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Sunday, June 24, 2012


बांध नहीं विश्व पर्यावरण रक्षक उत्तराखण्डियों को देश व विश्व संस्था प्रदान करे निशुल्क घरेलु गैस, पानी व बिजली

आज विश्व संस्था  व भारत सरकार को चाहिए कि  शताब्दियों से पूरे देश ही नहीं अपितु विश्व को हिमालयी क्षेत्र के जंगल व जमीन व जल की रक्षा करके पर्यावरण व जल संसाधनों को प्रदान करने वाले हिमालयी क्षेत्र के उत्तराखण्डियों को निशुल्क बिजली, पानी व घरेलू गैस को दे कर लोगो ंको जल जंगल व जमीन के रक्षक के रूप में सम्मानित करके अपने दायित्व का निर्वहन करे। इसके अलावा विश्व संस्थाओं व देश प्रदेश सरकारों द्वारा चलायी जाने वाली तमाम पर्यावरण संवर्धन व वृक्षा रोपण आदि कार्यक्रमों को एनजीओ आदि हवाई संस्थाओं के माध्यम से नहीं अपितु ग्राम सभाओं के माध्यम से स्थानीय लोगों द्वारा ही संचालित करके उनके रोजगार के नये अवसर खोल कर विश्व पर्यावरण के साथ साथ जल, जंगल व जमीन की रक्षा करने का काम किया जाय।
इन बांध समर्थकों को एक बात समझ लेनी चाहिए कि बांध के विरोध में केवल वामपंथी, भारतपंथी व उत्तराखण्ड राज्य आंदोलनकारी ही नहीं अपितु प्रदेश के ही नहीं देश के तमाम प्रबुद्ध लोग एकजूट है।  उत्तराखण्ड का कोई भी सच्चा सपूत होगा वह कभी भी उत्तराखण्ड को सेकडों बांधों से तबाह करने की किसी को भी इजाजत नहीं देगा। आज उत्तराखण्ड के राजनेता चाहे किसी भी दल से जुड़ा हो, तमाम बुद्धिजीवियों और आम जनता सहित प्रदेश सरकार को इस विषय की गंभीरता को समझते हुए सामुहिक रूप से न केवल भारत सरकार से और भारत सरकार की तरफ से विश्व संस्था को विश्व पर्यावरण की सदियों से रक्षा करने वाले उत्तराखण्डियों को इन सुविधाओं व सम्मान से नवाजने की दिशा में अपने दायित्व का निर्वहन करें।

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