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Thursday, June 21, 2012


कश्मीर समास्या के तीन महत्वपूर्ण समाधान
कश्मीर में भारत व भारतीय झण्डे का जो अपमान होता है और जिस प्रकार से वहां पर भारत विरोधी ही नहीं देशद्रोही सरेआम देश की सम्पति को नुकसान पंहुचाते हुए हिंसा फेलाते और राष्ट्रीय झण्डे को ही नहीं भारतीय संस्कृति को सरेआम कलंकित करने का दुशाहस करते हैं, उसके लिए आतंकवादी, व इन दहशतगर्दो को भारत विरोधी कृत्यों को करने के लिए शर्मनाक संरक्षण देने वाले पाक व अमेरिका से भी अधिक गुनाहगार भारत के नपुंसक सरकारें रही। सरकार चाहे कांग्रेस गठबंधन के मनमोहन सिंह रहे या संघ पोषित भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग गठबंधन की रही हो या अन्य दलों की। दो दशकों में भारत की सरकारें इतनी नपुंसक हो गयी कि वह देश के हितों की रक्षा के बजाय अमेरिका के इशारे पर कश्मीर में भारतीय हितों को सरेआम रौंदने वाले कश्मीरी आतंकियों का सफाया करने के बजाय उनसे नपुंसकों की तरह वार्ता आदि का नाटक कर रहे है। कश्मीर समस्या का पहला समाधान यह है कि जम्मू कश्मीर प्रदेश को जम्मू, कश्मीर व लद्दाख तीन राज्यों में विभाजित करके किया जा सकता है । इसका दूसरा समाधान कश्मीर में धारा 370 को समाप्त करने के साथ पाकिस्तान के तमाम आतंकवादी अड्डों का सफाया करने के साथ पाक अधिकृत कश्मीर का सेना के हस्तक्षेप के दम पर भारत हासिल करने का है। इसका तीसरा और अंतिम समाधान है कश्मीर में सीमान्त क्षेत्र में इस्राइल व चीन द्वारा अपने अशांत प्रांतो में या तो भूमिहीन देशभक्तों या सेना से सेवानिवृत पूर्व सैनिकों को उचित सुविधा दे कर यहां पर बड़ी संख्या में बसा कर कश्मीर में फैले आतंक को परास्त किया जाय। परन्तु जिस प्रकार से अमेरिका के दवाब में मनमोहन सरकार जिन वार्ताकारों की रिपोर्ट के अधार पर अगर कोई आत्मघाती समाधान खोज कर सदरे रियासत व वजीरे आजम आदि जैसे आदम युग में लोटने व कश्मीर को अधिक स्वायतता देने का कोई कार्य किया तो कश्मीर सदा के लिए भारत के हाथों से लुट जायेगा। परन्तु देश का दुर्भाग्य है कि देश की सरकारे व राजनैतिक दल देश हित के बजाय अपने दलीय हित व सत्ता प्राप्ति के लिए अंध तुष्टीकरण कर देश की एकता पर अपने स्वार्थो का बज्रपात करता है। इसी कारण वोटों के मोह में आज कश्मीर ही नहीं आसाम व बंगाल के बाद अब उत्तराखण्ड को भी इसी दिशा में धकेलने का राष्ट्रघाती कृत सरकारी संरक्षण से शर्मनाक ढ़ग से किया जा रहा है। इस राष्ट्रघाती प्रवृति पर निकट भविष्य में अगर कठोरता से अंकुश नहीं लगाया तो वह दिन दूर नहीं जब पूरा भारत ही पाक की तरह आतंक की सबसे बड़ी फेक्टरी बन कर तबाह हो जायेगा।  

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