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Tuesday, March 20, 2012

भाजपा व कांग्रेस की नहीं जरूरत है आज उत्तराखण्ड में क्षेत्रीय दल की


-भाजपा व कांग्रेस की नहीं जरूरत है आज उत्तराखण्ड में क्षेत्रीय दल की/
-मुर्दो से कब्रिस्तान सजते हैं बस्तियां आबाद नहीं होती
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आज उत्तराखण्ड में भाजपा व कांग्रेस जैसे दिशाहीन आला कमान व उनके संकीर्ण प्यादों द्वारा चलाये जाने वाले राजनैतिक दलों की जरूरत नहीं अपितु प्रदेश के हितों के लिए राजनीति करने वाले क्षेत्रीय राजनैतिक दल की है। उत्तराखण्ड के सत्तासीन नेताओं ने अपनी संकीर्णता और पदलोलुपता के कारण प्रदेश के मान सम्मान व संसाधनो पर ग्रहण लगा दिया है। संकीर्ण दलीय स्वार्थ में अंधे इन नेताओं को न तो प्रदेश के शहीदों की शहादत का भान है व नहीं प्रदेश के हक हकूकों व मान सम्मान की रक्षा का। आज प्रदेश को तिवारी, खण्डूडी व निशंक के बाद बहुगुणा जेसे नेताओं को ढोना पड़ रहा है। आज इनके कारण ही राज्य गठन के 12 साल बाद भी प्रदेश में मुजफरनगर काण्ड के अभियुक्तों को दण्डित करने की ईमानदारी से पहल तक नहीं की गयी। प्रदेश की स्थाई राजधानी गैरसैंण को स्थापित न करके देहरादून में स्थापित करने का शर्मनाक षडयंत्र किया गया। विश्व में ईमानदारी के लिए विख्यात उत्तराखण्ड आज राज्य गठन के 12 सालों में ही देश का सबसे भ्रष्टत्तम राज्य बन गया है। इन उत्तराखण्ड विरोधी हुक्मरानों के शर्मनाक मौन के कारण ही राज्य में जनसंख्या पर आधारित परिसीमन थोप दिया गया जबकि पूर्वोत्तर के राज्यों व झारखण्ड की जागरूक सरकारों ने इसके दंश से अपने प्रदेश को बचा दिया। इन कुशासको ने प्रदेश में हिमाचल की भांति प्रदेश के संसाधनों पर गिद्द दृष्टि जमाये हुए भू-जल व जंगल माफियाओं से बचाने का स्थाई कानून तक नहीं बनाया। यही नहीं प्रदेश के महत्वपूर्ण पदों पर भी उत्तराखण्ड की प्रतिभाओं के बजाय दिल्ली दरवार के मठाधीश बने बाहर के नेताओं के प्यादों को आसीन करने की शर्मनाक होड़ देखी गयी। इस समय मुख्यमंत्री के लिए कांग्रेस के अंदर का असंतोष प्रदेश के हित में है। जिस प्रकार से चंद दिल्ली दरवार के दलालों ने कांग्रेस पार्टी व उत्तराखण्ड के हितों को दरकिनारे करके अधिकांश विधायकों के विरोध के बाबजूद प्रदेश का मुख्यमंत्री के पद पर कांग्रेसी सांसद विजय बहुगुणा को बना दिया। उससे कांग्रेस के नेताओं में उमडे असंतोष से उत्तराखण्ड की जनता चाहती है कि कांग्रेस पार्टी टूट कर यहां पर क्षेत्रीय दल का गठन किया जाय, जो प्रदेश की जनता के इस अंध विश्वास को बदल सकें कि केवल राज कांग्रेस व भाजपा ही चला सकती है। प्रदेश में मजबूत क्षेत्रीय दल का होना यहां पर भाजपा व कांग्रेस द्वारा इन 12 सालों मे कुशासन से मचाई गयी तबाही से उबारने के नितांत आवश्यक है। इसके लिए वर्तमान में तमाम क्षेत्रीय दल इन दलों का चक्रव्यूह नहीं तोड़ पा रहे हैं, इस लिए अब समय की यही पुकार है कि यह क्षेत्रीय दल भाजपा या कांग्रेस के असंतुष्टों द्वारा ही गठन किया जाय। भाजपा के असंतुष्टो द्वारा बनाया गया क्षेत्रीय दल उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा तो 4 माह में अपना स्थान बना चूका है। परन्तु अब इस समय कांग्रेस के असंतुष्ट जो कद्दावर नेता हरीश रावत के नेतृत्व में पार्टी नेतृत्व द्वारा थोपे गये प्रदेश के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के खिलाफ निंतरतर सोनिया गांधी से उत्तराखण्ड के लिए न्याय की गुहार लगा रहे है। इस मुहिम में हरीश रावत के साथ डेढ़ दर्जन कांग्रेसी विधायकों का समर्थन बताया जा रहा है। वहीं मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार रहे डा. हरक सिंह रावत किसी भी कीमत पर विजय बहुगुणा सरकार में मंत्री बनने के लिए तैयार नहीं है। सरकार में मंत्री कोन बने या न बने परन्तु हमारी दिलचस्पी यही है कि जो भी सरकार उत्तराखण्ड की बने उसमें साफ छवि के जनहितों के लिए समर्पित नेता ही मंत्री हो। इसके साथ यही प्रयास रहेगा कि भाजपा व कांग्रेस के जनविरोधी सरकारों को यहां से उखाड़ने के लिए मजबूत क्षेत्रीय दल यहां पर स्थापित हो। इसी प्रयास में मैं कार्यरत हॅू। मेरी इच्छा है भाजपा व कांग्रेस के नेताओं में आपसी सत्तासंघर्ष बढ़े इनके अपने निहित स्वार्थ के द्वंद के कारण इनकी जनविरोधी सरकारें व दल धरासायी हो। क्योंकि मुझे इस बात का पूरा भान है कि क्षेत्रीय दल को यहां पर अपना अस्तित्व बनाने के लिए स्थानीय मुद्दों को वरियता देनी पडेगी। यहां की जनांकांक्षाओं को अपनी राजनीति का हथियार बनाना पडेगा। प्रदेश के हितों के बारे में भाजपा व कांग्रेस जैसे राष्ट्रीय दलों का एक पाई का भी रूझान नहीं है।
आज उत्तराखण्ड में जनहितों का गला घोंटने के इन राष्ट्रीय दलों के कुकृत्यों को देख कर मुझे इस चीज का भान हो गया कि इनके इसी जनविरोधी प्रवृति के कारण आज देश के अधिकांश राज्यों में इन दोनों दलों का एक प्रकार से सूर्यास्त ही हो रहा है। हालांकि यह प्रवृति राष्ट्र की एकता व अखण्डता के लिए काफी खतरनाक है। परन्तु जब तक इस प्रकार के जनविरोधी दल सत्तासीन रहेंगे तब तक देश की एकता अखण्डता व विकास के लिए दुश्मन देश नहीं अपितु ये दल ही सबसे बडे दुश्मन साबित हो रहे है। इसलिए कुछ समय के लिए जब तक कोई दिशावान राष्ट्रीय दल देश की राजनीति में मजबूती से स्थापित न हो तब तक देश में जनहितों के लिए समर्पित क्षेत्रीय दलों का उदय भी देश के हित में ही है। भले ही संघ सहित तमाम संगठन क्षेत्रीय दलों के बढ़ते प्रभाव से चिंतित हैं परन्तु भाजपा व कांग्रेस के मूलाधार ये संगठन ही आज राष्ट्रीय दलों के पतन के कारण है। आज इन दोनों दलों के मूलाधार संघ व गांधी परिवार की पकड़ जनता में कमजोर हो गयी है। इसी कारण इन दोनों के द्वारा संचालित भाजपा व कांग्रेस जैसे दलों में आज जननेताओं के बजाय कटोरी के प्यादों को वरियता मिल रही है। इसी कारण देश के हर प्रदेश से इनका जनांधार निरंतर सिकुड़ता ही जा रहा है। उत्तराखण्ड इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। इसी कारण  दोनों दलों का आला नेतृत्व जननेता भगतसिंह कोश्यारी  व हरीश रावत तथा सतपाल महाराज को नजरांदाज करके कभी निशंक व कभी बहुगुणा जेसे नेताओं को पदासीन कर देता है। भले ही आज डा हरक सिंह आज प्रदेश सरकार में सम्मलित होने के लिए तैयार नहीं है। वहीं उनको मनाने के प्रयास चल रहे हैं। जनता राष्ट्रीय दलों से इतनी परेशान है कि उनको डा हरक सिंह के दो टूक धिक्कार ही पसंद आ रही है।
आज उत्तराखण्ड की जनता की दिली इच्छा है उत्तराखण्ड विरोधी कांग्रेस व भाजपा के शिकंजे से मुक्त होने का।
क्योंकि भाजपा व कांग्रेस का दिशाहीन नेतृत्व कभी जनहितों के लिए समर्पित नेताओं के बजाय थेलीशाहों को ही अपनी संकीर्ण स्वार्थों की पूर्ति के लिए वरियता देगा। इन दलों का आला नेतृत्व जनहितों के लिए समर्पित जननेता के बजाय संकीर्ण जातिवादी व अपनी तिजोरी भरने वालों को देश व प्रदेश के मंत्री -मुख्यमंत्री सहित महत्वपूर्ण पदों पर आसीन करते है। इस कारण इन पदासीन मुख्यमंत्रियों का सारा समय अपने आकाओ की जी हजूरी व उनकी तिजोरियां भरने में ही निपट जाता है। प्रदेश की जनांकांक्षाओं को साकार करना तो रहा दूर इस दिशा में सोचने के लिए उनके पास वक्त ही नहीं होता है। इसी कारण आज उत्तराखण्ड की यह दुर्दशा हो रखी है। इसी कारण लोग समझ गये हैं कि जनहितों को साकार करने के लिए आज प्रदेश में भाजपा या कांग्रेस की नहीं अपितु क्षेत्रीय दलों की जरूरत प्रदेश को है।  जरूरत है जनता को इस दिशा में गंभीरता से सोच विचार करके केवल साफ छवि के राजनेताओं को चुनावी जंग में विजय बनाने की। अगर प्रदेश की जनता ऐसे नक्कारे भ्रष्ट राजनेताओं को चुनावी जंग में ही हराने का काम करती है तो प्रदेश का काफी भला होगा। इसलिए आज उत्तराखण्ड के सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों, पत्रकारों व साहित्यकारों से आशा करता हॅू कि वे प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए एक मजबूत क्षेत्रीय दल का गठन करें। शेष श्रीकृष्ण कृपा। हरि औम तत्सत्।श्रीकृष्णाय् नमो।

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