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Sunday, June 17, 2012


भारत में मोदी को ही एकमात्र देशभक्त व स्वाभिमानी नेता मानता है अमेरिका !

गांधी की तरह अमेरिका को दो टूक शब्दों में उसका असली चेहरा दिखाये मोदी

अमेरिका द्वारा गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी को अमेरिका आने के लिए वीजा न देने के प्रकरण का स्मरण होते ही मेरा मन महात्मा गांधी की उस महान दृढ़ता के लिए उनको शतः शतः नमन् करने को हिलोरे लेने लगता है । कितने महान व्यक्तित्व के धनी थे महात्मा गांधी जिनमें इतना नैतिक दृढ़ साहस व मानवीय दृष्टि भी थी कि अमेरिकियों के गांधी जी से अमेरिका पधारने के तमाम अनुनय विनय को दो टूक शब्दों में यह कहते हुए ठुकराया था कि अमेरिका हिंसक व शोषक देश है, जब तक उसकी यह वृति रहेगी मै अमेरिका में पांव नहीं रख सकता। क्या आज के किसी भारतीय नेताओं में इतना साहस है? चाहे नेता मनमोहन सिंह हो या अटल या अन्य सबके सब अमेरिका के आगे दुम हिलाने के लिए कितने अधीर हैं यह वर्तमान दो दशकों की राजनीति से साफ दिखाई देता है । किसी प्रकार अमेरिका के हितों के पोषण के लिए देश को अमेरिका के हितों की पूर्ति के लिए दाव पर लगाने वाले देश के वर्तमान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ही नहीं अधिकांश राजनैतिक दल किस प्रकार से अमेरिका के साथ परमाणु समझोता करने के लिए उतावले हुए। गांधी में कई कमी हो सकती है परन्तु भारत को जीतना करीब से समझने व आम जनता के मर्म को जानने की महारथ महात्मा गांधी को हासिल थी उतना आज किसी नेता में कहीं दूर दूर तक दिखाई तक नहीं दे रही है। गांधी की तरह मोदी भी एक इंसान है। उनमें भी कई कमियां हो सकती है परन्तु आज जिस प्रकार से मोदी ने अपने शासन प्रशासन के एक दशक से अधिक लम्बे समय के शासन काल में चंद कार्यो को अगर नजरांदाज कर दे तो उन्होंने देश में ही नहीं विदेशों में भी अपने नेतृत्व का पताका फहरा दिया है। उनमें जो राष्ट्रभक्ति व स्वाभिमान कूट कूट कर भरा है उसी प्रखर नेतृत्व के कारण अमेरिका को लगता है कि आने वाले समय में अगर मोदी भारत की कमान संभालते हैं तो भारत न केवल महाशक्ति बनेगा अपितु विश्व को अमेरिकी शोषण से भी मुक्ति दिलाने का काम कर सकता है। इसी कारण मोदी को अमेरिका फूटी आंख नहीं देखना चाहता। मोदी के प्रखर नेतृत्व से भयभीत अमेरिका यह देख कर भी हैरान है कि जिस देश के अटल से लेकर मनमोहन तक तमाम नेता उनके इशारों पर नाचते रहे, जिनके हितों को ही नहीं जिस देश के मंत्रियों के स्वाभिमान को उनके कपडे उतरवा कर भी अमेरिका में आने पर वह निरंतर जलील तक करता रहा उस देश में महात्मा गांधी के बाद एक ऐसा प्रखर नेतृत्व मोदी के रूप में कैसे तेजी से उभर रहा है जो आने वाले समय में न केवल भारत को महाशक्ति बना सकता है अपितु अमेरिका के शोषणवादी प्रवृति पर भी ग्रहण लगा सकता है। लगता है मोदी को वीजा न दे कर अमेरिका ने अप्रत्यक्ष रूप से यह घोषणा कर दी है वर्तमान भारतीय राजनेताओं में केवल मोदी ही ऐसा नेता है जो अमेरिका की लूट प्रवृति के आगे झुकने वाला नहीं है। वह भारतीय हितों व स्वाभिमान को अमेरिका के इशारे पर अमेरिका के चरणों में समर्पित करने वाले अन्य नेताओं की तरह नहीं है। मुझे आशा है मोदी को भी अमेरिका की इस अपमानित करने वाले कृत्य का विरोध करने के लिए महात्मा गांधी की तरह अमेरिका को उसका असली चेहरा दिखाना चाहिए। आज जिस प्रकार से देश में मनमोहन ही नहीं भाजपा सहित देश में अधिकांश नेताओं में राष्ट्र स्वाभिमान व सही दिशा देखने को नहीं मिल रही है। उससे देश में न केवल आम जनता अपितु विश्वविख्यात भारतीय उद्योगपति प्रेम जी सहित अधिकांश उद्यमी भी दिशाहीन भारतीय नेतृत्व के कारण देश के हो रहे पतन से दुखी है। ऐसे समय में मोदी जैसे मजबूत इरादों के देशभक्त प्रखर नेतृत्व का होना आम भारतीयों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। परन्तु देश में राजनैतिक दलों में संकीर्ण दिशाहीन व जातिवादी नेतृत्व मोदी की इस राह में कांटे बिछाने में लगा है। जिस प्रकार से भाजपा सहित देश के तथाकथित संकीर्ण पदलोलुपु जातिवादी व भ्रष्टाचार को संरक्षण नेता आज मोदी को तानाशाह बता कर देश की बागडोर संभालने से रोकने का असफल प्रयास कर रहे है उससे देश की स्वाभिमानी जनता मोदी के पक्ष में खुल कर सामने आ रही है। मोदी का व्यवहार भले ही तानाशाह की तरह भाजपा सहित देश के अन्य नेताओं को लगे, परन्तु यह बात साफ है की राजनीति में देश को अमेरिका का गुलाम बनाने के लिए उतारू नेतृत्व किसी भी प्रकार से इस देशभक्त स्वाभिमानी मोदी की राह में कांटे बिछाने का कदम कदम पर षडयंत्र कर रहे है। इन्हीं षडयंत्रों को भांप कर देशहित के लिए मोदी ने देशहित में कठोर प्रहार करके इनके अरमानों को पंख लगने से पहले ही जमीदोज कर दिया है। मोदी जानते हैं लोकशाही के नाम पर आज भारत की राजनीति को जातिवादी, क्षेत्रवादी व भ्रष्टाचारी नेताओं ने किस प्रकार देश को खोखला कर दिया है। इसलिए मोदी इन तत्वों को सर उठाने से पहले कुचलने की चाणक्य नीति के तहत ही अमल कर रहे है। मोदी को चाहिए कि वह ऐसा शासन करे कि धर्म, जाति व क्षेत्र के नाम पर किसी भी बेगुनाह का शोषण व दमन न हो। सबको प्रगति व सम्मान का अवसर मिले। किसी से अन्याय न हो । हाॅं इस चीज का भी वे भान रखें कि कोई भी गुनाहगार जो देश की जडों में मट्ठा डाल रहा हो वह देश में कानून के शिकंजे से बच न पाये। देश में इतनी नपुंसक सरकारें भी न हो जो अटल सरकार की तरह संसद पर हमला होने पर भी अमेरिका की बंदर धमकी से सहम जाये या मनमोहन सिंह की सरकार की तरह संसद हमले के मौत की सजा पाये भारत के दुश्मन को फांसी देने का साहस तक न जुटा पाये। आज भारत में कश्मीर ही नहीं असम भी इन्हीं अंध तुष्टीकरण के कारण तबाह हो चूका है। इन्हीं के कारण अब उत्तराखण्ड भी चंद सालों में इसी दिशा में धकेलने का षडयंत्र हो रहा है। देश की रक्षा के लिए आज देश को मनमोहन सिंह जैसे अमेरिकापरस्त प्रधानमंत्री की नहीं नरेन्द्र मोदी जेसे राष्ट्रभक्त नेता की जरूरत है। यह साफ दिखाई दे रहा है 2014 के लोकसभाई चुनाव में देश की इस जनभावनाओं को साकार होने से व मोदी को भारत का प्रधानमंत्री बनने से रोकने का कुकृत्य कांग्रेस नहीं अपितु भाजपा के जातिवादी, दिशाहीन पदलोलुपु नेता ही करेंगे। परन्तु इनको इस चीज का भान होना चाहिए कि सूर्य को बादल लम्बे समय तक नहीं ढक सकता है, आने वाला समय राष्ट्रभक्त मोदी जैसे नेताओं के स्वागत करने के लिए भारतीय जनमानस पलकें बिछा रहा है। मोदी व गांधी की सोच में भले ही अंतर हो सकता है, दोनों के जीवन दर्शन में अंतर हो सकता है परन्तु गांधी की तरह मोदी में भी भारत के स्वाभिमान व देशभक्ति कूट कूट कर भरी हुई है। शेष श्रीकृष्ण कृपा। हरि ओम तत्सत्। श्रीकृष्णाय् नमो।

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