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Tuesday, June 19, 2012


सितारगंज में भाजपा व उक्रांद के शर्मनाक समर्पण से हैरान लोग


देहरादून।(प्याउ)। जिस प्रकार से सितार गंज विधानसभा उप चुनाव के दंगल मुख्यमत्री विजय बहुगुणा के खिलाफ चुनावी मैदान में अपने प्रत्याशी न उतारने की सपा, बसपा व राकांपा की घोषणा को प्रदेश की जनता ने  सामान्य घटना मान कर नजरांदाज कर लिया। परन्तु जिस प्रकार ने भाजपा ने यहां पर कई दिनों बाद प्रकाश पंत को यहां से चुनावी जंग में उतारा और उक्रांद पी ने जिस प्रकार गठबंधन धर्म की दुहाई दे कर यहां पर बहुगुणा का समर्थन करने की बात कह कर अपना प्रत्याशी चुनावी दंगल में न उतारने की घोषणा की उससे लोगों को गहरा धक्का लगा। खासकर जिस प्रकार से मुख्यमंत्री ने भाजपा के विधाकय को यहां से तोड़ा और जिस प्रकार से कांग्रेस भाजपा के अन्य विधायकों पर डोरा डाल रही है उसको देख कर भाजपा से यहां पर मजबूत प्रत्याशी उतारने की आशा प्रदेश की आम जनता ही नहीं राजनैतिक समीक्षक भी कर रहे थे।  वहीं उक्रांद जिस प्रकार से सितारगंज में मुख्यमंत्री द्वारा बंगाली समुदाय को थोक के भाव से भूमिधरी के पट्टे नवाजने का विरोध कर रहा है उसको देख कर उत्तराखण्ड की जनता को आशा थी कि उक्रांद जनभावनाओं का सम्मान करते हुए यहां पर चुनाव के मैदान में जरूर उतरेगी। परन्तु उक्रांद ने जनभावनाओं को नजरांदाज करके जीस प्रकार सितारगंज चुनाव से पीठ दिखाने का काम किया उससे उत्तराखण्ड के हितों के लिए संघर्ष करने वाली जनता की आशाओं में बज्रपात हुआ।
 भाजपा को चाहिए था कि यहां पर वह यहां के मजबूत जमीनी नेता को उतारते। उसने अपनी लापरवाही से बसपा से निष्काशित नेता नारायण पाल को भी अपने पाले में ला कर चुनावी दंगल में नहीं उतार पाये। वह यहां से खण्डूडी जरूरी के नारे में करोड़ो रूपये पानी की तरह बहाने के बाबजूद सितारगंज से न तो अपने महानायक खंडूडी को ही चुनावी दंगल में उतार पाये व नहीं कोश्यारी को। यही नहीं यहां से वे इस क्षेत्र के सांसद रह चूके बलराज पासी को चुनावी दंगल में उतारते तो लोगों को जरा नाम से जानने को मिलता। परन्तु प्रकाश पंत का यहां से उतारना केवल एक प्रकार से भाजपा का शर्मनाक आत्म सम्र्पण ही समझा जाता। इस प्रकरण से साफ हो गया कि भाजपा ने लोकसभा चुनाव की तरह यहां भी विजय बहुगुणा को अपने हाथों से विजयश्री की माला पहनाने की व्यवस्था कर दी। इससे प्रदेश की जनता हैरान है।
निर्णायक संख्या में विस्थापित बंगाली व मुस्लिम मतदाताओं वाली इस सितारगंज विधानसभा सीट में  कुल 91480 मतदाताओं में से  48966 पुरुष व 42514 महिला है। वर्तमान विधानसभा चुनाव में इस विधानसभा में भाजपा के किरन चन्द मंडल 29280 मत लेकर विजयी रहे थे, वहीं  दूसरे नम्बर पर बसपा के नारायण पाल को 16668 मत, कांग्रेस के सुरेश कुमार को 15560, निर्दलीय अनवार अहमद को 7085, समाजवादी पार्टी के विनय कृष्ण मंडल को 1456, निर्दलीय ईश्वरी प्रसाद को 1338, इंडियन जस्टिस पार्टी के हरचरण सिंह को 841, पीस पार्टी के सरताल अली को 667, उक्रांद(पी) के शाहीन खान को 393, लोक जनशक्ति पार्टी के बच्चन सिंह को 294 व शिव सेना के राम चन्द्र को 238 मत मिले थे। इस कारण यहां पर भाजपा का तो जनाधार माना जा सकता है परन्तु उक्रांद का नाम मात्र। भाजपा का समर्थन से विजयी किरण मण्डल की बंगाली विस्थापितों की अधिकांश वोट इस समय कांग्रेस को जाने की आश से यहां पर कांग्रेस का विजय होना तय माना जा रहा है।

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