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Tuesday, March 27, 2012

सेना में चल रहे भ्रष्टाचार को बेनकाब करने पर सेना प्रमुख को कोटी कोटी नमन्


सेना प्रमुख को कोटी कोटी नमन्
-सेना में चल रहे भ्रष्टाचार को बेनकाब करने पर
नई दिल्ली (प्याउ)। देश में भ्रष्टाचार किस प्रकार से अपनी जडें मजबूती से यहां जमा चूके है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है देश की सेना के प्रमुख को भी भ्रष्टाचारी घूस का प्रलोभन देने से घबराते नहीं है।  इसका खुलाशा अगर जनरल सिंह स्वयं नहीं करते तो देश को शायद ही इस भयानक स्थिति का पता चलता।
जब स्वयं जनरल सिंह ने इसका खुलाशा किया कि रक्षा सोदा को मंजूर करने के लिए उसको सेना के एक अधिकारी ने ही 14 करोड़ की धूस देने का प्रलोभन दिया तो पूरा देश सन्न रह गया। उन्होंने बताया कि उन्होंने इसकी शिकायत देश के रक्षा मंत्री से लेकर रक्षा मंत्रालय से कर दी थी। परन्तु देाषियों पर कहीं कोई कार्यवाही नहीं हुई। जब जनरल सिंह ने इस को सार्वजनिक खुद कर दिया तो पूरे देश में इसकी जबरदस्त प्रतिक्रिया हुई। सरकार सकते में आ गयी। संसद के दोनों सदनों में कोहराम मच गया। अन्ततः रक्षा मंत्री ने इस काण्ड की सीबीआई द्वारा जांच करने की घोषणा की। सेना प्रमुख ने बताया कि उस व्यक्ति ने कहा कि यह यहां का दस्तूर है। पहले भी धुस सब लेते रहे व उनके बाद भी लेते रहेगे। देश को इस रहस्य से अवगत कराने के लिए जांबाज सेना प्रमुख जनरल सिंह का कोट कोटी नमन्। कम से कम उनके इस साहस व देश भक्तिपूर्ण काम से देश की सेनाओं में व्याप्त रिश्वत खोरी पर गलाम लगेगी। देश की सुरक्षा से हो रहे खिलवाड पर अंकुश लगेगा।
देश के ईमानदार अधिकारियो को भी किस प्रकार  नौकरशाह परेशान करते हैं इसका सबसे शर्मनाक उदाहरण है देश के सेना प्रमुख जनरल वी के सिंह को कदम कदम पर रक्षा मंत्रालय के नौकरशाहों द्वारा अपमानित करना। उम्र के विवाद के बाद लगता था कि जनरल से अब कोई विवाद रक्षा मंत्रालय का नहीं होगा। परन्तु जिस प्रकार से असम रायफल्स व उसके बाद जनरल सिंह द्वारा उनको घूस देने की कोशिश करके अपमानित करने का खुलाशा किया तो पूरा देश स्तब्ध ही रह गया।  जनरल सिंह द्वारा नौकरशाही द्वारा किये जाने वाले अपमानजनक व्यवहार को उजागर करने के बाद पूरे देश में नौकरशाही की कड़ी भत्र्सना की जा रही है।  एक विवाद असम रायफल्स का नए महानिदेशक की तैनातगी को ले कर छिड़ गया है। वहीं सेना प्रमुख को रिश्वत देने की घटना इससे पूरा देश स्तब्ध है।
वही दूसरी तरफ असम राइफल्स गृह मंत्रालय के तहत आता है। सुत्रों के अनुसार मंत्रालय ने गृह मंत्रालय से कहा कि वह सेना प्रमुख के प्रस्ताव पर विचार नहीं करे क्योंकि इसमें उसकी अथवा किसी अन्य किसी सक्षम संस्था की अनुमति नहीं ली गई है। रक्षा मंत्रालय ने अब सेना से कहा है कि वह नियुक्ति के लिए अधिकारियों के नाम के नए पैनल का प्रस्ताव रखे, लेकिन इस संबंध में उसकी ओर से भेजे गए पत्र का कोई जवाब नहीं आया है। इससे पहले सेना ने लेफ्टिनेंट जनरल चैधरी और लेफ्टिनेंट जनरल जेपी नेहरा सहित तीन अधिकारियों का पैनल नामांकित किया था। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि यह बड़ी असमान्य बात है कि सेना प्रमुख रक्षा मंत्रालय को दरकिनार करके सीधे गृह मंत्रालय से संपर्क कर रहे हैं क्योंकि सामान्य तौर पर ऐसे प्रस्तावों का अनुमोदन पहले रक्षा मंत्रालय करता है और फिर इन्हें आगे भेजा जाता है।

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