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Friday, March 16, 2012

बचाओ दिल्ली दरवार के कुत्तों से

बचाओ दिल्ली दरवार के कुत्तों से
दिल्ली दरवार के कुत्ते भी ,
हमारे यहां शेर होते हैं.।
नौचते हैं वे हमी को,
पर हम बेखबर होते हैं
फरिश्ता मानते हैं हम उनको
जो चंगेज बन हमको लूटते हैं
हमारे सपनों को ही नहीं
ये वर्तमान को भी डंसते हैं।
अब जाग जाओं गुनाहगारों को
मशीहा मानने वाले साथियो ।
इन सत्तालोलुप भैडियों को
पहचान लो जरा साथियो।
जातिवाद भ्रष्टाचार के है पोषक
ये मानवता के दुश्मन है साथियो।
इन मायवी राक्षसों से देवभूमि
आओ मिल कर बचाओं साथियो।।
खदेड़ो दिल्ली दरवार के कुत्तों को
कहीं वतन लुट न जाये साथियो।।
अब मशीहा न बनाओं इन गुनाहगारों को
खुद मशीहा बनो देश की रक्षा के खातिर।।
-देवसिंह रावत(17मार्च 2012 सुबह 9.41)

(उत्तराखण्ड में जिस प्रकार से भाजपा कांग्रेस ने अपने सत्तालोलुपु यादों को मुख्यमंत्री के रूप में थोप कर देवभूमि को जातिवाद, भ्रष्टाचार रूपि कुशासन से दस सालों में भारत का सबसे ईमानदार क्षेत्र को सबसे भ्रष्ट बना दिया है। उसी पर कटाक्ष करने वाली यह कविता उत्तराखण्ड के आम जनमनानस को जागृत करने के लिए है कि है उत्तराखण्ड की महान जनता आप इन दिल्ली की भाजपा व कांग्रेस नामक सत्ता लोलुपु दलो के मोहपाश में न फंस कर खुद अपने भाग्य के विधाता बनो और देश की लोकशाही की रक्षा करो।)

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