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Tuesday, June 5, 2012


रामदेव व अण्णा की ललकार से सहमी मनमोहनी सरकार व राजनेता

सत्तांधों के कुशासन के कारण भ्रष्टाचार से पूरी तरह से तबाह हो रहे भारत की रक्षा करने के लिए  3 जून को भारी गर्मी की परवाह न करते हुए हजारों की संख्या में देशभक्तों ने संसद की चैखट राष्ट्रीय धरना स्थल जंतर मंतर के समीप संसद मार्ग पर बाबा रामदेव व अण्णा हजारे के नेतृत्व में विशाल धरना प्रदर्शन किया। भ्रष्टाचारियों द्वारा विदेशी बैंकों में जमा किया गया देश का 400 लाख करोड़ काला धन जब्त कर देश में वापस लाने व भ्रष्टाचारियों पर अंकुश लगाने के लिए जनलोकपाल कानून बनाने आदि की प्रमुख मांगों के समर्थन में बाबा रामदेव व अण्णा हजारे ने संयुंक्त रूप से एक दिवसीय संयुक्त अनशन आंदोलन करके अपने कुशासन से देश को पतन के गर्त में धकेल रहे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व उनकी सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए आगाह किया कि अगर 8 अगस्त तक सरकार ने दोनों मांगों को  नहीं मानी तो वे 9 अगस्त से अंग्रेजो भारत छोड़ों के दिवस के अवसर पर भ्रष्टाचारियो गद्दी छोडा नामक आंदोलन का शुभारंभ कर देंगे।
जंतर मंतर को संसद मार्ग पर हजारों लोगों के साथ जब बाबा रामदेव ने ‘जागो मोहन प्यारे, देश बचाओ’ के नारे लगाये तो दिल्ली के हुक्मरानों की त्योरियां चढ़ गयी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व यूपीए सरकार पर निशाना बनाने की बाबा रामदेव व टीम अण्णा के संयुक्त अभियान को जहां सत्तासीन कांग्रेस ने देश में अस्थिरता फेलनाने व अलोकशाही प्रवृति बता कर निंदा की वहीं देश की अधिकांश जनता बाबा रामदेव व अण्णा हजारे के साथ साथ आंदोलन चलाने को देश के लिए सुखद बता रहे थे।
इस आंदोलन में बाबा रामदेव ने दो टूक शब्दों में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपने भ्रष्ट मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए ललकारा। रामदेव ने कहा कि अब वे विदेश में जमा काले धन को वापस लाने सहित अपनी तमाम मांगों को लेकर राजनीतिक दलों का दरवाजा खटखटाएंगे। इस कार्यक्रम में टीम अण्णा के प्रमुख सिपाहेसलार अरविंद केजरीवाल द्वारा  भष्टाचार में लिप्त मुलायम सिंह, लालू यादव, जयललिता व मायावती का भी नाम अपने संबोधन में लेने के तुरंत बाद  रामदेव ने आपत्ति की कि ‘आज हमने सोचा था कि किसी व्यक्ति का नाम नहीं लेंगे लेकिन अरविंद ने नाम लिया। हम किसी विवाद में नहीं पड़ना चाहते। हम व्यक्तिगत आलोचना के खिलाफ हैं। बाबा रामदेव की इस टिप्पणी के बाद अरविन्द केजरीवाल तुरंत मंच से चले गये जिससे समाचार जगत ने टीम अण्णा व बाबा रामदेव के बीच दूरियां बढ़ने की खबरों का प्रसारण किया, जिसका बाबा रामदेव व अण्णा ने मंच से ही खण्डन किया। हालांकि इस आयोजन में बाबा रामदेव छाये रहे टीम अण्णा के प्रमुख सदस्य अरविन्द केजरीवाल, किरण वेदी, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह तो दिखे परन्तु शांति भूषण, प्रशांत भूषण, कुमार विश्वास, रामगोपाल राय, अरविन्द गौड, सहित अन्य प्रमुख सदस्य नहीं दिखे।
गत वर्ष ही 4 जून की मध्य रात्रि को रामलीला मैदान में हुई पुलिस कार्रवाई में शहीद व घायल हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। मंच पर देश के महान सूपतों व शहीदों के चित्र विशेष रूप से लगाये गये थे।  दिल्ली के हुए इस ऐतिहासिक अनशन के अलावा रामदेव समर्थकों ने स्वामी रामदेव की कर्मस्थली हरिद्वार पटना, रायपुर, भोपाल, अहमदाबाद, हरिद्वार, लखनऊ आदि देश के दर्जनों शहरों में भी रामदेव समर्थकों ने अनशन किया। हरिद्वार में बाबा समर्थकों व कांग्रेस के कार्यकत्र्ताओं के बीच गंभीर टकराव होते होते बचा। बाबा रामदेव द्वारा कांग्रेस को निशाना बनाये जाने से आक्रोशित कांग्रेस सेवादल के कार्यकत्र्ताओं ने शहर में विरोध प्रदर्शन करके बाबा रामदेव के खिलाफ जांच में तेजी लाने की मांग की।
सभा में देश के प्रसिद्ध उद्योग घराने के प्रमुख जिंदल ने न केवल मंच में बिराजे अपितु इस मंच से एकजूटता का आवाहन भी किया।  इस समारोह में जहां बड़ी तादाद में निकटवर्ती राज्यों के समर्पित लोग पहुंचे थे परन्तु अण्णा के आंदोलन में भाग लेने वाले हजारों की संख्या में सडकों पर उतरने वाले युवाओं की कमी देखते ही नजर आयी। इसके बाबजूद हजारों की संख्या में चिलचिलाती धूप में तारकोल की गर्म सडक पर घण्टे बेठे रहने का जज्बा बाबा के प्रति लोगों का समर्पण ही प्रर्दशित करता है।
रामदेव ने कहा, मैंने अपनी मांगों का एक समर्थन पत्र तैयार कर लिया है। इसे लेकर सभी नेताओं के पास जाऊंगा। टीम अन्ना के शुरुआती समर्थक और फिर इसके खिलाफ बेहद मुखर हो गए जद-यू के नेता शरद यादव, सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव और भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के साथ ही उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के पास भी समर्थन के लिए जाने का एलान किया। बाबा ने कहा, ‘हम शरद यादव के पास जाएंगे। लालू से भी बात करेंगे। हमारा कोई खानदानी झगड़ा थोड़े ही है उनके साथ। उन्होंने कोई हमारी भैंस तो खोली नहीं है।श् इसी तरह उन्होंने कहा कि धरने के दौरान ही टीडीपी प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने उन्हें फोन कर आंदोलन में समर्थन का भरोसा दिया है।
इस 1 दिवसीय अनशन में रामदेव की ओर से सरकार के सामने 7 मांगे रखी गई हैं। इन मांगों के पूरा न होने पर बाबा ने जल्द ही बड़े स्तर पर लंबा अनशन करने की बात भी कही है। बाबा अपनी इन मांगों से सरकार का सिंहासन हिलाने की कोशिश में लगे हुए हैं।
मांगों पर एक नजर-
1-काले धन को राष्ट्रीय संपत्ति घोषित किया जाए
2-भ्रष्टाचारियों को उम्रकैद या फांसी की सजा हो
3-विदेशों में जमा 400 करोड़ रुपये के काले धन को वापस लाया जाए
4-करप्शन के मुद्दों को निपटाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बने
5-करप्शन के केस की 1 साल में सुनवाई हो
6- 500 और 1000 के नोट बंद किए जाएं
7-सरकारी काम तय सीमा में निपटाए जाए। मांगे सबके सम्मुख पढ़ कर सुनाई। इसके साथ इस अनशन रेली में जहां अब तक अलग अलग अपना आंदोलन चला रहे बाबा राम देव व अण्णा हजारे एक साथ आये वहीं जनलोकपाल विधेयक के स्वरूप का विरोध सडकों पर करने वाले एस सी व एसटी सरकारी कर्मचारियों के परिसंघ के अध्यक्ष उदित राज व मुस्लिम नेता के मंच से जोशीले भाषणों से लोगों में नई ऊर्जा व आशा का संचार हुआ। वहीं इस रेली में आम जनता को झकझोरने वाले भाषण दे कर बाबा रामदेव के निकट सहयोगी आचार्य बालकृष्ण ने भारत सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर उनकी नजर हरिद्वार स्थित उनके पातंजलि योग पीठ पर है तो वे उसको ग्रहण कर लें। आचार्य बाल कृष्ण ने कहा कि सरकार उनके पातंजलि पीठ को ग्रहण के साथ उनको व रामदेव दोनों को ताउम्र जेल में बद कर दे परन्तु देश के हित में विदेशों में जमा भारतीयों का 400 लाख करोड़ काला धन वापस ले आये व भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए जनलोकपाल कानून का निर्माण करे तो वे स्वागत करेंगे। इस आयोजन में मैं अपने साथी जगदीश भट्ट के साथ दोपहर तक रहा, दोपहर के बाद श्री कृष्ण विश्व कल्याण भारतीय के मोहनसिंह रावत मेरे साथ इस कार्यक्रम के समापन भाषण तक अनशन स्थल पर हजारों लोगों के साथ तपती हुई सडक पर बैठे रहे। जिस प्रकार से इस अनशन में अपने भाषण में तेजतरार मुस्लिम नेता ने देशवासियों को देश के राजनेताओं द्वारा छदम सेकलुरिजम के नाम पर देश को तबाह करने का आरोप लगाते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि अब इस देश को ऐसा सेकुलरिजम नहीं राष्ट्रवाद चाहिए। उन्होने आरक्षण व चंद सुविधाओं के टुकडे फेंकने का झांसे में देश के लोगों को न आने का आवाहन करते हुए कहा कि इन राजनेतिक दलों से नहीं इस भारत माता से यहां के लोगों को मांगना चाहिए। यह धरती सबकी है। इस रेली में दलित, मुस्लिम, किसान व जवान आदि जिस प्रकार से उमड़े उससे मनमोहनसिंह की सरकार ही नहीं अपितु तमाम राजनैतिक दलों में हडकंप मच गया है।
शेष श्रीकृष्ण कृपा।
हरि ओम तत्सत्। श्री कृष्णाय् नमो।

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