्प उत्तराखण्ड रक्षा के लिए देने का सराहनीय प्रयास किया, आज उसको मजबूत करने की जरूरत है। आज प्रदेश को ये दोनों दलों द्वारा रौंदे जा रहे उत्तराखण्ड की रक्षा के लिए यहां के राजनेता ममता बनर्जी के मार्ग का अनुसरण करके प्रदेश को भाजपा व कांग्रेस के चुंगुल से बचायें। 

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