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Friday, June 15, 2012



-कांग्रेस के राष्ट्रपति दाव से भाजपा व ममता चित 

 अधिक बेहतर होता प्रधानमंत्री बनते प्रणव व मनमोहन बनते राष्ट्रपति



संप्रग प्रमुख सोनिया गांधी के राष्ट्रपति दाव से न केवल भाजपा ही नहीं अपितु सप्रंग सरकार को कदम-कदम पर नीचा दिखाने वाली बंगाल की मुख्यमंत्री व संप्रग सहयोगी ममता बनर्जी भी चारों खाने चित हो गई ।
सप्रंग गठबंधन की प्रमुख सोनिया गांधी ने जेसे ही देश के सबसे अनुभवी, वरिष्ठ व वर्तमान वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी को देश के राष्ट्रपति के पद का प्रत्याशी बनाने का ऐलान किया तथा इस ऐलान के चंद घण्टे के अंदर बहुजन समाजवादी पार्टी व समाजवादी पार्टी ने प्रणव मुखर्जी को राष्ट्रपति पद के लिए अपना समर्थन देने का ऐलान कर दिया। इसके बाद जिस प्रकार से राजग के घटक दलों (शिवसेना व जदयू) में प्रणव मुखर्जी के समर्थन में भाजपा के अनमने रुख को दर-किनारा करते हुए समर्थन में आगे आए, उससे साफ हो गया कि देश को अब तक का सबसे अनुभवी वरिष्ठ व साफ छवि का राजनेता प्रणव मुखर्जी के रूप में राष्ट्रपति के रूप में मिलेगा। परन्तु देश का इससे अधिक सौभाग्य रहता कि अगर प्रधानमंत्री के रूप में पूरी तरह से असफल ही नहीं अपितु अपने कुशासन से देश के आम जनता का जीना दूश्वार करने वाले मनमोहन सिंह को राष्ट्रपति के पद पर और प्रणव मुखर्जी को प्रधानमंत्री के पद पर आसीन करने का काम सप्रंग प्रमुख सोनिया गांधी करती। परन्तु लगता है कांग्रेस प्रमुख व उनके राजनैतिक सलाहकारों की बुद्धि पर काल ने पर्दा ही डाल दिया है। जो वे धृतराष्ट्री हट लगा कर मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाये रख कर अपनी पार्टी के हितों पर मट्ठा डाल ही रहे हैं इसके साथ मनमोहन सिंह के कुशासन से देश की आम जनता का मंहगाई, भ्रष्टाचार व आंतकवाद के दश से जीना दूश्वार कर रही है। जो भी घटनाक्रम घटित हो रहे हैं उससे मेरे संकल्प को मजबूती प्रदान करते हुए दिखाई दे रही है कि आगामी लोकसभा चुनाव जो 2014 में हो या उससे पहले उसमें मिले जनादेश से कांग्रेस ही नहीं अपितु भाजपा भी सत्ता से बाहर होंगे। वहीं प्रधानमंत्री तीसरे मोर्चे का ही बनेगा परन्तु वह मुलायम सिंह यादव भी नहीं होंगे। उस सरकार को भाजपा बाहर से समर्थन करेगी। सवाल जहां तक प्रणव मुखर्जी अन्य सभी उम्मीदवारों का उन सबसे अधिक राजनैतिक अनुभव है। वे भी साफ छवि के है। परन्तु यह जगजाहिर है कि देश की आम जनता आज भी पूर्व राष्ट्रपति डा अब्दुल कलाम को इस पद पर आसीन देखना चाहती है।
सोनिया गांधी ने प्रणव मुखर्जी को राष्ट्रपति का प्रत्याशी बना कर उन तमाम अटकलों पर विराम लगाया कि वे प्रणव पर भरोसा नहीं करती है। इसके अलावा दादा के नाम से राजनैतिक जगत में विख्यात सबसे वरिष्ट व कद्दावर कुशल राजनेता प्रणव मुखर्जी अपने जीवन के 5 दशक से अधिक के राजनैतिक सफर में देश के सबसे बडे पद राष्ट्रपति के पद पर आसीन होकर काफी हद तक प्रधानमंत्री न बन पाने की टीस को भुला पायेंगे। आशा है दादा देश के संविधान के अनुसार दलगत राजनीति से उपर उठ कर अपने पद के दायित्व को निष्पक्षता से निर्वहन करेंगे।

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