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Tuesday, June 5, 2012


मनमोहन को हटाये बिना मजबूत नहीं होगी कांग्रेस

4 जून को कांग्रेस की विस्तारित कार्यसमिति की बैठक संसद में 3 जून को संसद की चैखट जंतर मंतर पर हुई बाबा रामदेव व अण्णा हजारे के अनशन के बाद हुई। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कांग्रेसी महामंत्रियों, मंत्रियों, सांसदों, मुख्यमंत्रियों, सहित तमाम नेताओं को गुटबाजी से दूर रहने की सलाह दी। वहीं प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सरकार के कार्यो की सराहना की। बैठक में भले ही हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपेन्द्रसिंह हुड्डा ने जिस प्रकार से कांग्रेस को मजबूत करने के लिए अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश की उससे साफ नजर आ रहा है कि निकट भविष्य में दिग्गज कांग्रेसी मंत्रियों व पदाधिकारियों से कांग्रेस को सुधारने के नाम पर कामराज प्लान के पदचिन्हों पर चलने का काम कांग्रेस करेगी। परन्तु कांग्रेस आलाकमान सहित प्रधानमंत्री को समझ लेना चाहिए कि कामराज को लागू करने वाले नेता आज के कांग्रेसी प्रधानमंत्री या संगठन के बडे नेताओं की तरह जनता से कटे हुए लोग नहीं अपितु जनाधार वाले नेता थे। आज कांग्रेस का दुर्भाग्य यह है कि न तो प्रधानमंत्री का व नहीं कांग्रेस की अध्यक्ष, महामंत्रियों का जनता या संगठन के आम कार्यकत्र्ता से सीधे संबाद तक हे। हालत यह है कि कांग्रेस ने जनाधार वाले नेताओं के बजाय सरकार में मनमोहनसिंह, मोंटेकसिंह आलू वालिया, आनन्द शर्मा जेसे जनाधार बिहिन लोगों को आगे किया हुआ है वहीं संगठन में अहमद पटेल, जनार्जन द्विवेदी व बीरेन्द्रसिंह जैसे जनाधारहीन लोगों को आगे किया हुआ है। इससे कांग्रेस में जनांधार वाले नेताओं को बार बार अपमानित होना पड रहा है और आज कांग्रेस जनता की नजरों में आम जनता की नहीं अपितु थैलीशाहों की पार्टी बन कर रह गयी है। सोनिया गांधी को इस जमीनी हकीकत से न तो भान है व नहीं उनके कार्यो से कहीं यह प्रदर्शित ही हो रहा है। अगर उनको भान होता तो वे अविलम्ब मनमोहन सिंह को देश की सत्ता से दूर करके आम कार्यकत्र्ताओं की मांग के अनुसार राहुल गांधी को देश की बागडोर सोंपती। वहीं प्रदेशों में जनाधार व साफ छवि के नेताओं के बजाय विजय बहुगुणा जेसे नेताओं को आसीन नहीं करती। आज कांग्रेस का जो पतन हेदारबाद सहित तमाम कांग्रेस समर्थक राज्यों में हो गया है उससे साफ लगता है कि कांग्रेस आला नेतृत्व व उसके सलाहकारों को न तो देश की आम जनभावनाओं का भान है व नहीं अपने ही पार्टी के हितों का भान है। जिस कांग्रेस को नरसिंह राव ने जमीदोज कर दी थी उस कांग्रेस का जिंदा सोनिया गांधी ने अपने संघर्ष से किया था परन्तु न जाने फिर क्यों किसके दवाब में आ कर कांग्रेस को जमीदोज करने को उतारू रहे राव के आंखों के तारे जनता से पूरी तरह से कटे हुए कुशासन के प्रतीक मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाये रखने की आत्मघाती भूल सोनिया गांधी क्यों कर रही है। मनमोहन सिंह के कुशासन से त्रस्त देश की जनता की हालतो ंसे साफ लगता कि मनमोहन सिंह नरसिंह राव की तरह कांग्रेस व देश को रसातल में पंहुचाने की कोई कसर नहीं छोडेंगे। वहीं वे अपने राजनैतिक आदर्श गुरू नरसिंह राव के कांग्रेस को पूरी तरह से जनता से काटने के सपने को पूरा करने का काम ही करके ही दम लेगे। आज उनके शासन में जनता मंहगाई, भ्रष्टाचार व आतंकवाद से त्रस्त है। आने वाला समय ही बतायेगा कि कांग्रेस की यह भूल कांग्रेस व देश को कितनी भारी पड़ी। लगता है कांग्रेस आला नेतृत्व जनता की भावना नहीं समझ पा रही है। अगर कांग्रेस आलाकमान दीवारों में लिखी इस इबादत को नहीं समझ पाती है तो 2014 के लोकसभाई चुनाव में कांग्रेस को देश की सत्ता से बेदखल होने से कोई शक्ति बचा नहीं पायेगी। शेष श्रीकृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्रीकृष्णाय् नमो।

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