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Thursday, June 28, 2012


आपातकाल से बदतर कुशासन से मुक्ति के लिए देश तरफ रहा है एक जय प्रकाश नारायण के लिए

शोषण की मार झेल रहे है आम आदमी, मजदूर व कर्मचारी देश 
जंतर मंतर पर पायलटों के आमरण अनशन की शर्मनाक उपेक्षा कर रही है मनमोहन सरकार 


इसी पखवाडे 25 जून को एक तरफ देश में लोकशाही के समर्थक इंदिरा गांधी द्वारा इसी दिन देश के लोकतंत्र पर ग्रहण लगाने वाले आपातकाल की कड़ी भत्र्सना कर रहा था वहीं दूसरी तरफ देश की राजधानी दिल्ली में लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था संसद की चैखट राष्ट्रीय धरना स्थल जंतर मंतर पर भारतीय पायलट संघ व दिल्ली पत्रकार संघ अपने अपने संस्थानों में उनके हितों का गला घोंटने की आपातकाल से बदतर स्थिति के कारण तपती धूप में भी सडकों में उतर कर आंदोलन कर रहे थे। परन्तु क्या मजाल कि देश में प्रबुद्ध व उच्च सेवा प्रदान करने वाले आंदोलनकारी पायलटों की मांग को सुनने के दायित्व का निर्वहन तक करने की कोशिश करे। देश के भ्रष्ट हुक्मरानों के कृत्यों से सरकारी विमानन सेवा इंडियन एयरलाइन्स व एयर इंडिया बदहाली के कगार पर पंहुच गया। इनके प्रबंधकों के आत्मघाती व विश्वासघाती कार्यो के कारण एयर इंडिया भारी घाटे में संचालित हो रही है। इसके कारण इसके पायलटों के हितों पर कुठाराघात हो रहा है। इन आंदोलनकारी पायलटों की मांगों पर सहानुभूति पूर्वक विचार करने के बजाय सरकार ने इनको निकालने का जो कृत्य किया उससे आक्रोशित पायलटों की सर्वोच्च संस्था ने जंतर मंतर पर आमरण अनशन करने का मजबूरी में कदम उठाया। इसके दस दिन बित जाने के बाबजूद सैकडों आंदोलनरत पायलटों की मांगों को सरकार नजरांदाज कर रही है। वहीं देश में लोकशाही का चैथा स्तम्भ ‘प्रेस’ के सिपाई पत्रकारों की स्थिति भी दिन प्रतिदिन बद से बदतर हो गयी है। देश में मनमोहनसिंह के प्रधानमंत्रित्व में देश की सत्ता पर काबिज सरकार में यहां मजदूर, कर्मचारियों व मेहनतकश आम आदमी की दुर्दशा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके एक ताकतवर श्रम मंत्री को अपने पद से हाथ इसीकारण धोना पडा कि उन्होंने देश की राजधानी से सटे हुए हरियाणा की औद्योगिक नगरी में बहुराष्ट्रीय कम्पनी में हो रहे मजदूरों के हितों पर बोलने का साहस किया। बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के दवाब में इस मेहनतकश आम आदमी के पक्ष में बोलने वाले मंत्री व कांग्रेस आला नेतृत्व के सबसे करीबी नेताओं में अग्रणी आस्कर फर्नाडिस के सत्ता से बेदखली ही नहीं हुई अपितु देश में मजदूर, कर्मचारियों व मेहनतकश आम आदमी की जुबान पर एक प्रकार से ताला ही लगा दिया गया। आज देश में ठेकेदारी व्यवस्था से देश के हितों व आम आदमियों का कैसे जीना हराम किया जा रहा है इसका सबसे प्रत्यक्ष व देश के हुक्मरानों को पूरी तरह से बेनकाब करने वाला प्रकरण है ‘ देश की राजधानी दिल्ली में बिजली को निजी क्षेत्र की बिजली कम्पनियों के हाथों यहां के करोड़ों लोगों को खुले आम लुटवाना। जिस प्रकार से दिल्ली सरकार की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के आशीर्वाद व बिजली कम्पनियों के बिजली के मीटरों में भारी अनिमियताओं को शिकायत पर जांच किसी निप्पक्ष जांच ऐजेन्सी से कराने के बजाय मुनाफे में चल रही इन बिजली कम्पनियों को और लाभ पंहुचाने के लिए बिजली की दरों में यकायक 24 प्रतिशत की बढोतरी का तुगलकी आदेश देकर लोकशाही को ही शर्मसार कर दिया।
इस देश में जब पायलट व पत्रकार जैसे ताकतवर व असरदार तबके की मांगों पर सरकार ध्यान तक न देने का कृत्य कर रही है तो वह देश में आम मजदूरों व कामगारों तथा कर्मचारियों के हितों के बारे मे ंसोचने की फुर्सत ही कहां से निकालेगी। आज देश में कर्मचारियों व मजदूरों की स्थिति बहुत ही दयनीय हो गयी है। सभी संस्थान ठेकेदारों के हवाले दे कर उनसे कर्मचारियों का अमानवीय व अलोकशाही शोषण किया जा रहा है। भारत में जिस प्रकार से सरकारी व निजी संस्थानों में ठेकेदारी प्रथा का प्रचलन बद से बदतर बढ़ाया जा रहा है उससे कर्मचारियों के हितों पर सीधे डाका ही डालना माना जा रहा है। इससे प्रबंधक, मालिक की भ्रष्ट ठेकेदारों से मिल कर मजदूर व कर्मचारियों का शोषण किया जाता है। उसके बेतन का एक बडा हिस्सा हर माह ठेकेदार की तिजोरियों के लिए सेंघ मार दी जाती है। इस ठेकेदारी व्यवस्था का शिकार मीडिया, कर्मचारी व मजदूर बने हुए है। इस देश में कर्मचारियों को जो खुलेआम शोषण ठेकेदारी प्रथा से किया जा रहा है उससे लगता है कि एक दिन देश को बदहाली को सुधारने के नाम पर ठेकेदारी के तहत फिर से ईष्ट इंडिया कम्पनी की तरह की ही अमेरिकी बहुराष्ट्रीय कम्पनी को देश के हुक्मरान सोंप दे तो कोई आश्चर्य नहीं होगा। खासकर जिस प्रकार सरकारी उद्यमों व संस्थानों में पहले भ्रष्ट नौकरशाह व प्रबंधन आसीन करा कर देश के हुक्मरान इन संस्थानों में खुले भ्रष्टाचार व लुटबाजारी मचा कर इनको हजारों करोड़ के घाटे में डुबोते हैं उसके बाद इनको अपने प्यादों के निजी संस्थानों के हाथों कोडियों के दाम पर बेच देते है। यही काम देश में पहले भाजपा नेतृत्व वाली राजग सरकार में आईटीसी होटलों व पंच रत्न उद्यमों के निजीकरण में किया गया और अब इसी दिशा में कांग्रेस नेतृत्व वाली सप्रंग सरकार में भी किया जा रहा है। आज देश में डीटीसी हो या एयर इंडिया आदि संस्थान इनमें जो नुकसान हो रहा है वह इसके भ्रष्ट प्रबंधन तंत्र के कारण हो रहा है। देश में भ्रष्ट हुक्मरानों की शर्मनाक स्थिति जो देश को लुटने व लुटवाने वाली है उसका जीता जागता उदाहरण है देश के सबसे विश्वसनीय व श्रेष्ठ व्यवसायी घराना टाटा को एयर लाइन्स का कार्य न दे कर देश को चूना लगाने वालों को यह सेवा दे कर देश व कर्मचारियों का खुला शोषण कराया जाता है। आज सरकारी संस्थाओं में ठेकेदारी प्रथा लागू करके कर्मचारियों का खुला शोषण किया जा रहा है वह आपातकाल से बदतर है।
आज देश में इस ठेकेदारी प्रथा की खुली लूट के खिलाफ न तो भाजपा व नहीं कांग्रेस सहित दलों में आवाज ही निकल पा रही है। वामपंथियों का विरोध भी पहले की तरह धारधार होने के बजाय केवल रस्मी अदायगी रह गया है।  देश में कांग्रेस नेतृत्व वाली मनमोहनी सरकार  के नेतृत्व में आम आदमी का जीना ही मंहगाई, आतंकवाद व कुशासन से बेहाल कर रखा है वहीं ठेकेदारी प्रथा से कर्मचारी व मजदूरों का जीवन भी दूश्वार कर दिया है। दिल्ली में जिस प्रकार से शीला सरकार खुले रूप से बिजली की निजी कम्पनियों की लाभप्रद स्थिति के बाबजूद बिजली के बिलों में भारी बढ़ोतरी कर रही है वह किसी भी प्रकार से खुली लूट से कम नहीं है। देश व देश की जनता आज आपातकाल से बदतर स्थिति में जी रहे है। सबसे दुर्भाग्य यह है कि उस समय देश को आपातकाल से मुक्त कराने के लिए जय प्रकाश नारायण जैसे महानायक थे परन्तु आज देश के पास एक भी ऐसा नेता नहीं दिखाई दे रहा है जो इस कुशासन से दिल से दुखी हो, केवल राजनैतिक रोटियों को सेकने के लिए एक दूसरे दलों को कोसने के लिए भाषण दे कर विरोध करने वाले सेकडों नेता हैं परन्तु एक भी ऐसा नहीं जो दलीय दलदल से उपर उठ कर देश की जनता को मनमोहन सिंह जैसे धृतराष्ट के कुशासन से मुक्ति दिलाने के लिए जयप्रकाश नारायण की तरह आगे आ कर देश का नेतृत्व करे।

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