यों कौन छोड़ना चाहता है अपनी धरती, अपने गांव को,
पेट की आग ने मेरे हम वतनों को बेवतन कर दिया।
आज इतना ही कहूगा आपसे मेरे बेवतन हुए साथियो,
अगर खुदगर्ज हुक्मरानों ने सुध ली होती वतन की।
हम भी अपने घर आंगन में बसंत की तरह खिलते।।
-देवसिंह रावत

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